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गांधीजी की पौत्रवधू का गैरों के घर में कट रहा बुढ़ापा, बदले 3 ठिकाने

ये गांधीजी की पौत्रवधू शिवा लक्ष्मी गांधी हैं। ये गांधीजी के पोते कानूभाई गांधी की पत्नी है।

Dainik Bhaskar

Dec 17, 2017, 04:29 AM IST
शिवा लक्ष्मी अपनी स्थिति के बारे में ज्यादा बात नहीं करती हैं। मीडिया से भी वो बात करने को तैयार नहीं होती हैं। उनकी एक ही शिकायत है कि सरकार उन्हें भूल चुकी है। शिवा लक्ष्मी अपनी स्थिति के बारे में ज्यादा बात नहीं करती हैं। मीडिया से भी वो बात करने को तैयार नहीं होती हैं। उनकी एक ही शिकायत है कि सरकार उन्हें भूल चुकी है।

नई दिल्ली. दिल्ली से करीब 50 किमी दूर का गांव कादीपुर। यहां आजकल रह रही हैं एक 92 साल की बुजुर्ग महिला। आंखों की रोशनी धुंधली हो चुकी है, लेकिन याददाश्त ताजी है। जो आता है, किसी न किसी बहाने से गांधीजी के किस्से सुनने बैठ जाता है। दरअसल ये गांधीजी की पौत्रवधू शिवा लक्ष्मी गांधी हैं। ये गांधीजी के पोते कानूभाई गांधी की पत्नी है। हालांकि ये अभी जहां रह रही हैं, इसके बारे में आस-पड़ोस के लोगों को कम ही मालूम है।

पति की तबीयत खराब होने पर तीन साल पहले आई थीं इंडिया

- शिवा लक्ष्मी के पति कानू गांधी की करीब तीन साल पहले भारत में तबीयत खराब हो गई थी, उस समय वे सबकुछ छोड़कर भारत गई थीं। लेकिन पिछले एक साल से वे गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

- वे कहती हैं कि पति की बीमारी के समय मोदी सरकार ने मदद की थी, लेकिन करीब एक साल पहले हुई उनकी मौत के बाद अब कोई मेरी सुधबुध लेने वाला नहीं है।

- वे कहती हैं कि सिर्फ राहुल गांधी ने उनसे संपर्क किया था और हालचाल पूछा था। शिवा लक्ष्मी गांधी के पति अमेरिका में नासा में सांइटिस्ट थे और वे खुद बोस्टन बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर रह चुकी हैं।

गैरों ने हाथ बढ़ाया

- खैरियत पूछने पर शिवा लक्ष्मी बताती हैं कि अपनाें ने तो दूरी बना ली है लेकिन गैरों ने हाथ आगे बढ़ाया है। दरअसल पति की बीमारी के समय शिवा लक्ष्मी इंडिया आई थीं। करीब एक साल पहले पति की मौत के बाद वे एक सामाजिक संस्था में रहीं।

- यहां कुछ महीने रहने के बाद खादी ग्रामोद्योग संघ के पूर्व डायरेक्टर बीआर चाैहान ने उन्हें अपने घर पर रखा और उनकी सेवा की। बाद में उनके ही दोस्त और आरटीआई एक्टिविस्ट हरपाल राणा उन्हें कादीपुर स्थित अपने घर ले आए। अब वे यहीं रहती हैं।

- अपनों से दूरी से सवाल पर हल्की जुबां में शिवा लक्ष्मी बताती हैं, "मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि गैरों के बीच भी अपनों की कमी नहीं खलती।" उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ चुके और पश्चिम बंगाल के गवर्नर रहे उनके देवर गोपाल गांधी से उनसे बात नहीं होती।

- शिवा लक्ष्मी के पिता 1930 के आस-पास गांधीजी से मिले थे। उस समय वे बेहद अमीर व्यक्ति हुआ करते थे, लेकिन गांधीजी ने जब उनसे कहा कि आजादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए तुम्हें एशो-आराम छोड़ने पड़ेंगे तो उन्होंने सबकुछ छोड़ दिया था। उस समय गांधीजी के पोते कानू भाई गांधी भी छोटे थे। बाद में दोनों की शादी हुई।

कानूभाई नासा में सांइटिस्ट थे। एक साल पहले लंबी बीमारी के बाद उनकी मौत हो गई थी। -फाइल कानूभाई नासा में सांइटिस्ट थे। एक साल पहले लंबी बीमारी के बाद उनकी मौत हो गई थी। -फाइल
बापू की लाठी पकड़कर चलते हुए कानूभाई गांधी की यह फोटो चर्चित है। । (फाइल फोटो) बापू की लाठी पकड़कर चलते हुए कानूभाई गांधी की यह फोटो चर्चित है। । (फाइल फोटो)
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शिवा लक्ष्मी अपनी स्थिति के बारे में ज्यादा बात नहीं करती हैं। मीडिया से भी वो बात करने को तैयार नहीं होती हैं। उनकी एक ही शिकायत है कि सरकार उन्हें भूल चुकी है।शिवा लक्ष्मी अपनी स्थिति के बारे में ज्यादा बात नहीं करती हैं। मीडिया से भी वो बात करने को तैयार नहीं होती हैं। उनकी एक ही शिकायत है कि सरकार उन्हें भूल चुकी है।
कानूभाई नासा में सांइटिस्ट थे। एक साल पहले लंबी बीमारी के बाद उनकी मौत हो गई थी। -फाइलकानूभाई नासा में सांइटिस्ट थे। एक साल पहले लंबी बीमारी के बाद उनकी मौत हो गई थी। -फाइल
बापू की लाठी पकड़कर चलते हुए कानूभाई गांधी की यह फोटो चर्चित है। । (फाइल फोटो)बापू की लाठी पकड़कर चलते हुए कानूभाई गांधी की यह फोटो चर्चित है। । (फाइल फोटो)
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