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गवर्नमेंट का फ्री सर्जरी का झूठा दावा, हॉस्पिटल में मरीजों से वसूल रहे रुपए

भास्कर स्टिंग, हॉस्पिटल में सक्रिय दलालों-डॉक्टरों का गठजोड़ कर रहा मरीजों का शोषण।

Dainik Bhaskar

Dec 20, 2017, 06:22 AM IST
डेमो फोटो। डेमो फोटो।

नई दिल्ली. गवर्नमेंट हॉस्पिटल में मरीजों के मुफ्त इलाज, जांच और सर्जरी के केजरीवाल सरकार के दावे झूठे हैं। हकीकत में डॉक्टरों और दलालों के गठजोड़ से मरीजों से खुलेआम वसूली हो रही है। जैसी मरीज की हैसियत या केस, वसूली भी वैसी ही। सर्जरी के केसों में मरीज से एक लाख रुपए तक लिया जाना सामान्य प्रैक्टिस है। ऐसे ज्यादातर मामले इंप्लांट (रॉड या अन्य इक्विपमेंट शरीर में डालना) से जुड़े होते हैं। इनकी कीमत निजी अस्पतालों में 10 लाख तक होती है।

- डॉक्टर इसी का फायदा उठा मरीजों को कम कीमत पर इलाज का लालच देते हैं। जो मरीज पैसे दे देता है उसका नंबर जल्द आ जाता है। सामान्य तौर पर स्टाफ या डॉक्टर खुद पेशेंट को दलाल का नंबर दे जाते हैं। कहा जाता है कि सर्जरी का सामान उसे ही लाना पड़ेगा।

- समय पर सर्जरी कराना है तो सामान दलाल से मंगवाओ। नेक्सस यहां तक फैला है कि अलग-अलग डॉक्टरों के दलाल भी अलग हैं। पैसे इनके माध्यम से लिए जाते हैं और बाद में इनका ‘कट’ दे दिया जाता है। यहां ये कहना जरूरी है कि सभी डॉक्टर ऐसे नहीं हैं।

डीजीएचएस से 48 घंटे में भुगतान होता है

- हेल्थ डिपार्टमेंट ने व्यवस्था कर रखी है कि सर्जरी में लगने वाले सामान और मरीज की डीटेल डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) के ऑफिस भेजकर 48 घंटे में खर्च का भुगतान लिया जा सकता है। लेकिन, अस्पताल दिखावे के लिए सिर्फ गिने-चुने मामलों में ही प्रोसेस फॉलो करते हैं। ज्यादातर में मरीजों से सामान मंगवाया जाता है ताकि वसूली का यह रैकेट फल-फूल सके।

15 लाख सर्जरी के मिले हैं, पर पेपर बाकी

एलएनजेपी हॉस्पिटल के एमएस डॉ. जेसी पासी ने बताया हमने पहले बीपीएल कार्ड होल्डर के लिए ऑर्थो सर्जरी की सर्विस फ्री थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग के नए आदेश के बाद जो लोग बीपीएल कार्ड होल्डर नहीं हैं उनकी भी सर्जरी होगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने 15 लाख दिए हैं लेकिन अभी अकाउंट से संबंधित पेपर वर्क नहीं हुआ। जिससे मरीजों को योजना और अावेदन की जानकारी नहीं है।

डीजीएचएस डॉ. भूषण से सीधी बात

-रिपोर्टर| फ्री वाले आवदेन कितने आ रहे हैं?
-डॉ. भूषण- 4-5 मरीजों की डिमांड आ रही हैं।
-रिपोर्टर- बस, क्या इतने ही ऑपरेशन हो रहे हैं?
-डॉ. भूषण- सर्जरी की संख्या इससे बहुत अधिक है।
-रिपोर्टर- मतलब बाकी सबसे पैसे लिए जा रहे हैं?
- डॉ. भूषण: मैं क्या बताऊं। जांच का विषय है।
-रिपोर्टर- डॉक्टर कहते हैं डीजीएचएस फाइल लटकाता है
- डॉ. भूषण- डिमांड भेजें, 48 घंटे में पूरी हो जाएगी।
-रिपोर्टर : आप कार्रवाई क्यों नहीं करते?
- डॉ. भूषण : मंत्री के आदेश पर ही कर सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन बोले

- रिपोर्टर| सर, मुझे आपसे एक शिकायत करनी है।
- सत्येंद्र जैन| बोलिए।
- रिपोर्टर- आपने कहा है कि सर्जरी के रुपए नहीं लगते हैं लेकिन डॉक्टर मांग रहे हैं।
- सत्येंद्र जैन| क्या इलाज होना है।
- रिपोर्टर- रॉड लगना।
- सत्येंद्र जैन| मेडिसिन इलाज सभी अस्पतालों में मुफ्त है। फिलहाल केवल चार अस्पतालों में एमएस को पावर है कि वह इंप्लांट के लिए मरीजों को मुफ्त इलाज दे सकते हैं। वहां एक रुपया भी नहीं लगेगा।
- रिपोर्टर| कहां, पर सर?
- सत्येंद्र जैन| एलएनजेपी, अंबेडकर, डीडीयू और जीबी पंत।
- रिपोर्टर| एलएनजेपी में ही रुपए मांग रहे हैं।
- सत्येंद्र जैन| यदि ऐसा है तो लिखित शिकायत दीजिए, मैं इस पर कार्रवाई करूंगा।

आर्थो डिपार्टमेंट के फैकल्टी मेंबर व असिस्टेंट प्रो. डॉ. विनोद सीनियर से सीधी बात

रिपोर्टर| सर, मेरा पेशेंट सेंट स्टीफंस अस्पताल में है। जांघ में रॉड लगानी है। वहां एक लाख 80 हजार का खर्च बता रहे हैं। मुझे कुंदन ने आपसे मिलने को कहा था। यहां कुछ हो सकता है क्या?
डॉ. विनोद| कौन पेशेंट है? क्या दिक्कत है? एक्स-रे कहां है, पहले ये बताओ?
रिपोर्टर| सर, इससे पहले भी मैं आपसे मिलने आई थी। लेकिन तब मेरे मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया था। उनके जांघों में इंप्लांट या रॉड लगा था। डॉक्टर अब उसे बदलने को कह रहे हैं। यहां आप कुछ करवा देते तो…।
डॉ. विनोद| आप जब तक मुझे मरीज नहीं दिखाओगे, कागज नहीं दोगे मैं कैसे कुछ कह सकता हूं। जो सामान लगेगा उसके लिए आपको पैसे देने होंगे।
रिपोर्टर|पर मैंने तो सुना है यहां इलाज फ्री है?
डॉ. विनोद| सामान का पैसा तो देना ही पड़ेगा।
रिपोर्टर|मरीज को लेकर आती हूं, लेकिन कुछ पता चल जाता कितना खर्च आएगा?
डॉ. विनोद|वहां से तो कम ही लगेगा।
रिपोर्टर| ठीक है सर, मैं मरीज को आपकी ओपीडी में लेकर आऊंगी।

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