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एसआई ने चरस का रंग ब्लैक कहा, काॅन्स्टेबल ने ब्राउन, सीएफएसएल रिपोर्ट में निकला ग्रीन

पुलिस का झूठा केस... 45 ग्राम चरस पकड़ने के मामले में आरोपी बरी

Danik Bhaskar | Jun 13, 2018, 04:18 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

चंडीगढ़. नशे के केसों में किस तरह पुलिस लोगों को फंसाती है, इसका सबूत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में के एक फैसले से मिला। कोर्ट ने मनीमाजरा के विकास वालिया को 45 ग्राम चरस के केस में बरी करार दिया। गवाहियों के दौरान पुलिसकर्मियों के बयानों ने केस की पोल खोल दी। क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने चरस का रंग पूछा तो केस के आईओ और रिकवरी विटनेस ने अलग-अलग रंग बताए, जबकि सीएफएसएल रिपोर्ट में रंग कुछ और ही निकला। कोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान केस के फर्स्ट आईओ सब-इंस्पेक्टर बुध सिंह ने चरस का रंग ब्लैक बताया। वहीं, रिकवरी विटनेस काॅन्स्टेबल वरिंदर ने रंग ब्राउन बताया। जब कोर्ट में सेंट्रल फॉरेंसिंक साइंस लेबोरेट्री (सीएफएसएल) की रिपोर्ट पेश की गई तो उसमें चरस का रंग ग्रीन बताया गया।

आईओ को अपनी गाड़ी का नंबर ही नहीं पता

- केस के दूसरे आईओ राजबीर सिंह ने बताया कि वह मौके पर अपनी पर्सनल गाड़ी से गया था और वापसी में पुलिसकर्मियों और आरोपी को अपनी गाड़ी में लेकर थाने आया। जब राजबीर से नंबर पूछा गया तो वह अपनी ही गाड़ी का नंबर नहीं बता सका।

- वहीं, फर्स्ट आईओ ने स्टेटमेंट में बताया कि आईओ राजबीर मोटरसाइकिल से आया था। पुलिस ने केस बनाया था कि मुखबिरी के आधार पर पुलिस ने मनसा देवी रोड पर नाका लगाया। जहां पुलिस ने विकास को पकड़ा। उससे मिले लिफाफे से 45 ग्राम चरस मिली।

डार्क ग्रीन रंग होता है चरस का

- एडवोकेट अंकुर चौधरी ने बताया कि असल में चरस का रंग डार्क ग्रीन होता है। पुलिस ने विकास को फंसाने के लिए उस पर केस दर्ज किया था।