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आज से पार्किंग में फिर टू व्हीलर के 10 रु. और फोर व्हीलर के 20 रु. देने होंगे

पेड पार्किंग में डबल चार्ज से पब्लिक को बस एक ही दिन की राहत मिली। आर्या टोल इंफ्रा कंपनी वीरवार को एमसी से सभी...

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2018, 03:20 AM IST
आज से पार्किंग में फिर टू व्हीलर के 10 रु. और फोर व्हीलर के 20 रु. देने होंगे
पेड पार्किंग में डबल चार्ज से पब्लिक को बस एक ही दिन की राहत मिली। आर्या टोल इंफ्रा कंपनी वीरवार को एमसी से सभी पार्किंग का पजेशन ले लेगी। हाईकोर्ट की डायरेक्शन पर कंपनी को राहत मिल गई है। एमसी की ओर से पार्किंग कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने के ऑर्डर को हाईकोर्ट ने सस्पेंड कर दिया। अब वीरवार से लोगों को 25 पेड पार्किंग में टू व्हीलर के 10 रुपए और फोर व्हीलर के 20 रुपए ही देने होंगे। यह फीस चार घंटे के लिए होगी, इसके बाद चार्जेज डबल हो जाएंगे।

पार्किंग की इंस्टॉलमेंट 3 करोड़ 69 लाख 50 हजार जमा नहीं करवाने पर एमसी ने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर दिया था। हाईकोर्ट ने वीरवार को कंपनी को निर्देश दिए कि 1 करोड़ 35 लाख वीरवार तक जमा करवाए और बाकी की राशि के तीन पोस्ट डेटेड चेक एमसी में जमा करवा दे। हर चेक में 5-5 दिन का गैप होगा। अगर कंपनी द्वारा दिए गए पोस्ट डेटेड चेक से पेमेंट एमसी के अकाउंट में 26 जुलाई तक जमा नहीं होती है तो एमसी के कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट के ऑर्डर स्टैंड करेंगे। हाईकोर्ट से राहत मिलते ही शाम 5.30 बजे तक कंपनी ने एमसी के अकाउंट में 1 करोड़ 35 लाख जमा करवा भी दिए। पार्किंग का पजेशन वीरवार को कोर्ट के ऑर्डर मिलने पर ही दिया जाएगा।

कंपनी ने दी दलील, हम तो पेमेंट देने को तैयार थे

हाईकोर्ट के जस्टिस आगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच में सुबह 10 बजे यह केस लगा हुआ था। इसे शाम तक पोस्टपोन कर दिया गया। शाम 4 बजे आर्या टोल इंफ्रा कंपनी के एडवोकेट गिरीश अग्निहोत्री कहा कि पांचवीं इंस्टॉलमेंट के 3 करोड़ 69 लाख 50 हजार जमा नहीं होने पर एमसी ने कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट कर दिया। जबकि कंपनी पेमेंट देने को तैयार है। इसपर जस्टिस मसीह ने एमसी के जॉइंट कमिश्नर से जानना चाहा कि जब कंपनी पेमेंट देने को तैयार है तो फिर देरी किस बात की है, कॉन्ट्रैक्ट रिवोक किया जाए। जॉइंट कमिश्नर तेजदीप सिंह सैनी की ओर से सरकारी एडवोकेट दीपाली पुरी ने पक्ष रखा कि एमओयू की कंडीशन अनुसार कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट किया गया है। कंपनी को पेमेंट जमा करवाने के लिए मौका दिया गया था। कॉन्ट्रैक्ट को वे बहाल नहीं कर सकते है, यह मामला निगम हाउस में जाएगा। वहीं से अप्रूव होगा तभी कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेट के ऑर्डर बहाल हो सकते हैं। इसपर जस्टिस एजे मसीह ने कह दिया कि वे खुद ही इस पर फैसला सुना देते हैं। इतना कहने के बाद जस्टिस ने फैसला दिया कि एमसी को कंपनी का टर्मिनेट किया कॉन्ट्रैक्ट ऑर्डर को सस्पेंड किया जाता है। ऑर्डर किया कि कंपनी 1 करोड़ 35 लाख जमा करवाए।


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