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पंजाब के एमएलए नहीं होंगे यूनिवर्सिटी सीनेट के मेंबर; पीयू की सीनेट में बदलाव के लिए बनी कमेटी ने रिपोर्ट सबमिट की

- कमेटी ने पंजाब के सीएम और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी एक्स ऑफिशियो की लिस्ट से निकाल दिया है

Bhaskar News | Last Modified - Jun 13, 2018, 03:47 AM IST

पंजाब के एमएलए नहीं होंगे यूनिवर्सिटी सीनेट के मेंबर; पीयू की सीनेट में बदलाव के लिए बनी कमेटी ने रिपोर्ट सबमिट की

चंडीगढ़.पीयू की सीनेट में बदलाव के लिए बनी कमेटी ने अपनी जो रिपोर्ट सबमिट की है उसमें एक्स ऑफिशियो मेंबर्स की संख्या कम करने और दो विधायकों को मेंबर्स ना बनाने की सिफारिश की गई है। जस्टिस बीबी प्रसून की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने पंजाब के सीएम और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी एक्स ऑफिशियो की लिस्ट से निकाल दिया है। पंजाब की एजुकेशन मिनिस्टर, चीफ कमिश्नर या एडवाइजर यूटी ही इसमें शामिल हैं। एक्ट के अनुसार इनकी अधिकतम संख्या 12 हो सकती है लेकिन अब कमेटी ने इसे चार तक सीमित करने को कहा है। सीएम, एजुकेशन मिनिस्टर, चीफ जस्टिस कभी मीटिंग में नहीं आते।

- एडवाइजर केके शर्मा के बाद अब तक कोई भी एडवाइजर सीनेट मीटिंग में नहीं आया। इसके लिए तीन कमेटियां बनाई गई थी लेकिन फिलहाल सिर्फ रेगुलेशन कमेटी ने ही अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसके जरिये उन्होंने रजिस्टर्ड ग्रेजुएट कॉन्स्टिट्यूएंसी को रजिस्टर्ड पोस्ट ग्रेजुएट कॉन्स्टिट्यूएंसी में बदलने की सिफारिश की है।

- इस पर डिस्कशन के लिए वाइस चांसलर प्रो. अरुण के ग्रोवर ने 23 जून को एक मीटिंग बुलाई है, जिसमें करीब 22 मेंबर्स पार्टिसिपेट करेंगे। कमेटी ने ऑर्डिनरी फैलोज की संख्या अधिकतम 85 की बजाय 42 करने को कहा है। सभी कॉन्स्टिट्यूएंसी से मेंबर्स की संख्या कम कर दी गई है।

- कमेटी का प्रपोजल है कि रजिस्टर्ड पोस्ट ग्रेजुएट फैलो की संख्या 6 होनी चाहिए, जिसमें कम से कम 2 महिलाएं हों। अभी तक महिलाओं के लिए कोई रिजर्वेशन नहीं है। फिरोजपुर, होशियारपुर, लुधियाना, मोगा और नवांशहर से 2 मेंबर्स चुने जाने चाहिए और एक यूटी से। बाकी मेंबर चुनने के लिए उन्होंने प्रस्ताव दिया है।

अब डीन बन सकेंगे सिर्फ टीचर्स: कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक
- अब डीन सिर्फ टीचर बन सकेंगे। उनके सेलेक्शन के लिए एक कमेटी होगी जो टीचर्स को बुलाकर इंटरेक्शन करेगी और डीन का डिसीजन करेगी।

2015 में आई थी चेंज की मांग:2015 में तत्कालीन पुटा प्रेसिडेंट प्रो. अक्षय कुमार ने प्रस्ताव दिया था कि सीनेट के मौजूदा स्ट्रक्चर में बदलाव करने की जरूरत है। हायर एजुकेशन की बदलती जरूरतों और नैक की शर्तों को देखते हुए इसमें बदलाव जरूरी है। इसके लिए वीसी ने जस्टिस बीबी प्रसून, प्रो. अक्षय कुमार, डीपीएस रंधावा, आईएस चड्ढा, प्रो. पैम राजपूत, प्रो. नवदीप गोयल और शैली वालिया आदि की एक कमेटी बनाई थी।

पास होने की संभावना कम:कमेटी की सिफारिशों को पहले सिंडिकेट और फिर सीनेट में रखा जाएगा। सीनेट के बाद इसको पास करके केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। इसके बाद एमएचआरडी इसको संसद में रखेगी क्योंकि यह एक्ट संसद से ही पास हुआ है।

- कमेटी की सिफारिशों के पास होने की संभावना कम है क्योंकि फिलहाल सीनेट में ज्यादा संख्या कॉलेजों से जुड़े मेंबर्स की है। विधायकों को हटाने की सिफारिश पर पंजाब सरकार भी आपत्ति कर सकती है। पीयू हमेशा से ही पंजाब में राजनीति का मुद्दा रही है।

- ये सिफारिश ठीक नहीं है। इसे स्वीकार करना संभव नहीं है। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदलना आसान नहीं है। यह पंजाब के लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ मामला है। यदि यूनिवर्सिटी को लगता है कि विधायक कंट्रीब्यूट नहीं कर रहे तो मैं इसके लिए विधानसभा को लिख सकते हैं। विधानसभा ऐसे मेंबर्स भेजेगी जो कंट्रीब्यूट करना चाहते हैं। - कुलजीत नागरा, विधायक, फतेहगढ़ साहिब, पंजाब

कमेटी का ये फैसला अजीब है
- शरीर का कोई एक अंग काम नहीं करता तो उसका इलाज करवाया जाता है, काटा नहीं जाता। कई विधायक मीटिंग में आते रहे हैं। ऐसा फैसला नहीं होना चाहिए जिससे सरकार और यूनिवर्सिटी में संबंध बिगड़े। -डीपीएस रंधावा, सीनेटर

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Web Title: pnjaab ke emele nahi hongae yunivrsiti sinet ke meinbr; piyu ki sinet mein badlav ke liye bani kmeti ne riport sabmit ki
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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