झूठा एफिडेविट देकर केस से बचने वाले आरोपी को पुलिस ने दी क्लीन चिट

Chandigarh News - लेक के पास गुरुद्वारा गुर सागर साहिब के पूर्व चेयरमैन बाबा प्रीतपाल सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ 2008 में धोखाधड़ी...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:25 AM IST
Chandigarh News - the clean chit given to the accused who escaped the case by giving false affidavit
लेक के पास गुरुद्वारा गुर सागर साहिब के पूर्व चेयरमैन बाबा प्रीतपाल सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ 2008 में धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ था। उन पर आरोप थे कि उन्होंने एक एनआरआई लेडी की जमीन धोखे से एक रियल इस्टेट कंपनी को 1.2 करोड़ रुपए में बेच दी। केस से बचने के लिए एक आरोपी जतिंदर पाल सिंह ने उसी लेडी का झूठा एफिडेविट देकर कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन लगा दी। आरोपी को कोर्ट से राहत तो नहीं मिली लेकिन कोर्ट ने झूठे एफिडेविट वाली बात की जांच के लिए इंक्वायरी के ऑर्डर दिए थे।

उस इंक्वायरी पर पुलिस ने जांच पूरी कर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में रिपोर्ट सब्मिट कर दी है। हैरानी की बात ये है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आरोपी जतिंदर पाल सिंह को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस की इस रिपोर्ट से न सिर्फ जतिंदर पाल को राहत मिलेगी बल्कि बाबा प्रीतपाल के पास भी केस से बचने का रास्ता मिल गया है। शिकायतकर्ता के वकील राजेश शर्मा ने पुलिस की इस इंक्वायरी रिपोर्ट के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन फाइल कर दी है। इसमें उन्होंने इस रिपोर्ट को स्वीकार न करने की मांग की है। इस पर अब 1 अगस्त को सुनवाई होगी। एडवोकेट राजेश शर्मा ने कहा कि पुलिस ने एफिडेविट को अटेस्ट और आइडेंटिफाई करने वालों के हेडराइटिंग सैंपल लिए बिना इंक्वायरी रिपोर्ट तैयार कर दी।


2016 में जतिंदर पाल सिंह ने कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन फाइल की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि एनआरआई लेडी का रियल इस्टेट कंपनी के साथ समझौता हो गया है और वे अब कोई केस नहीं चाहती हैं। ऐसे में उन्हें केस से हटाया जाए। लेकिन एनआरआई लेडी के अटॉर्नी सेक्टर-41 के सुदर्शन शुक्ला ने बताया कि उनका ऐसा कोई समझौता कंपनी के साथ नहीं हुआ। आरोपियों ने केस से बचने के लिए जाली डॉक्यूमेंट्स तैयार किए हैं, इसलिए उनके खिलाफ एक और केस बनता है। उन्होंने बाबा प्रीतपाल, जतिंदर पाल सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ एक और केस दर्ज करने के लिए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सीआरपीसी 156(3)की एप्लीकेशन दी। उस एप्लीकेशन पर कोर्ट ने पुलिस को इंक्वायरी करने के ऑर्डर दिए थे।


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