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सांस नहीं ले पा रही थी तो निकाल दिया बॉडी का पूरा खून, फिर 10 डॉक्टर्स ने ऐसे बचाया

पैरों में नहीं पहुंच रहा था खून, लगातार हिचकी आने की शिकायत के बाद इमरजेंसी में कराया गया था भर्ती

Bhaskar News | Last Modified - Mar 14, 2018, 10:38 AM IST

सांस नहीं ले पा रही थी तो निकाल दिया बॉडी का पूरा खून, फिर 10 डॉक्टर्स ने ऐसे बचाया

नई दिल्ली.शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने 4 फीट लंबी एक ऐसी मरीज ज्योति (20) की सर्जरी की, जिसके शरीर में एक बूंद भी खून नहीं था। सर्जरी से पहले उसके शरीर से खून निकाल दिया गया था। मेडिकल की भाषा में इसे ‘सर्कुलेटरी अरेस्ट’ कहा जाता है। इसके बाद चार डॉक्टरों सहित 10 लोगों की टीम ने बिना रुके 11 घंटे तक मरीज की सर्जरी की। सर्जरी इसी साल जनवरी के आखिरी सप्ताह में की गई थी। अब वह स्वस्थ है। सर्जरी करने वाली टीम में शामिल डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज के हार्ट में चार कॉम्प्लीकेशन थीं। इस कारण वह ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी। पैरों में खून नहीं पहुंच पा रहा था। उसकी तुरंत सर्जरी नहीं की जाती तो उसका बचना नामुमकिन था। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसे मामले बहुत रेयर होते हैं क्योंकि मरीज को बौनेपन की बीमारी थी। एक लाख में ऐसा एक ही केस देखने को मिलता है।

लगातार हिचकी आने की शिकायत के बाद इमरजेंसी में कराया गया था भर्ती

वॉल्व का साइज 2 सेंटीमीटर से बढ़कर 7.7 सेंटीमीटर हो गया था

- अस्पताल के कार्डियोवस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी (सीवीटीएस) डिपार्टमेंट के हेड डॉ. दिनेश मित्तल ने बताया कि ज्योति को सांस लेने में तकलीफ और लगातार हिचकी आने की शिकायत के बाद इमरजेंसी में लाया गया था।

- जांच में पता चला कि उसकी बायीं धमनी सिकुड़कर 4 मिलीमीटर रह गई थी। उसके पास मौजूद वॉल्व का साइज बढ़कर 7.7 सेंटीमीटर हो गया था, जिसका औसत साइज 2 सेंटीमीटर होना चाहिए।

- एऑर्टिक आर्क का साइज भी 5.5 सेंटीमीटर हो चुका था। मरीज को कम उम्र में बीपी की भी समस्या थी। उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में बीपी हाई था और निचले हिस्से में बहुत लो। इसका कारण जानने के लिए जब सीटी स्कैन किया गया तो पता चला कि मरीज के पैरों में पल्स ही नहीं था।

- हार्ट में इतनी कॉम्प्लीकेशन के कारण पैरों में खून ही नहीं पहुंच रहा था। इससे उसे गैंगरीन का भी खतरा था। इसलिए दो फेज में सर्जरी करने की योजना बनाई गई।

ब्रेस्ट बोन खोलकर बाईपास मशीन पर डाला गया, स्टेंट डाला

- डॉ. मित्तल ने बताया कि पहले फेज में मरीज की बायीं धमनी में स्टेंट डाला गया ताकि खून का प्रवाह सामान्य रहे। स्टेंट डालने के तीन दिन बाद वॉल्व, एसेंडिंग एऑर्टा और एऑर्टिक आर्क बदलने के लिए सबसे मेजर सर्जरी करनी थी।

- इसके लिए 10 लोगों की टीम बनाई गई, जिसमें चार डॉक्टर शामिल थे। उन्होंने बताया कि मरीज के ब्रेस्ट बोन को खोलकर उसे बाईपास मशीन पर डाला गया और उसके शरीर से सारा खून निकाल लिया गया।

- मेडिकल की भाषा में इसे ‘सर्कुलेटरी अरेस्ट’ कहा जाता है। इस दौरान मरीज के शरीर का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक मेंटेन किया गया, जबकि स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का सामान्य तापमान औसतन 37.4 डिग्री सेल्सियस होता है।

- इसके बाद डॉक्टरों ने 11 घंटे तक बिना रुके सर्जरी कर वॉल्व, एसेंडिंग एऑर्टा और एऑर्टिक आर्क बदले। इस पूरी सर्जरी में जरा सी भी असावधानी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती थी।

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Web Title: saans nahi le paa rhi thi to nikal diyaa bodi ka puraa Khoon, fir 10 doktrs ne aise bchaayaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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