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कनाड़ा में सत्ता परिवर्तन... 15 साल से सत्ता पर काबिज लिबरल 7 सीटों पर सिमटी, पहली बार 7 पंजाबी जीते

ये सभी पंजाबी आबादी वाले ब्रैम्पटन और मिसीसागा क्षेत्र से जीते हैं। ब्रैम्पटन की पांच सीट्स में 4 पंजाबियों ने जीतीं

गुलशन कुमार | Last Modified - Jun 09, 2018, 08:18 AM IST

  • कनाड़ा में सत्ता परिवर्तन... 15 साल से सत्ता पर काबिज लिबरल 7 सीटों पर सिमटी, पहली बार 7 पंजाबी जीते
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    गुररतन सिंह।

    चंडीगढ़.कैनेडा के ओंटारियो में हुए चुनाव में जनता ने 15 साल से सत्ता पर काबिज लिबरल पार्टी का सफाया कर दिया। वह मात्र सात सीटें ही जीत सकी। वहीं इन चुनावों में पहली बार 7 पंजाबी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। ये सभी पंजाबी आबादी वाले ब्रैम्पटन और मिसीसागा क्षेत्र से जीते हैं। ब्रैम्पटन की पांच सीटों में से 4 पंजाबियों ने जीती हैं। ये सभी एनडीपी और प्रोग्रेसिव कंजर्वेटिव पार्टी से हैं। इस बार प्रोग्रेसिव कंजर्वेटिव पार्टी 76 सीटें जीतकर सरकार बनाने में सफल रही है। डग फोर्ड राज्य के नए प्रीिमयर होंगे। वहीं नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रेसिडेंट जगमीत के भाई गुररतन सिंह भी ब्रैम्पटन ईस्ट से चुनाव जीत गए हैं। एनडीपी 40 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी है।

    पीसी पार्टी और एनडीपी के बीच कड़ा रहा मुकाबला

    - पीसी पार्टी व एनडीपी में मुकाबला कितना सख्त था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एनडीपी की सारा सिंह ने पीसी पार्टी के हरजीत सिंह को मात्र 49 वोटों से हराया। पंजाबी मूल के दीपक आनंद मोहाली से हैं।
    - एनडीपी से जीतने वाले पंजाबी गुररतन सिंह, ब्रैम्पटन ईस्ट और सारा सिंह, ब्रैम्पटन सेंटर हैं।
    - प्रोग्रेसिव कंजर्वेटिव पार्टी की तरफ से प्रभमीत सरकारिया ब्रैम्पटन साउथ, अमरजोत संधू ब्रैम्पटन वेस्ट, परम गिल माल्टन से, नीना तांगड़ी मिसीसागा स्ट्रीट्सविले और दीपक आनंद, मिसीसागा माल्टन से हैं।

    कई पुराने पंजाबी एमपीपी हारे

    - लिबरल पार्टी से कई बार एमपीपी रहे विक ढिल्लों, अमृत मांगट जैसे पुराने एमपीपी इस बार पीसी और एनडीपी की आंधी में बुरी तरह से हार गए। वहीं 84 के दंगों को एसेंबली में नरसंहार घोषित करवाने वाली हरिंदर मल्ही भी चुनाव हार गई।

    - सबसे वरिष्ठ पंजाबी एमपीपी हरिंदर तक्खड़ इस बार खुद ही चुनाव में नहीं उतरे। इंडो कैनेडियन मूल की दीपिका दमरेला भी इस बार चुनाव हार गई।

    जालंधर की बेटी भी जीती

    - जालंधर की 52 साल की नीना ने 8486 वोट से जीत दर्ज की। उन्हें 20879 वोट मिले। नीना बिलगा के तांगड़ी परिवार की बेटी हैं।

    - वह 24 साल से इसी इलाके में रह रही। नीना ने विरोधी बॉब डेलने से तीन बार चुनाव हारने के बाद चौथी बार 8486 वोटों से उनको हराकर मिसिसॉगा स्ट्रीट्सविले से प्रोग्रेसिव कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता और एमपीपी (मेंबर ऑफ प्रोविजनल पार्लियामेंट) बनी।

    - 1965 में यूके में जन्मी नीना ने म्यूजिक, मैथमेटिक्स और लॉ की पढ़ाई की और 1984 में कनाडा आ गई। उनके पति बिलगा के शीला रानी तांगड़ी पब्लिक स्कूल के चेयरमैन अश्वनी तांगड़ी है। उनके 3 बेटे हैं।

    - वह कैनेडा की प्रोग्रेसिव कंजर्वेटिव पार्टी की सीनियर मेंबर है। तांगड़ी इंशोरेंस एंड फाइनेंशियल की सीईओ नीना ने 2011 में भारत में कैंसर स्क्रीनिंग कैंप लगा चुकी है। इंडो कनाडियन काउंसिल जैसे कई एनजीओ के साथ जुड़ी हुई है।

    - उल्लेखनीय है कि उनकी पार्टी ने 124 सीटों में से 76 सीटों पर जीत प्राप्त की। उनकी जीत से बिलगा में खुशी की लहर है। डीएवी स्कूल बिलगा के प्रिंसिपल रवि शर्मा ने कहा कि उनका चुनाव जीतना हमारे लिए गर्व की बात है।

    - बता दें कि गुररतन सिंह एनडीपी के प्राइम मिनिस्ट्रियल कैंडिडेट जगमीत सिंह के भाई हैं। इनके अलावा ब्रेंपटन साऊथ से प्रभमीत सरकारिया, ब्रेंपटन वेस्ट से अमरजोत संधू, मिलटन से परम गिल, मिसिसॉगा स्ट्रीट्सविले से नीना तांगड़ी और मिसिसॉगा मॉलटन से दीपक आनंद (सभी पीसी पार्टी से) ने जीत दर्ज की है। इस बार पीसी पार्टी व एनडीपी में मुकाबला कितना सख्त था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एनडीपी की सारा सिंह ने पीसी पार्टी के हरजीत सिंह को मात्र 49 वोटों से हराया।

    - पंजाबी मूल के दीपक आनंद के मोहाली स्थित घर में उनके पिता सरदारी लाल आनंद व अन्य परिजनों से ढोल की थाप पर नाचकर जीत की खुशी मनाई है। गौरतलब है कि कुल 124 विधानसभा क्षेत्र वाले ओंटारियो में हुए इन चुनावों में पीसी पार्टी को 76 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि 40 सीटों के साथ एनडीपी इस बार ऑफिशियल अॉपोजिशन का रोल निभाएगी।

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    जालंधर की 52 साल की नीना ने 8486 वोट से जीत दर्ज की।
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