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एसोचैम का सर्वे: हीरे की शुद्धता को लेकर ग्राहक आशंकित, 10-15% घटी मांग

65% ज्वेलर्स ने पारंपरिक गोल्ड-सिल्वर ज्वेलरी का रुख किया

Danik Bhaskar | Mar 17, 2018, 06:53 AM IST
फ्रॉड केस में डायमंड कंपनियों पर कार्रवाई का असर असंगठित क्षेत्र के सराफा कारोबारियों पर पड़ा। - सिम्बॉलिक फ्रॉड केस में डायमंड कंपनियों पर कार्रवाई का असर असंगठित क्षेत्र के सराफा कारोबारियों पर पड़ा। - सिम्बॉलिक

कोलकाता. पीएनबी में 12,672 करोड़ के फ्रॉड में हीरा कारोबारियों की मिलीभगत सामने आने के बाद खरीदारों के जहन में डायमंड ज्वेलरी की प्यूरिटी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी के चलते बीते 2 महीने में हीरे की मांग 10 से 15% घट गई। यह खुलासा उद्योग संगठन एसोचैम के एक सर्वे से हुआ है। इसमें कहा गया है कि फ्रॉड केस में डायमंड कंपनियों पर कार्रवाई का असर असंगठित क्षेत्र के सराफा कारोबारियों पर पड़ा। बता दें कि देश में बैंकिंग इंडस्ट्री के सबसे बड़े फ्रॉड में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप का मालिक मेहुल चौकसी मुख्य आरोपी हैं। दोनों मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज होने से पहले विदेश भाग चुके हैं।

छोटे सफारा कारोबारियों पर ज्यादा असर

- एसोचैम के सर्वे के मुताबिक, हीरे की शुद्धता को लेकर ग्राहकों के भरोसे में कमी आने का सबसे ज्यादा असर सराफा कारोबारियों पर हुआ है। ब्रांडेड ज्वेलरी बनाने वाली कंपनियां शुद्धता का सर्टिफिकेट जारी करती हैं। इनके शोरूम अधिकतर बड़े शहरों में हैं। जबकि ज्यादा खरीदारी छोटे शहरों में होती है, जहां छोटे-छोटे ज्वेलर्स की दुकानें ज्यादा हैं। छोटे शहरों में खरीदारी भरोसे से चलती है।

पहले खरीदी गई ज्वेलरी की जांच कराने वाले बढ़े

- एसोचैम ने इस सर्वे में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरू, चंडीगढ़ और देहरादून में 350 ज्वेलर्स की राय जानी।

- इसके मुताबिक असंगठित क्षेत्र के 65% सराफा कारोबारी डायमंड ज्वेलरी के बजाय पारंपरिक गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की ओर रुख कर रहे हैं। पहले खरीदी जा चुकी ज्वेलरी की क्वालिटी की जांच कराने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ी है। आलम ये है कि लोग ज्वेलरी खरीदने से ही कतराने लगे हैं। इससे सोने की मांग में भी कमी आई है।

हीरे की शुद्धता को लेकर ग्राहकों के भरोसे में कमी आने का सबसे ज्यादा असर सराफा कारोबारियों पर हुआ है। - फाइल हीरे की शुद्धता को लेकर ग्राहकों के भरोसे में कमी आने का सबसे ज्यादा असर सराफा कारोबारियों पर हुआ है। - फाइल