जो बाहुबलि आपने देखी है,अब उससे पहले की कहानी बताऊंगा

Chandigarh News - हम उस तरह की मुहब्बत की पैदावार हैं जो कंस्ट्रक्टिव होती है। कुछ क्रिएट करती है। वरना मुहब्बत में खुद को तबाह तो...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:27 AM IST
Chandigarh News - the bahubali you have seen now i will tell you the story before that
हम उस तरह की मुहब्बत की पैदावार हैं जो कंस्ट्रक्टिव होती है। कुछ क्रिएट करती है। वरना मुहब्बत में खुद को तबाह तो देवदास ने भी किया था। वे बता रहे थे कि मुहब्बत दो तरह की होती है एक वो जिसमें इंसान खुद जलकर एक चिराग रोशन करता है और दूसरी वो जिसमें सबकुछ नष्ट करता चलता है। वे खुद को पहली वाली मुहब्बत की कैटेगरी में रखते हैं। ये थे बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर। प्रभा खेतान फाउंडेशन और अहसास वुमन ग्रुप के सौजन्य से चल रही कलम सीरीज में वे अपनी किताब- ‘मेरी फितरत है मस्ताना’ लेकर पहुंचे थे। उनके साथ बात कर रही थीं सरिता मलिक। ये किताब दरअसल, उनकी कविताओं और शायरी का संकलन है। जिनमें से कई को फिल्मों में इस्तेमाल भी किया गया है। इस किताब में मुहब्बत, रिश्ते, देश दुनिया सब को शामिल किया गया है। और यही इसकी खूबसूरती भी है। उन्होंने कुछ चीजें किताब से सुनाईं तो कुछ जबानी भी। तेरी गलियां, मेरे रश्के कमर, सोचता हूं कि वो (फिल्मी) मैं फिर भी तुमको चाहूंगा आदि गीतों से पॉपुलैरिटी बटोर चुके मनोज से ऑडियंस ने सवाल भी पूछे। मनोज, उत्तर प्रदेश के अमेठी से हैं और मंंुबई में अपनी जगह बनाने से पहले वे वहीं गौरीगंज में रहा करते थे। शायरी या कविता से उनका पहला एनकाउंटर क्या था? वे बोले- मैं सात साल का था। एक दिन पिताजी अपना पुराना संदूक खोलकर बैठे थे तो मैंने उसमें एक पुरानी किताब देखी जो दरअसल गालिब का दीवान था। मेरे खयाल से पहला परिचय वही था। बाद में विक्रम वेदा एक थ्रिलर है जिसे अभी खत्म किया है। साथ ही चाणक्य के डायलॉग्स पर भी काम रहा हूं। हमने पूछा कि चाणक्य को अब तक जिस तरह टीवी पर दिखाया गया है आप उससे अलग क्या दिखाने वाले हैं? अौर इसमें किस तरह के चैलेंज आ रहे हैं? वे बोले- कोई चैलेंज नहीं है। मैं जिन लोगों के लिए अब लिख रहा हूं उन्होंने वो पुराना चाणक्य नहीं देखा है। वो एक अमेजिंग सीरीज थी और मेरे लिए एक रेफरेंस पॉइंट है। मुझे उम्मीद है लोगों को मेरा लिखा पसंद आएगा।

हमारा इलेक्शन

ये गलत बात है कि हम प्रधानमंत्री चुनते हैं। ये प्रेसीडेंशियल इलेक्शन नहीं है। ये आपके इलाके रिप्रेजेंटेटिव के बारे में होना चाहिए। क्यों हर शहर में लोग प्रधानमंत्री के चुनाव को लेकर वोट करें।

नेशनलिज्म

130 करोड़ लोगाें में से कोई ऐसा भारतीय नहीं होगा जो अपने देश को, अपनी मिट्‌टी को प्यार नहीं करता होगा। इसलिए मैं ऐसी बहसों से बहुत परेशान हो जाता हूं। मेरे हिसाब से हर भारतीय नेशलिस्ट है।

बाहुबलि की कहानी

मैंने बाहुबलि वन और टू दोनों के लिए लिखा, लेकिन अब बाहुबलि पर एक सीरीज आएगी। क्या ये सीरीज बाहुबलि 3 हाेगी? वे बोले नहीं। अब तक बाहुबलि में जो भी देखा गया है वो उससे पहले की कहानी है। यानी जिस पर अभी तक बात नहीं हुई, वही अब आपके सामने आएगी। इसके अलावा कुछ और नई चीजें इस साल में सामने आने वाली हैं।

Interaction

प्रभा खेतान फाउंडेशन की कलम सीरीज के तहत बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार, राइटर मनोज मुंतशिर चंडीगढ़ पहुंचे। हमारी उनसे बात हुई फिल्म, करिअर, मुहब्बत, वेब सीरीज और दुनियादारी पर ...

इसलिए 1948 से अब तक डब फिल्में नहीं चलीं ...

इतने बरसों से साउथ की फिल्में इधर डब होकर आती रही हैं। लेकिन वे चलती नहीं थीं। हमने इस बात को ही तोड़ा है। हमने डायलॉग को डब करने के अलावा उसे कॉन्सेप्ट के तौर पर पूरी तरह से रीक्रिएट करने की सोची। सारे डायलॉग्स को सोचा गया, समझा गया और तब जाकर उसे लिखा गया। यही वजह है कि बाहुबलि वन और टू दोनों ने रिकॉर्ड बनाया पॉपुलैरिटी का।

चाय की दुकान से मिला मुंतशिर

मेरा नाम मनोज शुक्ला है। लेकिन जब लिखने लगा तो सोचा कि एक तखल्लुस भी होना चाहिए। अकेले नाम में वजन नहीं दिखता। यूं भी सभी शायरों के पेननेम होते हैं। लेकिन कुछ सूझ नहीं रहा था। कई नाम सोचे पर पसंद नहीं आए। फिर एक दिन मैं अपने कस्बे में यूं ही सड़क पर चला जा रहा था। कि एक चाय दुकान पर रुक गया। वहां रेडियो पर मुशायरा चल रहा था। मैं सुनने लगा। तभी एक शायर ने शेर कहा जिसमें मुंतशिर लफ्ज आया। ये मेरे दिमाग में बैठ गया और फिर मैंने इसे अपने नाम के साथ मिलाकर देखा, अच्छा लगा और बस तब से ये मनोज मुंतशिर हो गया।

X
Chandigarh News - the bahubali you have seen now i will tell you the story before that
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना