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दूसरों के प्रति अच्छे नहीं सच्चे बनें: मुनि श्री

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 04:05 AM IST

News - चंडीगढ़|जीवन में ऐसा सभी के साथ होता है कि हमारे नजदीकी मित्रों, रिश्तेदारों या परिचितों को किसी खास मौके पर पैसों...

दूसरों के प्रति अच्छे नहीं सच्चे बनें: मुनि श्री
चंडीगढ़|जीवन में ऐसा सभी के साथ होता है कि हमारे नजदीकी मित्रों, रिश्तेदारों या परिचितों को किसी खास मौके पर पैसों की जरूरत होती है और वे हमसे आर्थिक मदद की उम्मीद करते हैं। उस वक्त हमारे पास उनकी मदद करने की क्षमता नहीं होती लेकिन हम उन्हें स्पष्ट मना नहीं कर पाते हैं। हम उन्हें कहते हैं, मैं एक-दो दिन में जवाब देता हूं। जिस क्षण हमसे पूछा जाता है कि क्या हम उनकी मदद कर पाएंगे उसी क्षण हमें अपनी स्थिति के बारे में पता होता है लेकिन हमने अपने प्रियजनों को अंधेरे और उजाले के बीच छोड़ देते हैं। अगली बार जब वे संपर्क करते हैं तो हम बचने की कोशिश करने लगते हैं। कई बार बहाने बनाने लगते हैं। इस तरह हम खुद के लिए अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं और दूसरे को भी झूठा भरोसा दिलाते हैं। इस पूरी दुविधा की वजह यही है कि हम दूसरों की नजर में अच्छे बने रहना चाहते हैं। दूसरों की नजर में अच्छे बने रहने के कारण हम सच नहीं बोलते और अपने लिए मुश्किल स्थितियां पैदा कर लेते हैं। ये प्रवचन मुनि श्री देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्वर्ग में जाना चाहता है तो स्वर्ग के प्रवेश द्वार पर उसे दो सवालों के जवाब देने होते हैं। अगर आपने इन दोनों सवालों के जवाब हां में नहीं दिए तो आपको स्वर्ग में प्रवेश नहीं मिलता। इसमें पहला सवाल है - क्या जीवन में आपने खुशी और आनंद का अनुभव किया है और दूसरा सवाल है क्या आपने अपने आस पास के लोगों को खुशी बांटी है।

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