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मनीमाजरा थाने का यह हाल- हाईकोर्ट ने क्वैश की 2014 में दर्ज हुई एफआईआर, पुलिस ने 2015 की बताकर आरोपियों को दी क्लीन चिट

मनीमाजरा पुलिस थाने की कारगुजारी का यह आलम है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एफआईआर नंबर 79 वर्ष 2014 को इसलिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 04:10 AM IST

मनीमाजरा पुलिस थाने की कारगुजारी का यह आलम है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एफआईआर नंबर 79 वर्ष 2014 को इसलिए क्वैश कर दिया कि इस मामले में दोनों पक्षों ने राजीनामा कर लिया है। पुलिस ने 2014 के मामले में इन क्वैशिंग ऑर्डर को लगाने के बजाय वर्ष 2015 में दर्ज हुई एफआईआर नंबर 79 में लगा दिया। वर्ष 2015 में विजय अरोड़ा नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज करवाई एफआईआर नंबर 79 में कार्रवाई करवाने के लिए कोर्ट और थाने के चक्कर काट रहा है।

एफआईआर की क्वैशिंग की कॉपी लगाई थी

एडवोकेट राजेश कुमार राय का कहना है कि दोनों आरोपी मोहम्मद शाहनवाज और प्रवीण ने शिकायतकर्ता विजय अरोड़ा को पैसे वापिस नहीं दिए। इनके खिलाफ एफआईआर नंबर 79 वर्ष 2015 दर्ज है। पुलिस ने इस मामले में वर्ष 2014 में 79 नंबर दर्ज हुई एफआईआर की क्वैशिंग की कॉपी लगा दी और आरोपियों को जमानत भी दिलवा दी। राय का कहना है कि शिकायतकर्ता विजय अरोड़ा ने मनीमाजरा थाने के अधिकारियों को भी बताया कि उसका कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं हुआ और न ही उसकी कोई एफआईआर क्वैश हुई है। लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। अब इस मामले को लेकर विजय अरोड़ा की ओर से न्यायालय में शिकायत दी गई है। जिसमें मनीमाजरा थाने के अधिकारियों की ओर से की गई गलती के बारे में अवगत करवाया गया। राय का कहना है कि इस मामले में जांच अधिकारी और थाने के एसएचओ ने कोई भी जानकारी नहीं जुटाई और न्यायालय को भी गलत जानकारी दे दी। अब इस बारे में मनीमाजरा थाने के अधिकािरयों के पास कोई जवाब नहीं है।

यह था मामला...विजय अरोड़ा के एडवोकेट राजेश कुमार राय ने बताया कि विजय अरोड़ा ने मोहम्मद शाहनवाज और उसकी मां प्रवीण से मोहल्ला वाल्मिकी में मकान खरीदने के लिए वर्ष 2013 में एग्रीमेंट किया था। मोहम्मद शाहनवाज और उसकी मां प्रवीण ने मकान नंबर 1027/1 को मोहल्ला वाल्मिकी को अपना बताया था और इसका 100 प्रतिशत हिस्सा अपना दिखाकर 22 लाख रुपए में बेचने का एग्रीमेंट किया और 4 लाख रुपए एडवांस के तौर पर लिए। यह भी तय हुआ कि विजय अरोड़ा 10 फरवरी 2014 को बाकी रकम अदा करके मोहम्मद शाहनवाज और प्रवीण से मकान की रजिस्ट्री अपने नाम करवा लेगा, लेकिन दोनों ने विजय अरोड़ा के नाम मकान की रजिस्ट्री नहीं करवाई और एडवांस में दिए चार लाख रुपए के बदले डबल अमाउंट देने के लिए राजी हो गए और विजय अरोड़ा को दोनों ने 8 लाख रुपए का चेक जारी कर दिया। यह चेक बाउंस हो गया, लिहाजा विजय अरोड़ा ने इनके खिलाफ मनीमाजरा थाने में एफआईआर अंडर सेक्शन 406, 420 आईपीसी के तहत एफआईआर नंबर 79 वर्ष 2015 में दर्ज हुई थी।

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Web Title: मनीमाजरा थाने का यह हाल- हाईकोर्ट ने क्वैश की 2014 में दर्ज हुई एफआईआर, पुलिस ने 2015 की बताकर आरोपियों को दी क्लीन चिट
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