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एक लाख से ज्यादा हो सकती है बैंक में जमा पैसे की गारंटी : जेटली

बैंक दिवालिया होने पर अभी जमाकर्ता को एक लाख रुपए तक मिलने की गारंटी होती है।

Dainik Bhaskar

Jan 03, 2018, 06:13 AM IST
Bank can deposit more than one lakh, guarantee money

नई दिल्ली. बैंक दिवालिया होने पर अभी जमाकर्ता को एक लाख रुपए तक मिलने की गारंटी होती है। डिपॉजिट इंश्योरेंस की यह सीमा बढ़ सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राज्यसभा में यह बात कही। वह फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के जमा पैसे पर बेहतर सुरक्षा देने पर विचार कर रही है। मंगलवार को ही वित्त मंत्रालय ने एफआरडीआई बिल को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें कहा गया है कि अभी जमाकर्ताओं को जो सुरक्षा मिली हुई है, उसे कम नहीं किया जाएगा। एफआरडीआई बिल पर जेटली...


- एफआरडीआई बिल पर सवालों के जवाब में जेटली ने कहा, ‘यह बिल अभी संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास है। इसे बजट सत्र के अंत तक सिफारिशें देने को कहा गया है। जहां तक सरकारी बैंकों में जमाकर्ताओं के पैसे की बात है, तो इसे हमेशा सरकार की गारंटी रही है, और आगे भी रहेगी। सरकार का इरादा जमाकर्ताओं को अभी की तुलना में बेहतर सुरक्षा देना है।’

- बहस के दौरान राज्यसभा चेयरमैन एम. वेंकैया नायडू ने भी कहा कि बिल को लेकर लोगों में काफी गलतफहमी फैली हुई है। अच्छी बात है कि मंत्री इस पर स्पष्टीकरण दे रहे हैं। अभी अगर बैंक में डिपॉजिटर के एक लाख रुपए से ज्यादा जमा हैं, तो बैंक दिवालिया होने की स्थिति में उसे अधिकतम एक लाख रुपए ही मिलेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि इस बिल के जरिए सरकार का इरादा गारंटी की यह सीमा बढ़ाने का है। मैं इस बारे में सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार हूं।
- वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एफआरडीआई बिल से जमाकर्ताओं को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी। बिल के ‘बेल-इन’ प्रावधानों के बारे में खासकर सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। यह पूरी तरह गलत है। बैंक दिवालिया होने की स्थिति में बिल में कई प्रावधान किए गए हैं। बेल-इन उनमें से एक है।

- इसके इस्तेमाल की जरूरत शायद ही पड़े। सरकारी बैंकों के मामले में तो ऐसी स्थिति आने की संभावना ही कम है। बिल में एक रिजॉल्यूशन कॉरपोरेशन बनाने का प्रावधान है। इसके पास डिपॉजिट इंश्योरेंस बढ़ाने का भी अधिकार होगा।

डर क्यों : बैंक बचाने में जमाकर्ता के पैसे का भी हो सकता है इस्तेमाल
- दिवालिया होने की स्थिति में बैंक को दो तरीके से बचाया जा सकता है। बेल-आउट पैकेज और बेल-इन। बेल-आउट में सरकार टैक्सपेयर के पैसे से बैंक को बचाती है। बेल-इन में बैंक को बचाने में जमाकर्ता के पैसे का इस्तेमाल होता है। इसी प्रावधान से लोगों को डर लग रहा है कि अगर बैंक बंद हुआ तो उनके पैसे डूब जाएंगे। 2013 में साइप्रस में बेल-इन का इस्तेमाल किया गया था, तब जमाकर्ताओं को आधी रकम गंवानी पड़ी थी।

आशंका : फैसले के खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते, इसलिए बढ़ी आशंका
- विवाद की एक और वजह है रिजॉल्यूशन कॉरपोरेशन। यह ऐसा बोर्ड होगा जिसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इसमें अध्यक्ष समेत कुल 11 सदस्य होंगे, जिनमें से 7 को सीधे सरकार नियुक्त करेगी।

सरकार की सफाई : पैसे लौटाने में जमाकर्ता को अधिक वरीयता
- मौजूदा कानून में एक लाख रुपए से अधिक अन-इंश्योर्ड जमा को असुरक्षित यानी अन-सिक्योर्ड क्रेडिटर के बराबर माना जाता है। बैंक दिवालिया होने पर अधिक वरीयता वालों को भुगतान के बाद ही अन-इंश्योर्ड जमाकर्ता को पैसे मिलेंगे।

- एफआरडीआई बिल में ऐसे लोगों को वरीयता में अनसिक्योर्ड क्रेडिटर और सरकार के ऊपर रखा गया है। यानी पहले इनके पैसे लौटाए जाएंगे, उसके बाद ही अनसिक्योर्ड क्रेडिटर और सरकार को भुगतान किया जाएगा। यही नहीं, एक लाख रुपए तक के जो इन्श्योर्ड डिपॉजिटर हैं, उनके पैसे का इस्तेमाल बेल-इन में नहीं होगा।

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