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एसआईटी का हिस्सा बनने से कतरा रहे थे अफसर

श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले में राज्य सरकार ने चाहे एसआईटी का गठन कर दिया है, लेकिन इसके लिए सरकार को...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 03:11 AM IST
श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले में राज्य सरकार ने चाहे एसआईटी का गठन कर दिया है, लेकिन इसके लिए सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ी है। कोई भी अफसर पहले इस एसआईटी का नेतृत्व करने को तैयार नहीं था, क्योंकि इसमें पूर्व मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल और डीजीपी सुमेध सिंह सैनी का नाम आ रहा है। इससे पहले भी पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बादल परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसआईटी का गठन किया गया था।

उस मामले में गवाहों के मुकरने के बाद बादल परिवार तो बरी हो गया था, लेकिन बाद में अकाली-भाजपा सरकार बनने के बाद एसआईटी में शामिल अफसरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उनमें से किसी के खुड्डे लाइन लगा दिया गया तो किसी को अन्य कारणों से परेशानी उठानी पड़ी थी। इसी को देखते हुए अब बेअदबी मामले में गठित एसआईटी का हिस्सा बनने को कोई अफसर तैयार नहीं हो रहा था। काफी सोच विचार के बाद प्रमोद कुमार को एसआईटी के प्रमुंख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जानकारी के अनुसार एडीजीपी लेवल के कई अफसरों को यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए पूछा गया, लेकिन उन्होंने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। अब बनी टीम में ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन प्रमुख प्रमोद कुमार काे एसआईटी का मुखी जबकि आईजी अरुणपाल सिंह, आईजी कुंवर प्रताप सिंह, कपूरथला के एसएसपी सतिंदर सिंह और जहानखेला के एसपी भूपेंद्र सिंह शामिल हैं।

बेअदबी जांच : पहले भी बादलों के खिलाफ दर्ज केस की जांच का खामियाजा भुगत चुके हैं अफसर