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पंचकूला हिंसा: 6 आरोपी बरी, पुलिस सबूत पेश नहीं कर पाई और गवाहों ने पहचाना नहीं

25 अगस्त 2017 को हुए दंगों में मीडियाकर्मी के कैमरे तोड़ने के मामले में पुलिस ने 10 गवाह पेश किए, किसी ने भी नहीं पहचाना

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 07:37 AM IST
25 अगस्त 2017 को हुए दंगों में मीडियाकर्मी के कैमरे तोड़ने के मामले में पुलिस ने 10 गवाह पेश किए, किसी ने भी नहीं पहचाना आरोपियों को। - फाइल 25 अगस्त 2017 को हुए दंगों में मीडियाकर्मी के कैमरे तोड़ने के मामले में पुलिस ने 10 गवाह पेश किए, किसी ने भी नहीं पहचाना आरोपियों को। - फाइल

पंचकूला. साध्वी यौन शोषण मामले में डेरामुखी गुरमीत सिंह को 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया था। फैसले से नाराज डेरा समर्थकों ने पंचकूला में कई जगहों पर तोड़फोड़, पथराव और गाड़ियों में आग लगा दी थी। इस पूरे मामले की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों के कैमरों को भी तोड़ दिया गया था। अब इस मामले में पंचकूला की कोर्ट ने सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। पुलिस कोर्ट में सबूत पेश नहीं कर पाई कि यह आरोपी तोड़फोड़ कर रहे थे। वहीं, इस मामले में 10 गवाहों ने आरोपियों को पहचाना नहीं। इन्हीं कारणों से आरोपी बरी हो गए।

- दरअसल, पंचकूला पुलिस की ओर से दंगों के दौरान कई मामले दर्ज किए गए थे। इसी दौरान एफआईआर नंबर 415 को दर्ज किया गया, जिसमें शिकायत थी कि मीडियाकर्मी के कैमरे को तोड़ा गया। इसके तहत पंचकूला पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान होशियार सिंह, रवि कुमार, ज्ञानीराम, सांगाराम, रामकिशन, तरसेम को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में ट्रायल चला और अब कोर्ट ने बरी कर दिया।

पुलिस की इन्वेस्टिगेशन पर सवाल-आखिर क्यों नहीं सबूत पेश कर पाई?

- सबसे पहले तो पंचकूला पुलिस पर सवाल खड़ा हो गया है। कोर्ट में पुलिस इन आरोपियों के खिलाफ सबूत ही पेश नहीं कर पाई। जिन लोगों को बरी किया गया दंगे के दौरान उनकी मौजूदगी को साबित नहीं की जा सकी। पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि शिकायतकर्ता ने इन्हें देखा था या नहीं, उनको पहचाना ही नहीं गया। इसके अलावा इन्हीं लोगों ने तोड़फोड़ की थी इसके बारे में सबूत नहीं दे पाई। पुलिस के पास मौके का गवाह नहीं था। पुलिस की ओर से इस केस में सही तरीके से इन्वेस्टिगेशन को ही नहीं करवाया गया था, जिसके कारण ऐसा हुआ है।

दंगे और देशद्रोह के केस अभी बाकी हैं...
- पंचकूला में हुए 25 अगस्त के दंगों को लेकर यह पहला मामला है जब पंचकूला कोर्ट ने एक साथ 6 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट की ओर से बाकी केसों की सुनवाई की जा रही है। इनमें देशद्रोह सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हंै। ऐसे में पंचकूला पुलिस पर सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर पुलिस इन्वेस्टिगेशन में लापरवाही क्यों बरत रही है या जानबूझकर सही तरीके से जांच नहीं की जा रही।

एसआईटी कर रही है जांच...
- डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत को जब 25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट से दोषी करार दिया गया था।
- गुरमीत को दोषी करार दिए जाने के बाद भड़के थे दंगे। दंगों में दर्ज एफआईआर नंबर 415 के सभी 6 आरोपियों को किया सेशन कोर्ट ने बरी।
- पुलिस ने 200 के करीब मामलों को दर्ज किया था, जिसमें से कई एसआईटी को जांच के लिए दी गई थी।
वकील बोला-पुलिस ने नहीं की सही से कार्रवाई
- इस बारे में पंचकूला कोर्ट के वकील आरएस चौहान ने बताया कि पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कोर्ट में सबूत पेश नहीं कर पाई। पुलिस साबित नहीं कर पाई कि वे लोग इस अपराध में शामिल थे, जिसके चलते कोर्ट ने उनको बरी कर दिया।
पुलिस की इन्वेस्टिगेशन पर सवाल-आखिर क्यों नहीं सबूत पेश कर पाई? पुलिस की इन्वेस्टिगेशन पर सवाल-आखिर क्यों नहीं सबूत पेश कर पाई?
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25 अगस्त 2017 को हुए दंगों में मीडियाकर्मी के कैमरे तोड़ने के मामले में पुलिस ने 10 गवाह पेश किए, किसी ने भी नहीं पहचाना आरोपियों को। - फाइल25 अगस्त 2017 को हुए दंगों में मीडियाकर्मी के कैमरे तोड़ने के मामले में पुलिस ने 10 गवाह पेश किए, किसी ने भी नहीं पहचाना आरोपियों को। - फाइल
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