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DB SPL: तीन सरकारों के आखिर पूर्ण बजट का एनालिसिस, इस बार बड़ी छूट की उम्मीद

शहरी और मध्यम वर्ग ने सरकार का साथ गुजरात में दिया इसलिए इनको बनाए रखने की भी चुनौती है।

धर्मेंद्र सिंह भदौरिया | Last Modified - Jan 21, 2018, 09:02 AM IST

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    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इनकम टैक्स की छूट सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपए हो सकती है। -सिम्बॉलिक इमेज

    नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट 1 फरवरी को पेश होगा। गुजरात चुनाव में बीजेपी को गांवों में मिली हार और युवाओं के कम वोट की वजह से सरकार गांव और युवाओं को सौगात दे सकती है। वहीं, शहरी और मध्यम वर्ग ने सरकार का साथ गुजरात में दिया, इसलिए इनको बनाए रखने की भी चुनौती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इनकम टैक्स पर छूट की लिमिट 2.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपए हो सकती है, साथ ही इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव भी किया जा सकता है। कारोबारियों को कॉर्पोरेशन टैक्स घटने और होम लोन लेने वालाें को इनकम टैक्टस के सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में भास्कर ने इंडस्ट्री ऑर्गेनाइजेशन एसोचैम के साथ मिलकर पिछली तीन सरकारों के आखिरी तीन पूर्ण बजट का एनालिसिस किया। ताकि, हम यह समझ सकें कि सरकारें ऐसे बजट में कैसे एलान करती हैं।

    तीनों बजट में इनकम टैक्स में छोटी छूट जरूर दी

    - इससे पहले की तीन सरकारों -यूपीए-2 के 2013-14 का बजट, यूपीए-1 का 2008-09 का बजट और एनडीए सरकार के 2003-04 के आखिरी पूर्ण बजट को हमने इसमें शामिल किया।

    - यह उभरकर आया कि पिछली तीनों सरकारों के अपने-अपने आखिरी पूर्ण बजट में किसी न किसी रूप में इनकम टैक्स में छूट जरूर दी है, लेकिन यह बड़ी नहीं थी।

    - यूपीए-1 का साल 2008-09 का बजट सबसे ज्यादा लुभावने एलान वाला रहा, जिसमें देश में आजादी के बाद का अब तक का सबसे बड़ा 60 हजार करोड़ रुपए का किसानों का कर्ज माफ करने का एलान किया गया।

    - स्टडी में यह बात भी सामने आई कि पूर्व की तीनों सरकारों के वित्त मंत्रियों ने इनकम टैक्स छूट, एग्रीकल्चर लोन की रकम, सोशल सेक्टर, हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को राहत, फार्मा सेक्टर काे रियायत, जेम्स-ज्वेलरी या डायमंड सेक्टर के लिए प्रोविजन और यूथ के स्किल डेवलपमैंट या इम्प्लॉयमेंट का ध्यान जरूर रखा है।

    'तीन साल से किसानों की हालत खराब'

    - इस संबंध में बात करने पर कृषि स्पेशलिस्ट देवेंद्र शर्मा ने कहा कि 2008-09 से दो साल पहले ही किसानों को कर्ज माफी मिलनी चाहिए थी, क्योंकि लगातार सूखे से प्रोडक्शन कम हो रहा था, लेकिन सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए चुनाव से पहले आखिरी वक्त में इसका फैसला किया।

    - उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में भी बीते तीन साल से किसान की हालत खराब है। शुरुआती दो साल सूखा और बीते साल किसान को उपज की सही कीमत नहीं मिली, दाम 25% से 40% तक कम मिले। इस बार भी सरकार को कर्ज राहत देना चाहिए, लेकिन उम्मीद नहीं है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, 11 या 12 लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर लोन देने की बात बजट में जरूर शामिल हो सकती है।

    एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज माफी का एलान
    - एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डीएस रावत ने बताया कि 2008-09 में गुंजाइश बहुत थी अभी इनडायरेक्ट टैक्स, टारगेट के मुकाबले कम मिल रहे हैं। सरकारी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए, गुंजाइश कम है। कुछ राज्यों ने किसानों का कर्ज माफ करने का एलान किया है, जो एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। अब भारत सरकार किसानों का कर्ज माफ करने की हालत में नहीं है। अभी तो सरकार जॉब तैयार करने पर फोकस करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, वेयर हाउस बनाने, कांट्रैक्चुयल फार्मिंग, एग्रीकल्चर इक्युपमेंट बैंक का एलान कर सकती है। स्किल डेवलपमेंट पर भी एक्सट्रा फोकस करेंगे। इनकम टैक्स में छूट और टैक्स स्लैब बदल सकते हैं, इसी तरह काॅरपोरेशन टैक्स में कारोबारियों को छूट मिल सकती है।

    'डिसइन्वेस्टमेंट का एलान कर सकती है सरकार'

    - देवेंद्र शर्मा ने कहा कि 2003-04 में सरकार के सामने इनकम बढ़ाने की चुनौती थी, इसीलिए सरकार ने खाद, डीजल जैसी चीजों पर भी दाम बढ़ाए थे। डीजल की कीमतें उस वक्त सरकार के कंट्रोल में थी, लेकिन अभी नहीं हैं। सरकार पैसा बढ़ाने के लिए डिसइन्वेस्टमेंट का एलान कर सकती है। एजुकेशन और हेल्थ में बजट अलाॅटमेंट बढ़ाया जा सकता है। स्मॉल एंड मीडियम साइज इंटरप्राइजेज (एसएमई) सेक्टर के लिए भी सरकार अहम एलान कर सकती है।

    - उन्होंने कहा कि 2013-14 में यूपीए सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद भी आम लोगों को बड़ी राहत नहीं दे पाई थी। हालांकि, उस बजट में महिलाओं के लिए निर्भया फंड समेत कई एलान थे।

    - बजट में पहले किए गए एलानों के बारे में पूछने पर क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा कि मौजूदा वक्त में सरकार लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट पर फोकस करेगी। हर चीज में सब्सिडी नहीं दी जा सकती है। सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और रूरल एरिया पर सरकार फोकस करेगी। इनकम टैक्स में छूट बजट में जरूर शामिल होगी।


    2008-09 के बजट में मिली थी सबसे ज्यादा छूट

    बजट 2013-2014: पांच लाख इनकम वालों को मिली थी 2 हजार की छूट

    - दो से पांच लाख रुपए इनकम वाले हर इनकम टैक्स पेयर को दो हजार रुपए की टैक्स छूट का एलान किया गया था। इस तरह 2.2 लाख रुपए की इनकम, टैक्स फ्री हो गई।

    - 50 हजार करोड़ रुपए के टैक्स फ्री इंफ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड का एलान किया था।

    - निर्भया केस के बाद सरकार ने लड़कियों और महिलाओं की सिक्युरिटी के लिए एक हजार करोड़ रुपए के निर्भया फंड का एलान किया था। महिला बैंक का भी एलान किया गया था।

    - 2013-14 में 90 लाख यूथ का स्किल डेवलपमेंट करने का टारगेट। नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन कई स्कील्स में ट्रेनिंग के लिए सिलेबस और स्टैंडर्ड बनाएगा। इस स्कीम के लिए एक हजार करोड़ रुपए अलग से रखे जाएंगे।

    - मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलपमेंट के लिए 2013-14 में 80,194 करोड़ का अलॉटमेंट। जो 2012-13 की तुलना में 46 फीसदी ज्यादा। 2013-14 के लिए संबंधित लोन का टारगेट सात लाख करोड़ रुपए रखा गया है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन बनाना।

    बजट 2008-09: तब इनकम टैक्स फ्री लिमिट 40 हजार रुपए बढ़ाई गई थी

    - पुरुषों के लिए 1.1 से 1.5 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री की गई थी। महिलाओं के लिए यह 1.45 लाख रुपए से बढ़कर 1.8 लाख रुपए हुई। सीनियर सिटिजन के लिए 1.95 लाख से 2.25 लाख रुपए की गई। वहीं, 3 लाख रुपए तक की इनकम पर 10%, 3 लाख से ज्यादा और 5 लाख रु. तक पर 20% और 5 लाख से ज्यादा की इनकम पर 30% टैक्स स्लैब हुआ।

    - राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) भारत के सभी 596 रूरल डिस्ट्रिक्ट में शुरू करने का एलान। 16 हजार करोड़ रुपए का प्रोविजन किया गया। पूर्ण स्वच्छता अभियान के लिए 1200 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का प्रोविजन।

    - पुरुषों के लिए 1.1 लाख से 1.5 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री की गई। महिलाओं के लिए यह 1.45 लाख रुपए से बढ़कर 1.8 लाख रुपए हुई। सीनियर सिटिजंस के लिए 1.95 लाख से 2.25 लाख रुपए की गई। वहीं 3 लाख रुपए तक की इनकम पर 10%, 3 लाख से ज्यादा और 5 लाख रुपए तक पर 20% और 5 लाख से ज्यादा की इनकम पर 30% टैक्स स्लैब हुआ।

    - करीब तीन करोड़ सीमांत और छोटे किसानों के लिए लोन की पूरी माफी होगी। बाकी एक करोड़ किसानों के बारे में सभी लोन के लिए एक बारगी निपटान योजना का एलान। लोन माफी के लिए कुल मूल्य 50 हजार करोड़ रुपए और एक बारगी निपटान लोन के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के अतिदेय ऋणों को राहत का अनुमान है।

    - पीडीएस और बाकी वेलफेयर स्कीम्स के तहत राशन की सब्सिडी के लिए 32,667 करोड़ रुपए का प्रावधान। प्रयोग के लिए राशन का डिस्ट्रीब्यूशन स्मार्ट कार्ड से, हरियाणा और चंडीगढ़ में शुरू किया जाना।

    बजट 2003-04: सीनियर सिटिजन को इनकम टैक्स में मिली थी 20 हजार रुपए की छूट

    - सीनियर सिटिजंस को सेक्शन 88 के तहत टैक्स में छूट 20 हजार रुपए से बढ़ाकर 1.53 लाख रुपए (पेंशन वाले सीनियर सिटिजन के मामले में स्टैंडर्ड रिबैट की वजह से 1.83 लाख रुपए) करने का एलान।

    - 40 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 48 नई रोड प्रोजेक्ट। इसमें एक चौथाई सड़कों का कंस्ट्रक्शन सीमेंट कंक्रीट से।

    - 50 लाख अतिरिक्त परिवारों को शामिल करने के लिए एक अप्रैल 2003 से अंत्योदय अन्न योजना का विस्तार करने का एलान।

    - 50 किलोग्राम बैग यूरिया 12 रुपए और डीएपी और एमओपी 10 रुपए प्रति बोरी सस्ती की गई। साथ ही मिक्स्ड फर्टीलाइजर्स की कीमत में भी बदलाव करने की बात कही गई।

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    कारोबारियों को कॉर्पोरेशन टैक्स घटने की और होम लोन लेने वालाें को इनकम टैक्स के सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ने की उम्मीद है। -सिम्बॉलिक इमेज
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