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पॉल्यूशन पर 12 बड़े आदेश, माने किसी ने नहीं

दिल्ली में यमुना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) शुरू से काफी सख्त रहा है।

Dainik Bhaskar

Dec 17, 2017, 05:20 AM IST
श्रीश्री के वर्ल्ड कल्चरल इवे श्रीश्री के वर्ल्ड कल्चरल इवे

नई दिल्ली. दिल्ली में यमुना को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहले से काफी सख्त रहा है। श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग पर 5 करोड़ जुर्माना भी लगाया, लेकिन यमुना में कूड़ा फेंकना और अवैध रेत खनन जारी है। इसके अलावा राजधानी में पॉल्यूशन से निपटने के लिए डीजल जनरेटर्स पर बैन लगाया, लेकिन ये भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। पहले ही एनजीटी के कई ऑर्डर पर अमल नहीं हो रहा। अब ट्रिब्यूनल ने गंगा किनारे प्लास्टिक से बने सामान को बैन किया है। भास्कर की पड़ताल में एनजीटी के पिछले 3 साल में दिए 12 आदेश सामने आए, जिनकी देशभर में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

जानें, NGT के आदेशों की हकीकत

1. आदेश- जनवरी 2015

- एनजीटी ने यमुना साफ करने के लिए मैली सी निर्मल यमुना रिवाइटलाइजेशन प्रोजेक्ट बनाया। इसे 2017 तक पूरा होना था।

- स्थिति: यमुना अभी तक गंदी है। अक्टूबर 2017 में एनजीटी ने कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।

2. आदेश- 5 नवंबर 2015

- एनजीटी ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली समेत अन्य जगहों पर पराली जलाने पर रोक लगाई।
- स्थिति: बेखौफ पराली जलाई जा रही है, पॉल्यूशन भी बढ़ रहा है और धरती की उपजाऊ क्षमता भी कम हा रही है।

3. आदेश- 13 मई 2015

- एनजीटी ने उत्तरप्रदेश के अवैध बूचड़खानों को बंद करने का आदेश दिया था।
- स्थिति: गांव-देहात कस्बों में 30% स्लाॅटर हाउस अवैध रूप से अब भी चल रहे हैं। आॅल इंडिया जमीयतुल कुरेश के स्टेट चीफ युसूफ कुरैशी के मुताबिक, लोकल बॉडीज द्वारा चलाए जा रहे करीब 700 स्लाॅटर हाउस में से सिर्फ 1 बरेली का स्लाॅटर हाउस चालू है। बाकी मानक पूरा न कर पाने की वजह से बंद पड़े हैं।

4. आदेश- अप्रैल 2015

- एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहन 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन पर रोक लगाई।
- स्थिति: पुराने वाहन अब भी धड़ल्ले से चल रहें हैं।

5. आदेश- अगस्त 2015

- एनजीटी ने यूपी के शामली, मेरठ, सहारनपुर समेत छह जिलों में टैंकर से पीने का साफ पानी मुहैया कराने को कहा था।

- स्थिति: पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं दिया जा रहा है, लोग गंदा पानी पीने को मजबूर।

6. आदेश- जुलाई 2016

- आरटीओ को निर्देश दिया था कि दिल्ली में चल रहे 10 साल से पुराने डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करें।
- स्थिति:
केवल कुछ गाड़ी मालिकों को नोटिस भेजा गया। खूब पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

7. आदेश- दिसंबर 2016

- दिल्ली-एनसीआर में कचरा जलाने पर 5 से 25 हजार रु. जुर्माना अंडर कंस्ट्रक्शन साइट पर धूल उड़ाने वालों पर 50 हजार से 5 लाख रु. जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

स्थिति: जगह-जगह खुले में कचरा जलाया जाता है और धड़ल्ले से कंस्ट्रक्शन भी हो रहा है।

8. आदेश- 22 दिसंबर 2016

- दिल्ली, पंजाब के लिए ठोस कचरा निस्तारण (सॉलिड वेस्ट डिस्पोजल) को लेकर नियमों का पालन करने को आदेश दिया।

- स्थिति: यहां वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की कमी है।

9. आदेश- 13 अक्टूबर 2017
- नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली में इंडस्ट्रीज की जांच करने और उनमें एयर पॉल्यूशन बढ़ाने वाली इंडस्ट्रीज को बंद करने के आदेश दिए।

- स्थिति: चोरी-छिपे से कंपनियां चालू हैं।

10. आदेश- 17 अक्टूबर 2017

- दिल्ली सरकार को प्रदूषण कम करने के मद्देनजर डीजल जनरेटर्स पर बैन लगाया है।

- स्थिति: धड़ल्ले से जनरेटर्स चल रहे हैं।

11. आदेश- 28 अक्टूबर 2017

- गाजीपुर लैंडफिल साइट पर आग लगने से पॉल्यूशन पर सभी सिविक एजेंसियों को ठोस कार्रवाई के ऑर्डर दिए। दूसरी ओर, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को कूड़े से सड़क बनाने को कहा।
- स्थिति: कूड़ा कम करने की रफ्तार बेहद धीमी है, कूड़ा डालने के लिए नई जगह नहीं मिली है। आए दिन कूड़े के ढेर में आग लगती है। सड़क बनाने के लिए कूड़ा उठाया जा रहा है।

12. आदेश- 7 नवंबर 2017

- दिल्ली सरकार को राजधानी में पॉल्यूशन बढ़ने पर हेलिकॉप्टर से पानी का छिड़काव करने को कहा था।

- स्थिति: कुछ दिन फायर डिपार्टमेंट के लोगों ने सड़क किनारे पेड़-पौधों पर छिड़काव किया। अब सब बंद है।

सिर्फ ये आदेश लागू हुआ?

आदेश- 12 नवंबर 2017

- वैष्णो श्राइन बोर्ड को रोजाना केवल 50 हजार श्रद्धालु ही गुफा में दर्शन के लिए भेजे जाने का आदेश दिया।
- स्थिति: वैष्णो देवी में गुफा के दर्शन के लिए 50 हजार से अधिक भक्तों को नहीं छोड़ा जाता। जब गिनती 50 हजार पहुंचती है तो यात्रियों को पर्ची देना बंद कर देते हैं। रास्ते में 2-3 जगह नाके होते हैं। पर्ची चेक करने के बाद ही आगे बढ़ने देते हैं। जिसके पास पर्ची नहीं होती उसे गुफा की तरफ नहीं जाने दिया जाता है। उन्हें वापस भेज दिया जाता है।

NGT के पास ऑर्डर की स्थिति जानने का सिस्टम नहीं: वकील

- इस बारे में जब भास्कर ने एनजीटी के वकील रवींद्र कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि कोर्ट सिर्फ ऑर्डर पास कर सकती है। उसके अनुपालन की स्थिति जानने के लिए उसके पास कोई सिस्टम नहीं है। इसे चेक करने का कोई तरीका होना चाहिए।
- वहीं, एन्वायरमेंटलिस्ट अनिल सूद ने कहा कि एनजीटी के पास अपने आदेश का अनुपालन कराने का कोई तंत्र ही नहीं है। वह केवल सिविक एजेंसियों के अधिकारयों को समन कर सकती है। सजा नहीं दे सकती। अभी तक किसी सरकारी अधिकारी से हर्जाना नहीं लिया गया। अपने आदेश से केवल सनसनी फैलाने का काम कर रही है।

रिटायर्ड जस्टिस बोले- सिविक एजेंसियों का रवैया खराब

इस मामले पर चिंता जताते हुए रिटायर्ड जस्टिस आरएस सोढ़ी कहते हैं कि संसाधनों की कमी के चलते आॅर्डर का पालन नहीं हो पाता है। सिविक एजेंसियों का रवैया ठीक नहीं है, वह काम ही नहीं करना चाहती। यही वजह है कि किसी आदेश के अनुपालन की रफ्तार मंद हो जाती है। हमें एजेंसियों की इस सोच को बदलना होगा जो अदालतें अभी तक नहीं कर पाईं।

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