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हर साल 100 सैनिक आत्महत्या कर रहे, 70 फीसदी केसों में पहले फोन पर लंबी बात हुई

एक साइक्लोजिकल स्टडी में खुलासा हुआ है कि 70% केस में खुदकुशी से पहले फोन पर लंबी बातचीत की गई थी।

मुकेश कौशिक | Last Modified - Dec 30, 2017, 05:04 AM IST

हर साल 100 सैनिक आत्महत्या कर रहे, 70 फीसदी केसों में पहले फोन पर लंबी बात हुई

नई दिल्ली। सैन्यबलों में आत्महत्या के मामलों पर कराए गए एक साइक्लोजिकल स्टडी में खुलासा हुआ है कि 70% केस में खुदकुशी से पहले फोन पर लंबी बातचीत की गई थी। रक्षा मनोविज्ञान अनुसंधान संस्थान ने यह अध्ययन कराया है। इसे साइकोलॉजिकल अटॉप्सी कहा जाता है। इसमें मृत्यु से पहले व्यक्ति का व्यवहार कैसा था, इसका एनालिसिस किया जाता है। सेना में हर साल करीब 100 सैनिक खुदकुशी कर रहे हैं।

फौज में आत्महत्याओं पर अंकुश लगाने के इरादे से सेना में ‘साइकोलॉजिकल अटॉप्सी’ कराई गई है। इसके तहत खुदकुशी के कई मामले ऐसे भी पाए गए जब फौजी छुट्टी बिताने के बाद हाल ही में घर लौटा था। अध्ययन में यह भी माना गया है कि बातचीत में किसी करीबी से सैनिक का झगड़ा या बहस हुई। यह इतनी उग्र हो गई कि इसके बाद सैनिक ने खुदकुशी कर ली। हाल ही में मोबाइल फोन साथ रखने की लत को काबू में करने के लिए सेना की एक ट्रेनिंग रेजीमेंट में सैनिकों के मोबाइल जब्त कर लिए गए थे और उन्हें पत्थर पर रखकर तोड़ दिया गया था। सेना के अधिकारियों का कहना था कि मोबाइल चकनाचूर करने के पीछे जवानों में अनुशासन की भावना जगाना था। दूसरी तरफ, सशस्त्र बल मेडिकल सेवा के अनुसार, भारतीय सेनाओं में कठिन हालात में तैनाती या अवकाश मिलने की वजह से मनोवैज्ञानिक मामले दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम हैं।

साइकोलॉजिकल अटॉप्सी, मौत से पहले कैसा था व्यक्ति, होता एनालिसिस
- 92 फौजियो ने इस साल अब तक खुदकुशी की है।
- इनमें सेना के दो अफसरों समेत 69 सैनिक, नौसेना में एक अफसर और सेलर तथा वायु सेना में 18 एयरमैन शामिल हैं।

मनोवैज्ञानिक पोस्टमॉर्टम
साइकोलॉजिकल अटॉप्सी एक मनोवैज्ञानिक पोस्टमॉर्टम है जो शरीर के बजाए किसी व्यक्ति के मरने के बाद उसके सारे व्यवहार को बारीकी से जांचता है। इसमें देखा जाता है कि मरने से पहले उस शख्स ने किससे, कब-कब क्या बातचीत की थी, उसके खाने-सोने और जीने का पैटर्न क्या था। वह किन-किन लोगों से मिलता था और उनके साथ व्यवहार कैसा था।

फोन पर बातों से तनाव संभव
इस अध्ययन के रिजल्ट को लेकर कहा जा सकता है कि संभवत: सेना के जवान जब घर बात करते हैं तो उनको घर की समस्याओं या लड़ाई-झगड़े की बातें भी बताई जाती होंगी। ऐसे हालात में कुछ कर पाने पर तनाव का स्तर काफी बढ़ सकता है। इस वजह से झुंझलाहट और गुस्सा आना भी स्वभाविक है। इनका लेवल चरम पर पहुंचने पर कोई भी व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। -डॉ.नंद कुमार, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, एम्स

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Web Title: har saal 100 sainik aatmHatya kar rahe, 70 fisdi keson mein pehle fon par lambi baat huee
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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