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स्टूडेंट्स ने अपनी सोच को दिखाते हुए बनाए आर्ट वर्क, किए डिस्प्ले

सिर्फ आर्ट वर्क बनाना ही काफी नहीं होता। इसको डिस्प्ले करना भी जरूरी है। ऐसा करने से ही दूसरों तक वह बात पहुंचती है,...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:05 AM IST
सिर्फ आर्ट वर्क बनाना ही काफी नहीं होता। इसको डिस्प्ले करना भी जरूरी है। ऐसा करने से ही दूसरों तक वह बात पहुंचती है, जो आर्टिस्ट अपने आर्ट वर्क के जरिए बताना चाहता है। साथ ही इससे पहचान भी बनती है। फिर चाहे यह आर्टिस्ट प्रोफेशनल हो या फिर स्टूडेंट्स। कुछ इसी मकसद से आर्ट वर्क बनाने के साथ डिस्प्ले करते हुए नजर आए सेक्टर-10 के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट के स्टूडेंट्स। कोई आर्ट वर्क कंपलीट कर उसे डिस्प्ले करने की तैयारी में था तो कई स्टूडेंट्स ऐसे भी थे जो वर्क को डिस्प्ले करके, दूसरे आर्ट को बनाने की तैयारी कर रहे थे। इन स्टूडेंट्स से बात की तो कहने लगे- जब तक डिस्प्ले नहीं करेंगे तब तक न हमें पहचान मिलेगी और न ही हमारी सोच के बारे में किसी को पता चलेगा। इसके अलावा हमें आगे बढ़ने की मोटिवेशन भी मिलेगी। साथ ही यह जान पाएंगे कि लोगों को हमारा आर्टवर्क कैसा लगा।

बुधवार को सेक्टर-10 के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट के स्टूडेंट्स ने आर्ट वर्क तैयार किए। इनके बारे में हमसे उनसे बात की।

खुद को डिपिक्ट किया

रिया अबरोल ने जो आर्ट वर्क बनाया है उसमें वह खुद को डिपिक्ट कर रही हैं। बताती हैं- इसमें मैंने दो चेहरे बनाए हैं। दोनों ही मेरे हैं। एक मेरा बाहरी चेहरा है और दूसरा अंदरूनी। जिस तरह से सबकी लाइफ में कई परेशानी, उलझने हैं, उसी तरह मेरी लाइफ में भी हैं। बस उसे अंदर ही रखती हूं। बाहर नहीं आने देती ताकि पढ़ाई में कोई फर्क न पड़े। वैसे भी जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इस वर्क को बनाने के लिए मैंने नॉवल के पेज लिए हैं, उन्हें साइड से जलाया भी है। इंक, पेस्टल कलर और रस्सी का भी इस्तेमाल किया है।

सबको मिले इंस्पिरेशन

सृष्टि ने इस आर्ट वर्क को चार लेयर में बनाया है। बताती हैं- पहली लेयर हैंडमेड शीट की है जिस पर कलरफुल इंक से डिजाइन बनाया। दूसरी शीट भी ऐसी ही है। तीसरी शीट ट्रेसिंग है। साइड‌्स को जलाया है और बीच में कम हीट देकर जलाया है। चौथी लेयर में साइकिल पर गैस सिलेंडर बेचते हुए, सड़क पर काम करता हुआ दर्जी, कबाड़ी वाले आदि को दिखाया है। दिल्ली से हूं इसलिए वहां जो देखा वही बनाया। इससे मुझे खुद को भी इंस्पिरेशन मिलती है कि किस तरह से यह लोग दिन- भर मेहनत करते हैं। यही इंस्पिरेशन दूसरों तक भी पहुंचाना चाहती हूं।

मदद के लिए आए आगे

मोनिका शर्मा ने इस आर्ट वर्क को चारकोल और कलर्ड पेंसिल से बनाया है। बताती हैं- गाय माता को हम पूजते हैं, उनको मानते हैं, लेकिन यही काफी नहीं। अगर रास्ते में या आस-पास गाय, भैंस या फिर किसी भी बेजुबान को चोट लगी हो, घायल हो तो उसकी मदद करनी चाहिए। फोन करके सोसायटी या वॉलेंटियर को बताना चाहिए। तभी बात बनेगी। मैंने देखा लोग अपनी बातों में ही रहते हैं, मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आते हैं। यही मैंने इस वर्क में दिखाया। बस वर्क के जरिए लोगों को अवेयर करना चाहती हूं।