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ड्रग्स और जाली करंसी पकड़ने के मामले में एसआई ने कहा- दिलशेर चंदेल के बयान लिए ही नहीं, मेरे नाम से फर्जी केस डायरी लिखी गई

- सब इंस्पेक्टर धर्म सिंह ने एसएसपी को दी शिकायत, कोर्ट ने भी सारा रिकाॅर्ड मांगा

Danik Bhaskar | Jun 13, 2018, 04:03 AM IST
इंस्पेक्टर रामरत्न व इंस्पेक इंस्पेक्टर रामरत्न व इंस्पेक

- यह फर्जीवाड़ा किसने और क्यों किया, इसकी जांच की जाए: धर्म सिंह

चंडीगढ़. ड्रग्स और जाली करंसी में वाहवाही हासिल करने वाले इंस्पेक्टर रामरत्न अब फंसते ही जा रहे हैं। पहले जहां इंस्पेक्टर दिलशेर चंदेल ने उनके खिलाफ जाली कागजात बनाने, झूठे बयान कोर्ट में पेश करने और जालसाजी का केस दर्ज करने की शिकायत पुलिस को दी थी। अब चंदेल के जो फर्जी बयान जिस एसआई धर्मसिंह के साइन से लिखे हुए बताकर कोर्ट में लगाए गए हैं, वे एसआई भी अब पुलिस के चालान के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

- मंगलवार को उन्होंने एसएसपी को लिखित में शिकायत दी। कहा कि उन्होंने नारकोटिक्स के किसी केस में इंस्पेक्टर चंदेल के सीआरपीसी की धारा 161 के बयान लिए ही नहीं। वे इस केस की जांच में थे ही नहीं। कोर्ट में जो चंदेल के बयानों के नीचे उनका नाम लिखा गया है और साइन हैं, वे उनके हैं ही नहीं।

- उनके नाम से फर्जी केस डायरी लिखी गई है, जिसकी जांच की जाए। एसआई ने जो शिकायत दी है, वह भी पंजाबी में है। वे बयान पंजाबी में ही लिखते हैं, जबकि दिलशेर चंदेल के जो बयान कोर्ट में लगाए गए हैं, वे हिंदी में हैं।

- अब देखना है अपने ही इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर के साथ जालसाजी करने वाले आरोपियों पर अफसर क्या एक्शन लेंगे या मामले को निपटा देंगे।

चालान फाइल करने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर रामरत्न की

- इस केस में इंस्पेक्टर रामरत्न पहले शिकायतकर्ता रहे, फिर जांच अधिकारी बने। कोर्ट में चालान भी उनकी तरफ से ही फाइल किया गया। इसके अनुसार हर हाल में जो भी कागजात ज्यूडीशियल फाइल में लगाए गए हैं, उसकी पूरी जिम्मेदारी उनकी है।

- अब सवाल उठ रहे हैं कि कि दिलशेर चंदेल के कभी बयान ही नहीं हुए तो फिर बयान फाइल में लगाए कैसे गए और क्यों। जिस एसआई धर्म सिंह के नाम से बयान लिखे गए, उन्होंने भी कह दिया कि उनके साइन भी नकली हैं। तो फिर कोर्ट में फर्जी बयान क्यों लगवाए गए, किस साजिश के तहत और किसने लगाए, यह जांच में ही सामने आएगा।

9 जुलाई तक कोर्ट में रिकाॅर्ड पेश करना होगा...

- इस मामले में एक आरोपी के एडवोकेट हरीश भारद्वाज ने भी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एप्लीकेशन लगाई है कि फर्जी बयान लिखे गए हैं। इसलिए सारा रिकाॅर्ड तलब किया जाए। एडवोकेट भारद्वाज के मुताबिक कोर्ट ने सारा रिकाॅर्ड 9 जुलाई को पेश करने के आदेश जारी कर दिए हैं। अगर रिकाॅर्ड में टेंपरिंग निकली तो कोर्ट इस केस में सीधा एफआईआर दर्ज करवा सकती है।

इस केस से मेरा कोई लेना-देना ही नहीं

- आज चंडीगढ़ भास्कर में खबर पढ़ी तो पता चला कि मैंने इस केस में बयान लिखे हैं। यह सच ही नहीं है। मैंने कभी इंस्पेक्टर दिलशेर के बयान लिखे ही नहीं। मेरा नाम और मेरे साइन का गलत इस्तेमाल किया गया है। एसएसपी को शिकायत दी है। इस मामले की सही तरीके से जांच होनी चाहिए। -धर्म सिंह,एसआई

16 जून 2016 का मामला : बिजनेसमैन के अकाउंटेंट को जाली करंसी और अफीम के साथ पकड़ा था

- 16 जून 2016 को इंस्पेक्टर रामरतन ने तत्कालीन एसपी सिटी नवदीप बराड़ के पास आई एक गुप्त सूचना के आधार पर सेक्टर-38 वेस्ट के पास एक नीले रंग की कार पकड़ी। कार को चंडीगढ़ के बिजनेसमैन सुखबीर सिंह शेरगिल का अकाउंटेंट भगवान सिंह चला रहा था।

- कार में रखी फाइलों में पुलिस को 15 लाख की जाली करंसी और 2 किलो 600 ग्राम अफीम बरामद हुई। बाद में पुलिस ने कहा कि भगवान सिंह की कार में साजिशन यह ड्रग्स और जाली करंसी रखी गई। उसे फंसाने में यूटी पुलिस के तत्कालीन इंस्पेक्टर तरसेम सिंह राणा, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट जतिन सलवान और लुधियाना के बिजनेसमैन नरिंदर सिंह का रोल है।

- इन्होंने ही भगवान सिंह की कार में 15 लाख के नकली नोट और 2.600 किलो अफीम एक महिला के जरिए रखवाई। इसके बाद पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।