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शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन, जब कलाम ने छोड़ दी थी अपनी कुर्सी

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को निधन हो गया। वह 83 साल के थे।

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 12:24 AM IST
Abdul Kalam left chair for Shankaracharya Jayendra Saraswati

कांचीपुरम(नई दिल्ली). कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को निधन हो गया। वह 83 साल के थे। उन्होंने बुधवार सुबह कांचीपुरम के प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार गुरुवार को होगा। जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को तमिलनाडु में हुआ था। वह कांची मठ के 69वें शंकराचार्य थे। जयेंद्र 1954 में शंकराचार्य बने थे। इससे पहले उनका नाम सुब्रमण्यन महादेव अय्यर था। एक बार जब जयेंद्र सरस्वती प्रेसीडेंट एपीजे अब्दुल कलाम से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे, तब कलाम ने जयेंद्र को अपनी कुर्सी पर बैठा दिया। जयेंद्र बोले ये क्यों किया? कलाम ने कहा- ताकि इस कुर्सी पर हमेशा आपका आशीर्वाद बना रहे। 65 साल तक शंकराचार्य रहे....

- उन्हें सरस्वती स्वामिगल का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। तब उनकी उम्र महज 19 साल थी।

- जयेंद्र 65 साल तक शंकराचार्य रहे। 2003 में उन्होंने बतौर शंकराचार्य 50 साल पूरे किए थे।

- 1983 में जयेंद्र सरस्वती ने शंकर विजयेन्द्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। ो

- कांची मठ की स्थापना खुद आदि शंकराचार्य ने की थी। कांची मठ कांचीपुरम में स्थापित एक हिंदू मठ है।

- यह पांच पंचभूतस्थलों में से एक है। यहां के मठाधीश्वर को शंकराचार्य कहते हैं।

जयेंद्र सरस्वती को हत्या के एक मामले में जेल भी जाना पड़ा था

- जयेंद्र सरस्वती को शंकररमन हत्याकांड मामले में गिरफ्तार किया गया। हालांकि बाद में उन्हें बरी कर दिया गया था। इस केस में कांचीमठ के शंकराचार्य और उनके सहयोगी मुख्य आरोपी थे। उस समय तमिलनाडु में जयललिता की सरकार थी। जयललिता जयेंद्र सरस्वती को अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं। जिस वक्त जयेंद्र सरस्वती को पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो वह ‘त्रिकाल संध्या’ कर रहे थे।

अयोध्या विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे शंकराचार्य
- जयेंद्र सरस्वती एक समय अयोध्या विवाद के हल के लिए काफी सक्रिय थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अयोध्या मसले के समाधान के लिए शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की सराहना की थी। जयेंद्र ने 2010 में ये दावा किया था कि वाजपेयी सरकार अयोध्या विवाद के समाधान के करीब पहुंच गई थी। वह संसद में कानून बनाना चाहती थी।

आदिशंकराचार्य ने देश के चारों दिशाओं में स्थापित किए हैं ये मठ

श्रृंगेरी मठ
- श्रृंगेरी शारदा पीठ कर्नाटक के चिकमंगलुर में है। यहां दीक्षा लेने वाले संयासियों के नाम के बाद सरस्वती, भारती, पुरी लगाया जाता है।

गोवर्धन मठ
- गोवर्धन मठ ओडिशा के पुरी में है। इसका संबंध भगवान जगन्नाथ मंदिर से है। इसमें बिहार से ओडिशा व अरुणाचल तक का भाग आता है।

शारदा मठ
- द्वारका मठ को शारदा मठ कहा जाता है। यह गुजरात में द्वारकाधाम में है। यहां दीक्षा लेने वाले के नाम के बाद तीर्थ और आश्रम लिखा जाता है।

ज्योतिर्मठ
- ज्योतिर्मठ उत्तराखण्ड के बद्रिकाश्रम में है। यहां दीक्षा लेने वाले के नाम के बाद गिरि, पर्वत और सागर का विशेषण लगाया जाता है।

Abdul Kalam left chair for Shankaracharya Jayendra Saraswati
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