चंडीगढ़ समाचार

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एयरपोर्ट का सफर 10 किमी कम करने की तैयारी, कुछ ऑब्जेक्शन भी

चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मोहाली में बनने के बाद चंडीगढ़ से एयरपोर्ट की दूरी करीब 10 किलोमीटर की दूरी बढ़ गई...

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 04:10 AM IST
एयरपोर्ट का सफर 10 किमी कम करने की तैयारी, कुछ ऑब्जेक्शन भी
चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मोहाली में बनने के बाद चंडीगढ़ से एयरपोर्ट की दूरी करीब 10 किलोमीटर की दूरी बढ़ गई है। इस दूरी को कम करने के लिए करीब तीन साल से प्लानिंग चल रही है, लेकिन अभी तक इसका कोई सही हल निकलकर नहीं आया है। चंडीगढ़ स्थित पुराने एयरपोर्ट के पास से टनल बनाकर एयरपोर्ट टर्मिनल का रास्ता बनाने की बात लंबे समय से चल रही है। पहले सुरक्षा के लिहाज से एयरफोर्स इस बात के लिए राजी नहीं हो रहा था। लेकिन अब एयरफोर्स का कहना है कि रनवे एक्सपेंशन के बाद जो बाउंड्री वाॅल है, वहां से रास्ता निकाला जाता है तो उसे कोई ऐतराज नहीं है। हरियाणा सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन से एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर हाईकोर्ट में सब्मिट की है। हालांकि एयरफोर्स ने हाईकोर्ट में इस रिपोर्ट पर ऐतराज जताते हुए कहा कि बगैर एयरफोर्स की कंसेंट की कैसे यह रिपोर्ट तैयार कर दी गई। इस पर हाईकोर्ट ने डीपीआर को मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के पास यह कहते हुए भेजा है कि क्या यह प्लान फिजिबल है या नहीं इस पर अपनी राय दें। हरियाणा सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन से डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवाई है। डीपीआर के अनुसार एनएच-21 से 6.41 किलोमीटर लंबा रास्ता निकाला जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार अगर एनएच-21 से इस रोड को बना दिया जाता है तो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नये टर्मिनल से सीधा एक्सेस मिलेगा। इसका फायदा चंडीगढ़, पंचकूला और जीरकपुर के लोगों को होगा। साथ ही करीब 10 किलोमीटर का फासला भी कम हो जाएगा।

हरियाणा सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल ट्रांसपोर्ट काॅरपोरेशन से डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवाई

1217 करोड़ रुपए आएगा खर्च

6.41 किलोमीटर की होगी एप्रोच रोड

3.45 किलोमीटर रास्ता सड़क के रास्ते जाएगा

1.88 किलोमीटर अंडरग्राउंड होगा।

1.072 किलोमीटर एलिवेटेड होगा

मनोज अपरेजा | चंडीगढ़

चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मोहाली में बनने के बाद चंडीगढ़ से एयरपोर्ट की दूरी करीब 10 किलोमीटर की दूरी बढ़ गई है। इस दूरी को कम करने के लिए करीब तीन साल से प्लानिंग चल रही है, लेकिन अभी तक इसका कोई सही हल निकलकर नहीं आया है। चंडीगढ़ स्थित पुराने एयरपोर्ट के पास से टनल बनाकर एयरपोर्ट टर्मिनल का रास्ता बनाने की बात लंबे समय से चल रही है। पहले सुरक्षा के लिहाज से एयरफोर्स इस बात के लिए राजी नहीं हो रहा था। लेकिन अब एयरफोर्स का कहना है कि रनवे एक्सपेंशन के बाद जो बाउंड्री वाॅल है, वहां से रास्ता निकाला जाता है तो उसे कोई ऐतराज नहीं है। हरियाणा सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन से एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर हाईकोर्ट में सब्मिट की है। हालांकि एयरफोर्स ने हाईकोर्ट में इस रिपोर्ट पर ऐतराज जताते हुए कहा कि बगैर एयरफोर्स की कंसेंट की कैसे यह रिपोर्ट तैयार कर दी गई। इस पर हाईकोर्ट ने डीपीआर को मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के पास यह कहते हुए भेजा है कि क्या यह प्लान फिजिबल है या नहीं इस पर अपनी राय दें। हरियाणा सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन से डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवाई है। डीपीआर के अनुसार एनएच-21 से 6.41 किलोमीटर लंबा रास्ता निकाला जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार अगर एनएच-21 से इस रोड को बना दिया जाता है तो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नये टर्मिनल से सीधा एक्सेस मिलेगा। इसका फायदा चंडीगढ़, पंचकूला और जीरकपुर के लोगों को होगा। साथ ही करीब 10 किलोमीटर का फासला भी कम हो जाएगा।

बाउंड्री वॉल से रास्ता निकालने पर हमें कोई एतराज नहीं: एओसी-इन-सी

12 विंग एयरफोर्स स्टेशन के एओसी-इन-सी एयर कमाडोर एस श्रीनिवासन ने कहा कि अभी जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें चंडीगढ़ एंटर करते समय जो ओपन हेंड मॉन्युमेंट है, वहां से न्यू टर्मिनल के लिए रास्ता बनाने की बात कही गई है। इसमें दिक्कत यह है कि अगर यहां से रास्ता निकाला जाता है तो इसमें एयरफोर्स की बिल्डिंग बीच में आएगी। अगर टनल बनती है तो हमारा सरफेस कमजोर हो सकता है। जीरकपुर फ्लाईओवर क्रॉस करने के बाद जो गोडाउन बने हुए हैं, वहां से रास्ता निकालते हुए एयरपोर्ट के रनवे की बाउंड्री वॉल के पास से नए टर्मिनल तक पहुंचा जा सकता है। इसमें हमें एतराज नहीं है।

12 विंग एयरफोर्स स्टेशन के एओसी-इन-सी एयर कमाडोर एस श्रीनिवासन ने कहा कि अभी जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें चंडीगढ़ एंटर करते समय जो ओपन हेंड मॉन्युमेंट है, वहां से न्यू टर्मिनल के लिए रास्ता बनाने की बात कही गई है। इसमें दिक्कत यह है कि अगर यहां से रास्ता निकाला जाता है तो इसमें एयरफोर्स की बिल्डिंग बीच में आएगी। अगर टनल बनती है तो हमारा सरफेस कमजोर हो सकता है। जीरकपुर फ्लाईओवर क्रॉस करने के बाद जो गोडाउन बने हुए हैं, वहां से रास्ता निकालते हुए एयरपोर्ट के रनवे की बाउंड्री वॉल के पास से नए टर्मिनल तक पहुंचा जा सकता है। इसमें हमें एतराज नहीं है।


काम पूरा होने में लगेंगे 4 साल

दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रोजेक्ट के तहत 6.41 किलोमीटर का रास्ता तैयार करने में करीब चार साल का वक्त लगेगा। इसे बनाने में 1217 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।


-वीपी सिंह बदनोर, गवर्नर पंजाब, प्रशासक यूटी चंडीगढ़

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