अहिंसा की सुख शांति देने वाली है, अहिंसा की संसार का उद्धार करने वाली है: कोमल जैन

Chandigarh News - चंडीगढ़| भगवान महावीर अहिंसा और अपरिग्रह की साक्षात मूर्ति थे। वे सभी के साथ समान भाव रखते थे और किसी को भी कोई दुःख...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:20 AM IST
Chandigarh News - the happiness of non violence is to give peace to save the world of nonviolence komal jain
चंडीगढ़| भगवान महावीर अहिंसा और अपरिग्रह की साक्षात मूर्ति थे। वे सभी के साथ समान भाव रखते थे और किसी को भी कोई दुःख नहीं देना चाहते थे। पंचशील सिद्धांत के प्रवर्तक एवं जैन धर्म के 24वें तीर्थकर महावीर स्वामी मूर्तिमान प्रतीक थे। यह कहना है ड्यूक फैशंस लुधियाना के चेयरमैन कोमल कुमार जैन का। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। भगवान महावीर ने चर्तुविध संघ की स्थापना की। देश के भिन्न भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया। उन्होंने दुनिया को पंचशील के सि़द्धान्त बताए। इसके अनुसार ये सिद्धान्त सत्य, अपरिग्रह, अस्लेय, अहिंसा और क्षमा है। उन्हांेने दुनिया को सत्य एवं अहिंसा जैसे खास उपदेश के माध्यम से सही राह दिखाने की कोशिश की।

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