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10% घटेगा दुकानदारों का बिजनेस, 30 विदेशी ब्रैंड आने की उम्मीद

सिंगल ब्रैंड रिटेल ट्रेडिंग में ऑटोमेटिक रूट से सौ फीसदी विदेशी पूंजी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दी है।

धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया | Last Modified - Jan 14, 2018, 04:26 AM IST

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    केंद्र सरकार ने सिंगल ब्रैंड रिटेल में ऑटोमेटिक रूट से सौ फीसदी विदेशी पूंजी निवेश(एफडीआई) को मंजूरी दी है। ( सिम्बॉलिक इमेज)

    नई दिल्ली.देश के करीब 45 लाख करोड़ रुपए के खुदरा (रिटेल) कंज्यूमर मार्केट में हलचल बढ़ गई है। इसी हफ्ते केंद्र सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग में ऑटोमेटिक रूट से 100% विदेशी पूंजी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दी है। मौजूदा वक्त में खुदरा बाजार में संगठित रिटेल क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 9 फीसदी है। इस फैसले और जीएसटी जैसे अन्य कारणों से अगले पांच साल में यह हिस्सेदारी बढ़कर 22 फीसदी हो जाएगी। दो साल में 30 नए विदेशी ब्रांड भारत आ सकते हैं।

    2020 तक बिजनेस 20% तक घटने की आशंका

    - सरकार की नीतियां स्थिर बनी रहीं तो अगले पांच साल में 10 बिलियन डॉलर यानी करीब 65 हजार करोड़ का फॉरेन इन्वेस्टमेंट भी सिंगल ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग में आ सकता है। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। ट्रेडर्स सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

    - कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार सरकार के फैसले का विपरीत असर खुदरा ट्रेडर्स पर पड़ेगा। साल 2019 तक 10 फीसदी बिजनेस कम होने की आशंका है। भविष्य में इस कारोबार से जुड़े लोगों की अगली पीढ़ी कर्मचारी बन जाएगी।

    बीते 6 महीने में 17% ज्यादा FDI आया

    - डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल एंड प्रमोशन के मुताबिक, देश में चालू फाइनेंशियल ईयर में अप्रैल से सितंबर 2017 के छह महीने के दौरान 25.35 बिलियन डॉलर (1 लाख 63 हजार करोड़ रुपए) का फॉरेन इन्वेस्टमेंट आया, जो पिछले साल की तुलना में 17% ज्यादा है।

    - इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन फिक्की और डिलॉइट की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रिटेल इंडस्ट्री करीब 45 लाख करोड़ रुपए की है। इसके हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

    - स्वीडन की फर्नीचर कंपनी आइकिया सिंगल ब्रांड रिटेल क्षेत्र में भारत की अब तक की सबसे बड़ी निवेशक कंपनियों में से एक है। इसने देश में स्टोर खोलने के लिए 10,500 करोड़ रुपए इन्वेस्टमेंट का वादा किया है।

    - अन्य प्रमुख रिटेल ब्रैंड एचएंडएम और डिकेथलाॅन भी सिंगल ब्रांड के साथ भारत में कारोबार शुरू कर चुके हैं। अमेरिकी कंपनी एप्पल समेत कई कंपनियां नियमों की अड़चन के कारण देश में स्टोर शुरू नहीं कर पाई हैं।

    संगठित रिटेल में 5 साल में 22 लाख इम्प्लॉइमेंट आएंगे
    - नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के मुताबिक, सरकार के इस कदम का सकारात्मक असर होगा। बड़े-बड़े ब्रैंड आइकिया-एप्पल की इन्वेस्टमेंट में आने वाली दिक्कतें दूर होगी और वे अपने स्टोर खोल पाएंगे।

    - साथ ही सरकार ने 30% प्रीक्योरमेंट के नियम को पांच साल तक के लिए स्थगित कर दिया है। हाइटेक इंडस्ट्री जैसे एप्पल को लोकल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बनाने में समय लगता है। ऐसे में पांच साल के समय में ऐसी कंपनियां यह काम कर पाएंगी और बड़ी विदेशी कंपनियों को भारत आने में आसानी होगी।

    - अगले दो साल में सिंगल ब्रैंड रिटेल ट्रेड में 30 नए विदेशी ब्रांड भारत आ सकते हैं। कुमार ने आगे कहा कि जीएसटी के बाद अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर धीरे-धीरे ऑर्गनाइज्ड हो रहा है। रिटेल ट्रेड में बढ़ोत्तरी हो रही है, साथ ही सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई में भी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसे में देश में अगले पांच साल में संगठित रिटेल सेक्टर में 20 से 22 लाख नए इम्प्लॉइमेंट आ सकते हैं।

    फैसले से फूड और फैशन में बढ़ेंगे विकल्प

    फैसले से फायदाफैसले से नुकसान
    (1) नीति आयोग के उपाध्क्ष राजीव कुमार के अनुसार देश में अगले पांच साल में संगठित रिटेल क्षेत्र में 20 से 22 लाख नए रोजगार आने की संभावना है।खुदरा असंगठित क्षेत्र के दुकानदारों का व्यापार घटने की आशंका। 2020 तक ट्रेडर्स का कारोबार 20 फीसदी तक कम होने की आशंका है।
    (2) प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स के पार्टनर धीरज कुमार के अनुसार विदेशी कंपनियां भी सीधे कारोबार शुरू कर पाएंगी। बस निवेश की सूचना देनी होगी। मंजूरी आदि में लगने वाले समय में छह माह तक की कटौती हो सकती है।केट के अध्यक्ष बीसी भरतिया के अनुसार देश में करीब सात करोड़ छोटे-बड़े खुदरा व्यापारी हैं। सिंगल ब्रैंड रिटेल एफडीआई नियम सरल होने के बाद व्यापार घटने के फलस्वरूप रोजगार की संख्या घटने की आशंका।
    (3) कंज्यूमर्स के पास कई प्रोडक्ट्स के लिए नए विकल्प मौजूद रहेंगे। खास तौर से गारमेंट, फैशन, फुटवियर और फूड क्षेत्र में। अन्य क्षेत्रों में कॉम्पिटिशन के कारण उचित दाम पर बेहतर ब्रैंड मिल पाएंगे।स्थानीय रिटेलर्स विदेश से कर्ज आदि सरकार की मंजूरी के बिना नहीं ले सकते हैं, उन्हें भारत से ऊंची ब्याज दर पर लोन लेना पड़ता है। जबकि विदेश से फंड सस्ता मिलता है, स्थानीय रिटेलर्स के लिए यह चुनौती रहेगी।
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    एफडीआई नियम सरल हो जाने से ट्रेडर्स को अाशंका है कि 2020 तक उनका बिजनेस 20 पर्सेंट तक घट जाएगा। ( सिम्बॉलिक इमेज)
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