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नीरव मोदी केस में बाल-बाल बचीं प्रियंका, बिपाशा और कंगना

कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल लागू होता तो इनसे भी हो सकती थी पूछताछ, बिल में भ्रामक विज्ञापन करने पर तीन साल तक के बैन का

Bhaskar News | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:33 AM IST

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    कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल लागू होता तो इनसे भी हो सकती थी पूछताछ। - फाइल

    नई दिल्ली. नीरव मोदी मामले में बॉलीवुड हीरोइन प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बसु और कंगना रनौत बाल-बाल बच गईं। अगर कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल शीतकालीन सत्र में लागू हो गया होता तो इन पर विज्ञापन से प्रतिबंध लग सकता था। यह प्रतिबंध 3 साल तक के लिए हो सकता था। बिल में ऐसा प्रावधान है।


    नीरव मोदी और मेहुल चौकसी पर कम स्तर के हीरे के आभूषण बेचने का भी आरोप लग रहा है। ऐसे में प्रियंका, बिपाशा और कंगना भी कटघरे में आ जाती। चोपड़ा नीरव ब्रांड के प्रमोशन से जुड़ी थीं तो बिपाशा और कंगना चौकसी के गीतांजलि ब्रांड के प्रमोशन से। हालांकि ये हीरोइन पंजाब नेशनल बैंक के 12000 करोड़ से अधिक के घोटाले के आरोपी नीरव और चौकसी पर उनके साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगा रही हैं।

    - कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन के संस्थापक बिजोय मिश्रा कहते हैं, जिसके बारे में आपको मालूम नहीं है, ये हीरोइन उनके हीरों को प्रमोट कर रही थीं। ये हीरे नकली निकल रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 5 मार्च से आरंभ होने वाले संसद सत्र में यह कानून आ सकता है। शीतकालीन सत्र के दौरान इस साल 5 जनवरी को लोक सभा में यह बिल पेश किया जा चुका है। पिछले तीन साल से यह बिल लटक रहा है।

    - मिश्रा ने बताया कि उपभोक्ता की खरीदारी इन सेलिब्रिटी के प्रमोशन से प्रभावित होती है। यही वजह है कि बिक्री बढ़ाने के लिए कारोबारी बड़े-बड़े सेलिब्रिटी का सहारा लेते हैं।

    - कंज्यूमर वॉयस से जुड़े अशीम सान्याल कहते हैं, भ्रामक विज्ञापन करने वालों पर विज्ञापन करने से रोक के साथ कठोर दंड का भी प्रावधान होना चाहिए था।

    - मिश्रा कहते हैं, बिल पारित होने के बाद सेलिब्रिटी विज्ञापन करने से पहले उस उत्पाद और उस ब्रांड की पूरी जानकारी लेंगे। बिल के मुताबिक भ्रामक विज्ञापन छापने पर भी 10 लाख रुपए तक का जुर्माना होगा। बिल के मुताबिक उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। भ्रामक विज्ञापन की शिकायत पर प्राधिकरण उसकी जांच करेगा। किसी भी प्रकार का फैसला देने से पहले प्राधिकरण संबंधित पार्टी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देगा।


    - जांच में विज्ञापन भ्रामक पाए जाने पर या उपभोक्ता के हित का किसी भी प्रकार से नुकसान होने की स्थिति में प्राधिकरण उस विज्ञापन को वापस लेने, उसके प्रसारण पर रोक या विज्ञापन में बदलाव का आदेश दे सकता है।

    - बिल में प्राधिकरण को भ्रामक विज्ञापन बनाने वाली कंपनी या उसे करने वाले मॉडल पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का भी अधिकार दिया गया है। यह जुर्माना 50 लाख रुपए तक जा सकता है।

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    5 मार्च से शुरू हो रहे संसद सत्र में बिल बन सकता है कानून। - फाइल
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Web Title: Bipasha Basu Kangana Ranaut And Priyanka Chopra In Nirav Modi Case
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