Hindi News »Union Territory »Chandigarh »News» गवर्नमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी सेक्टर-33 की पहल...

गवर्नमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी सेक्टर-33 की पहल...

गर्मियों की छुट्टियां और बच्चों के हाथ में मोबाइल। इससे सभी पेरेंट्स परेशान हैं। कई बार कहने के बाद भी बच्चे मानते...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 04:10 AM IST

  • गवर्नमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी सेक्टर-33 की पहल...
    +1और स्लाइड देखें
    गर्मियों की छुट्टियां और बच्चों के हाथ में मोबाइल। इससे सभी पेरेंट्स परेशान हैं। कई बार कहने के बाद भी बच्चे मानते नहीं। लेकिन गवर्नमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी सेक्टर-33 ने इसका हल निकालने के लिए एक कदम उठाया है। सोसायटी के मेंबर कमलप्रीत सिंह ने स्पोर्ट्स कार्निवल कराने का फैसला किया। इसे शुरू करने से पहले उन्होंने बच्चों से सलाह ली और फिर सभी पेरेंट्स से। सभी ने कहा कि बच्चे ग्राउंड में आएंगे तो उनका मोबाइल से ध्यान हटेगा। रविवार को सभी के लिए मुकाबले आयोजित किए। प्लानिंग थी कि कम से कम 20 बच्चे तो इसमें शामिल होने चाहिए, लेकिन यह आइडिया इतना हिट हुआ कि सोसायटी के 55 बच्चों ने स्पोर्ट्स कार्निवल में शामिल होने के लिए नाम दे दिए। बॉयज के लिए क्रिकेट टूर्नामेंट हुआ, जबकि गर्ल्स के लिए बैडमिंटन के मुकाबले कराए गए। बच्चों के बाद लेडीज ने भी इसमें शामिल होने की इच्छा जाहिर की। उनके लिए फिर लेमन रेस और लूडो चैंपियनशिप का आयोजन किया गया।

    बच्चे मोबाइल से दूर रहें, दोस्त बनें, इसलिए शुरू किया ‘स्पोर्ट्स कार्निवल’

    बॉयज ने क्रिकेट टूर्नामेंट, गर्ल्स ने बैडमिंटन, लेडीज ने लेमन रेस और लूडो चैंपियनशिप में किया पार्टिसिपेट

    घर में हुई प्रॉब्लम के बाद की शुरुआत

    कमल ने कहा कि ऑफिस से आने के बाद अपने बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलते हुए देखता। सुबह जाते समय भी ऐसा ही होता था। बच्चों को खेलने के लिए कहा तो उन्होंने जवाब दिया कि कोई एकसाथ खेलने ही नहीं आता। इस बारे में सोचा और फिर ये कार्निवल कराने का आइडिया आया। हमें उम्मीद नहीं थी कि पहले ही इवेंट में 55 बच्चे शामिल होंगे। आैर भी बच्चों के नाम आ रहे थे लेकिन रजिस्ट्रेशन रोकनी पड़ीं। अागे भी एेसे ही स्पोर्ट्स कार्निवल होते रहेंगे, ताकि बच्चे ग्राउंड में आएं। फिट रहने के साथ-साथ सोशल भी हों।

    जो आपस में बात भी नहीं करते थे, अब वे एक ही टीम में...सोसायटी में बहुत से बच्चे ऐसे थे जो एक-दूसरे के साथ खेलना तो दूर बात भी नहीं करते थे। उनकी लड़ाई काे भी कार्निवल के जरिए खत्म करने का प्रयास किया गया। जिन बच्चों की आपस में नहीं बनती, उन्हें जानबूझकर एक ही टीम में शामिल किया गया। गेम खेलते हुए सभी एकसाथ मिलकर खेले और इससे सभी में यूनिटी भी आई। इस प्रकार सभी बच्चे एक-दूसरे के दोस्त बन गए। इससे सोसायटी में भी सभी लोग काफी खुश हैं।

    मोबाइल के ज्यादा यूज से बच्चे को ये नुकसान...

    10 परसेंट बच्चे खाना-पीना तक भूल जाते हैं और सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अपने गैजेट से चिपके रहते हैं।

    टेक्नोलॉजी के यूज से बच्चों की मूवमेंट्स कम हो जाती है। इससे शारीरिक विकास पिछड़ जाता है।

    सीखने की पावर कम हो जाती है।

    किसी भी काम में ध्यान नहीं लगता

    खाना ठीक से नहीं खाते

    आंखें खराब हाेती हैं

    बच्चे के मोटा होने का रिस्क 30 परसेंट तक बढ़ जाता है।

    आजकल बच्चों को अपने कमरे में टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने की खुली छूट मिली है। इस कारण वे कम नींद लेते हैं।

    श्रीलंका में गेम से क्राइम रेट कम किया था...

    श्रीलंका में क्रिकेट के जरिए क्राइम ग्राफ को कम किया गया था। पूर्व क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन की फाउंडेशन श्रीलंका में ‘मुरली कप’ का आयोजन करती है। ये बड़ा टूर्नामेंट है और इसे जाफना में कराया गया। जाफना श्रीलंका का सबसे ज्यादा क्राइम वाला इलाका था। यहां कई धर्म के लोग रहते हैं, इसलिए यहां क्राइम आम बात होती थी। मुरली कप का नियम है कि हर टीम में हर धर्म का प्लेयर होना जरूरी है। इससे वहां के यंगस्टर्स क्राइम की ओर नहीं गए और क्रिकेट के साथ जुड़ते गए। अब जाफना में क्राइम काफी कम हो गया है।

  • गवर्नमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी सेक्टर-33 की पहल...
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Chandigarh News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: गवर्नमेंट रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी सेक्टर-33 की पहल...
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×