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अमेरिका से जॉब छोड़ लौटे सरित और संध्या, बच्चों को सिखा रहे एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग

गणित-विज्ञान पढ़ाने का ऐसा तरीका, जिससे रटना न पड़े

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 02:53 AM IST

धर्मशाला(हिमाचल प्रदेश). भारतवंशी सरित शर्मा और संध्या गुप्ता अमेरिका की एक रिसर्च कंपनी में काम कर रहे थे। देश के लिए कुछ करने की इच्छा थी तो जॉब छोड़ी और भारत लौट आए। अब बच्चों की पढ़ाई को क्रिएटिव अंदाज देने के लिए काम कर रहे हैं। दाेनों ने मिलकर "आविष्कार' नाम का एक संगठन बनाया है, जो बच्चों को गणित और विज्ञान पढ़ाने के लिए ऐसे तरीके ईजाद कर रहा है, जिससे बच्चों को ये कठिन सब्जेक्ट रटने ना पढ़ें।


पढ़ाई के ऐसे तरीके निकाले गए हैं, जिससे बच्चों को रेशनल नंबर, इंटीजर्स, गैस, लाइट, साउंड जैसे टॉपिक पढ़ाए नहीं जाते, बल्कि सिखाए जाते हैं। 2009 में अमेरिका से लौटकर सरित और संध्या हिमाचल प्रदेश पहुंचे थे। यहां पालमपुर के कंडबाड़ी में उन्होंने अपनी बेटी का एडमिशन एक सरकारी स्कूल में कराया। संध्या भी कभी-कभी बेटी के साथ उसके स्कूल चली जातीं।

उन्होंने महसूस किया कि गणित, विज्ञान जैसे विषय पढ़ने में बच्चों को काफी मुश्किल आती है। पढ़ाने का तरीका इतना परंपरागत है कि ये सब्जेक्ट बच्चों को बोरिंग लगने लगते हैं। इसलिए सरित और संध्या ने फैसला किया कि वो बच्चों की इस समस्या को दूर करने के लिए ही काम करेंगे।

इसके करीब 4 साल रिसर्च करने के बाद 2013 में दोनों ने अपने संगठन ‘अाविष्कार’ की नींव रखी। ये संगठन बच्चों को एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग कराता है। सरित और संध्या ने कुछ ऐसे प्रॉप्स (सामान) तैयार किए, जिसकी मदद से बच्चों को प्रैक्टिकल तरीके से गणित और विज्ञान के टॉपिक सिखाए जा सकें। बच्चों की जानकारी बढ़ाने के लिए डिब्बों में मॉडल, प्रयोग और दृश्य की मदद ली जाती है। बच्चे इनको छूकर और देखकर समझ सकते हैं कि गणित का कोई नियम कैसे बनता है या विज्ञान की रिएक्शन कैसे पूरी होती है।

10 हजार बच्चों को नए तरीके से पढ़ाई कराई

अाविष्कार हिमाचल के 25 स्कूलों में काम कर रहा है। ज्यादातर पालमपुर के आसपास के हैं। संगठन 4 साल में करीब 10 हजार बच्चों को एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग का अभ्यास करा चुका है।