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एक ब्लड टेस्ट पांच साल पहले ही बता देगा कौन से कैंसर का खतरा

शरीर में मौजूद क्रोमोजोम की होगी जांच, टेक्सास यूनिवर्सिटी करेगी मदद

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2018, 07:31 AM IST
शरीर में मौजूद क्रोमोजोम की होगी जांच, टेक्सास यूनिवर्सिटी करेगी मदद। - फाइल शरीर में मौजूद क्रोमोजोम की होगी जांच, टेक्सास यूनिवर्सिटी करेगी मदद। - फाइल

नई दिल्ली. देश में अब तक कैंसर की पहचान के लिए शरीर में मौजूद जीन्स की ही जांच की जाती है। लेकिन जल्द ही खून की सिर्फ एक जांच पांच साल पहले स्वस्थ व्यक्ति को यह बता देगी कि उसे किस तरह का कैंसर होने का खतरा है। मसलन उसे आंखों का कैंसर हो सकता है या ब्रेस्ट कैंसर। इस जांच का नाम ‘साइटो जेनेटिक एनालिसिस’ है। इसका फायदा यह होगा कि मरीज को जिस कैंसर के होने का खतरा होगा, वह उसके प्रति पहले से सावधान हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि खून की जांच की यह तकनीक देश में कैंसर के बढ़ते मामलों को रोकने में मदद करेगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस सबसे बड़ी सुविधा देने का बीड़ा दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई ) ने उठाया है।

- डीएससीआई इंस्टिट्यूट में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. एस पाठक का दावा है कि यह जांच देश के सबसे बड़े कैंसर के अस्पताल टाटा कैंसर इंस्टिट्यूट (मुंबई) और एम्स (दिल्ली) में भी नहीं है। उनकी पूरी टीम इस कोशिश में लगी है कि जल्द ही इस जांच को डीएससीआई के मॉलिक्यूलर लैब में शुरू कर दिया जाए।

- यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास यानी दुनिया के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यहां शरीर में मौजूद कई क्रोमोजोम (गुणसूत्र) रिसर्च के आधार पर नंबर दिए जाते हैं। इनकी जांच से यह पता चल जाएगा कि कौन से क्रोमोजोम के टूटने से किस तरह का कैंसर हो सकता है।


एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट
- अमेरिका में इस जांच को करवाने के लिए लोगों को 1200 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। खून की जांच रिपोर्ट आने में एक हफ्ते का समय लगता है।

- डीएससीआई डायरेक्टर डॉ.आरके ग्रोवर ने बताया कि चार्ज पर फैसला सरकार लेगी। हालांकि हमारे यहां मरीजों का रजिस्ट्रेशन दो प्रकार से होता है। पहला जनरल इसमें सारी सुविधाएं मुफ्त होती हैं। दूसरा प्राईवेट, इसमें मरीजों को दूसरे बड़े निजी अस्पतालों की तुलना में आधे से भी कम दाम पर इलाज मिलता है।

क्रोमोजोम नंबर टूटने से पता चलेगा कि कौन सा कैंसर है
क्रोमोजोम 5: कोलोन कैंसर (मल द्वार का कैंसर)
क्रोमोजोम 13: रेटीनो ब्लास्टोमा (आंखों का कैंसर)
क्रोमोजोम 1, 13 और 17: ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर)
क्रोमोजोम 9 और 22: क्रॉनिक ल्यूकेमिया (रक्त का कैंसर)
क्रोमोजोम 8 और 14: लिम्फोमा कैंसर
क्रोमोजोम 11: किडनी का कैंसर बच्चों काे
क्रोमोजोम 3: किडनी का कैंसर बड़ों काे
क्रोमोजोम x: गॉल ब्लेडर कैंसर (पित्ताशय का कैंसर)

इस जांच के लिए किसी महंगी या भारी भरकम मशीन की जरूरत नहीं है। इसके लिए ब्लड टेस्ट की तकनीक और वैज्ञानिक भाषा में क्रोमोजोम की बाइंडिंग करनी आनी चाहिए। उनकी विशेष पहचान के अनुसार उन्हें पहचानना जरूरी है। डीएससीआई के टेक्नीशियनों यह तकनीक सिखाने मैं यहां आता हूं।
- डॉ. एस पाठक, साइंटिस्ट, टेक्सास यूनिवर्सिटी

हमारी लैब यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर से एफिलिएटेड है। पूरी कोशिश है कि जांच की यह तकनीक हमारे यहां भी शुरू हो सके। ट्रेनिंग सेशन करवाए जा रहे हैं, क्योंकि जांच के लिए टेक्निकल नॉलेज की ज्यादा जरूरत है।
- डॉ. आरके ग्रोवर, डायरेक्टर, डीएससीआई

डॉ. एस पाठक रिपोर्ट दिखाते। - फाइल डॉ. एस पाठक रिपोर्ट दिखाते। - फाइल
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