चरनियां गांव के पास माइनिंग, नदी को 100 फुट तक खोद डाला

Panchkula Bhaskar News - रवीश कुमार/बलविंदर | पंचकूला डीसी ऑफिस से 22 किमी. दूर और कालका एसडीएम ऑफिस से 9 किमी. दूर चरनियां गांव के पास अवैध...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:30 AM IST
Kalka News - mineing near charniya village the river has dug up to 100 feet
रवीश कुमार/बलविंदर | पंचकूला

डीसी ऑफिस से 22 किमी. दूर और कालका एसडीएम ऑफिस से 9 किमी. दूर चरनियां गांव के पास अवैध माइनिंग हो रही है। चरनियां गांव के पास पड़ने वाली नदी में माइनिंग माफिया ने 100 फुट गहरा गड्ढा बना दिया है। इसकी जानकारी प्रशासन, पुलिस और माइनिंग विभाग के अफसरों को होने के बावजूद अभी तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।

गांव के लोगों ने बताया कि पॉलीटिकल शह मिलने पर ही शाम 4 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक पोकलेन, जेसीबी, टिपर और ट्रालों की मदद से यहां अवैध माइनिंग की जाती है। वीरवार को चरनियां गाव की नदी में माइनिंग माफिया बेखौफ माइनिंग कर रहा था। 2 पोकलेन की मदद से माइनिंग हो रही थी। एक पोकलेन से नदी में खुदाई कर पत्थरों को इकट्ठा किया जा रहा था और दूसरी पोकलेन से पत्थरों को टिपर में डाला जा रहा था। मौके पर भास्कर की टीम को देखते ही पोकलेन और टिपर पर बैठे लड़कों ने पहले तो फोटोग्राफी रोकने के लिए पत्थर फेंके। गांव वालों ने बताया पिछले काफी समय से रात-दिन नदी में माइनिंग होती है। नदी के दोनों ओर भी माइनिंग की जा रही है। जगह-जगह सैकड़ों बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जो 10 फुट से लेकर 50 फुट तक के हैंं। नदी पर जिस जगह माइनिंग का खेल चल रहा है वहां जाने के 2 रास्ते हैं। एक रास्ता पिंजौर-नालागढ़ रोड से होकर जाता है और दूसरा गांव से होते हुए जाता है। हैरानी की बात यह है कि दोनों रास्तों के शुरुआत में माफिया ने बड़े-बड़े पत्थर गिराए हुए हैं ताकि माइनिंग की साइट पर कोई आसानी से न पहुंच पाए। साथ ही पत्थर की जगह से कुछ दूरी पर एक व्यक्ति को बिठाया जाता है जो किसी भी सरकारी टीम के पहुंचते ही तुरंत उसकी जानकारी माफिया को दे देता है।

14 जून तक मांगी है रिपोर्ट: डीसी ने जिले में होने वाली अवैध माइनिंग को रोकने के लिए बनाई गई जिला टास्क फोर्स कमेटी से 14 जून तक माइनिंग रोकने के लिए क्या-क्या कार्रवाई की जा चुकी है उसकी पूरी रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में देखना यह है कि कमेटी के सदस्य जिन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को बनाया गया है वह क्या रिपोर्ट पेश करते हैं। दरअसल डीसी ने कमेटी की रिपोर्ट सीएम को भेजनी है और उसके बाद सीएम की ओर से कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

शाम 4 से सुबह 4 बजे तक होता है काम

नदी पर हो रही माइनिंग के लिए टिपर, पोकलेन, जेसीबी और ट्रालों का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी संख्या 100 के करीब है। पिंजौर-नालागढ़ रोड से चरनियां की ओर मुड़ने पर करीब एक किमी. तक अंदर जाने वाली सड़क के दोनों ओर टिपर, पोकलेन, जेसीबी और ट्राले दिखाई देंगे। शाम 4 बजते ही ये सभी व्हीकल माइनिंग साइट की ओर से निकल पड़ते हैं और सुबह 4 बजे तक धड़ल्ले से माइनिंग होती है।

माइनिंग साइट्स पर नहीं जाती टीम, तभी बेखौफ चल रहा खेल...

जिला प्रशासन की ओर से अवैध माइनिंग रोकने के लिए पंचकूला और कालका सबडिवीजन में अलग-अलग से स्थानीय एसडीएम की अध्यक्षता में एक टीम बनवाई गई। जिसे माइनिंग साइट्स को चेक करने और कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। पंचकूला की टीम ने कुछ जगह पर विजिट कर कार्रवाई की है। हैरानी की बात यह है कि कालका की टीम ने अभी तक कोई विजिट नहीं की। चरनियां में भी टीम ने कभी भी विजिट नहीं की। जिसकी वजह से माइनिंग माफिया बेखौफ माइनिंग कर रहा है।

रवीश कुमार/बलविंदर | पंचकूला

डीसी ऑफिस से 22 किमी. दूर और कालका एसडीएम ऑफिस से 9 किमी. दूर चरनियां गांव के पास अवैध माइनिंग हो रही है। चरनियां गांव के पास पड़ने वाली नदी में माइनिंग माफिया ने 100 फुट गहरा गड्ढा बना दिया है। इसकी जानकारी प्रशासन, पुलिस और माइनिंग विभाग के अफसरों को होने के बावजूद अभी तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।

गांव के लोगों ने बताया कि पॉलीटिकल शह मिलने पर ही शाम 4 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक पोकलेन, जेसीबी, टिपर और ट्रालों की मदद से यहां अवैध माइनिंग की जाती है। वीरवार को चरनियां गाव की नदी में माइनिंग माफिया बेखौफ माइनिंग कर रहा था। 2 पोकलेन की मदद से माइनिंग हो रही थी। एक पोकलेन से नदी में खुदाई कर पत्थरों को इकट्ठा किया जा रहा था और दूसरी पोकलेन से पत्थरों को टिपर में डाला जा रहा था। मौके पर भास्कर की टीम को देखते ही पोकलेन और टिपर पर बैठे लड़कों ने पहले तो फोटोग्राफी रोकने के लिए पत्थर फेंके। गांव वालों ने बताया पिछले काफी समय से रात-दिन नदी में माइनिंग होती है। नदी के दोनों ओर भी माइनिंग की जा रही है। जगह-जगह सैकड़ों बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जो 10 फुट से लेकर 50 फुट तक के हैंं। नदी पर जिस जगह माइनिंग का खेल चल रहा है वहां जाने के 2 रास्ते हैं। एक रास्ता पिंजौर-नालागढ़ रोड से होकर जाता है और दूसरा गांव से होते हुए जाता है। हैरानी की बात यह है कि दोनों रास्तों के शुरुआत में माफिया ने बड़े-बड़े पत्थर गिराए हुए हैं ताकि माइनिंग की साइट पर कोई आसानी से न पहुंच पाए। साथ ही पत्थर की जगह से कुछ दूरी पर एक व्यक्ति को बिठाया जाता है जो किसी भी सरकारी टीम के पहुंचते ही तुरंत उसकी जानकारी माफिया को दे देता है।

14 जून तक मांगी है रिपोर्ट: डीसी ने जिले में होने वाली अवैध माइनिंग को रोकने के लिए बनाई गई जिला टास्क फोर्स कमेटी से 14 जून तक माइनिंग रोकने के लिए क्या-क्या कार्रवाई की जा चुकी है उसकी पूरी रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में देखना यह है कि कमेटी के सदस्य जिन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को बनाया गया है वह क्या रिपोर्ट पेश करते हैं। दरअसल डीसी ने कमेटी की रिपोर्ट सीएम को भेजनी है और उसके बाद सीएम की ओर से कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

लोगों ने डीसी से की मामले की शिकायत

वीरवार को कालका के कुछ लोग डीसी से मिले और उन्होंने डीसी से कालका एरिया में अवैध माइनिंग होने की शिकायत की। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक शह मिलने की वजह से ही माइनिंग माफिया बेखौफ होकर माइनिंग के खेल को अंजाम दे रहा है। जिसके बाद डीसी ने कुछ प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की ड्यूटी लगाई कि वह चेकिंग कर मौके की पूरी रिपोर्ट दें।

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