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चंडीगढ़ बनाने में पियरे जेनरे, मैक्सवेल फ्राई, जेन ड्रयू का भी अहम रोल रहा

कई लोग नंबर-13 को अनलकी मानते हैं। खासकर पश्चिमी देशों में 13 तारीक को कोई भी बड़ा काम भी नहीं किया जाता। कई होटलों में...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:05 AM IST
कई लोग नंबर-13 को अनलकी मानते हैं। खासकर पश्चिमी देशों में 13 तारीक को कोई भी बड़ा काम भी नहीं किया जाता। कई होटलों में तेरहवीं मंजिल या 13 नंबर का कमरा भी नहीं होता। अब सवाल उठता है कि क्या इसी अंधविश्वास के चलते ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ के नक्शे में सेक्टर-13 को जगह नहीं दी? इसके जवाब को डिस्कवर किया गया आर्कि-चैट मीट में, जिसका आयोजन ली कार्बूजिए सेंटर सेक्टर-19 में हुआ। साथ ही इस बात पर भी चर्चा हुई कि क्या चंडीगढ़ को बनाने का श्रेय सिर्फ ली कार्बूजिए को दिया जाना चाहिए। ट्राईसिटी के आर्किटेक्ट, आर्किटेक्चर स्टूडेंट्स और टीचर्स इस चर्चा का हिस्सा बने।

मीट की शुरुआत ली कार्बूजिए सेंटर की डायरेक्टर दीपिका गांधी की प्रेजेंटेशन से हुई। 1951 में कार्बूजिए के बनाए स्कैच दिखाते हुए उन्होंने बताया- शहर के ओरिजनल प्लान में सेक्टर-13 का प्रावधान रखा गया था। पर जब पंजाब यूनिवर्सिटी और सेक्टर-12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग काॅलेज बनने शुरू हुए तो कार्बूजिए और उनकी टीम को जगह की कमी का एहसास हुआ। जैसे-जैसे सेक्टर-14 का विस्तार हुआ, सेक्टर-13 उसी में मर्ज कर दिया गया। इससे यही साबित होता है कि यह किसी अंधविश्वास की वजह से नहीं, जगह की उपलब्धता और प्लानिंग के तहत किया गया।

इसके बाद चंडीगढ़ बनाने का सारा श्रेय कार्बूजिए को दिए जाने पर सवाल उठा। इस पर चर्चा हुई और बताया गया कि चंडीगढ़ बनने से पहले यूरोप के कई आर्किटेक्ट ऐसे शहरों का डिजाइन तैयार कर चुके थे, जिनमें चंडीगढ़ की तरह ही सेक्टर, ग्रीन एरिया, खुली सड़कों के साथ-साथ ड्रेनेज और सर्कुलेशन का प्रॉपर सिस्टम था। कार्बूजिए ने उसी आइडियोलॉजी को चंडीगढ़ की डिजाइनिंग में अप्लाई किया। बेशक कार्बुजिए ने शहर के लिए मास्टर प्लान, कैपिटल कॉॅम्प्लेक्स और आर्ट म्यूजियम डिजाइन किए, पर जितने भी घर या शॉपिंग कॉॅम्प्लेक्स हम शहर में देखते हैं, उन्हें बनाने में पियरे जेनरे, मैक्सवेल फ्राई, जेन ड्रयू के साथ-साथ पीबी माथुर जैसे अन्य कई भारतीय आर्किटैक्चर्स का भी अहम योगदान है। बहुत काम लोग जानते हैं कि शहर का स्ट्रक्चरल डिजाइन भारतीय आर्किटेक्ट आत्माराम ने तैयार किया और पीयू को भी भारतीय आर्किटेक्ट जेके चौधरी ने डिजाइन किया था। पर इन सभी को आजतक वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे हकदार हैं। इसका एक कारण यह भी है कि कार्बूजिए ने हमेशा अपने बनाए स्कैच और डिजाइंस को संभलकर रखा। दूसरी ओर जेनरे इस मामले में बहुत लापरवाह थे। कार्बूजिए ने अपने काम के बारे में कई किताबें भी लिखी।

वॉकिंग भी प्रमोट करनी चाहिए

इसके बाद बात हुई पैदल चलने वालों की सहूलियत और कनेक्टिविटी पर। पीटीयू में आर्किटेक्चर पढ़ा रहे केरल के संगीथ ने कहा- पैदल चलने को मजेदार बनाया जाना चाहिए। मैं चार महीने पहले ही चंडीगढ़ आया हूं। यहां का हर सेक्टर एक जैसा लगता है। हमारा दिमाग हमेशा वैरायटी खोजता है, ताकि हम बोर न हों। अगर हर रास्ते पर कुछ इंट्रेस्टिंग मिले तो पैदल चलने वालों को हर रोज कुछ अलग मिलेगा और वॉकिंग भी प्रमोट होगी।