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किडनैपिंग के बाद लोग भड़के तो पिता बोले - सब्र करें, पुलिस ने 24 घंटे मांगे हैं

3.7 किमी के रूट में एक भी पुलिसवाला नहीं और वीआईपी इलाकों में हर सौ मीटर पर तीन-तीन सुरक्षाकर्मी तैनात रहे

Danik Bhaskar | Jan 26, 2018, 07:26 AM IST

नई दिल्ली. जीटीबी एंक्लेव में गुरुवार सुबह करीब साढ़े सात बजे करोड़पति कारोबारी के बेटे के अपहरण ने दिल्ली में आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मंडोली रोड (शिवम डेंटल क्लीनिक) से वैन में बच्चे के बैठने से लेकर घटनास्थल (रोड नंबर 64) तक की दूरी 3.7 किलोमीटर है। और इस पूरे रूट पर कहीं कोई पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। जबकि लुटियन जोन और अक्षरधाम समेत कई इलाकों में सौ-सौ मी. पर तीन-तीन पुलिसकर्मी तैनात थे। वारदात के बाद भी घटनास्थल पर केवल दो बैरिकेड सड़क किनारे पड़े मिले।


गार्ड ने बताया- पुलिस ने नहीं मांगी कोई फुटेज
मंडोली रोड से जीटी रोड तक दिलशाद गार्डन जी ब्लॉक होते हुए रोड नंबर 64 तक लगभग 6 सीसीटीवी लगे हैं, लेकिन पुलिस ने अभी एक भी कब्जे में नहीं लिया है। भास्कर ने जब घटनास्थल के सामने स्थित इहबास अस्पताल के गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड से गेट पर लगे दो सीसीटीवी फुटेज के बारे में पूछा तो उसने यह भी बताया कि बाहर लगे सीसीटीवी की रेंज 9 मीटर और अंदर लगे कैमरे की रेंज 16 मीटर है। उसने बताया कि सुबह पुलिस तो आई थी लेकिन फुटेज तो किसी ने नहीं ली है। इसी तरह बच्चे के घर के सामने एक मकान और मंडोली रोड पर लगे सीसीटीवी की फुटेज भी अभी जब्त नहीं की गई।


सिर्फ दो किमी दूर चल रहा अासियान सम्मेलन
वारदात से केवल 2 किलोमीटर की दूरी पर आसियान सम्मेलन हो रहा है और डेढ़ किलोमीटर पर दो थाने हैं। आसियान सम्मेलन के लिए 10 देशों के राष्ट्र प्रमुख मौजूद हैं। इतना ही नहीं घटनास्थल से मात्र डेढ़ किलोमीटर के दायरे में जीटीबी और मानसरोवर पार्क थाने हैं। बावजूद इसके बेखौफ बदमाश सरेआम गोली चलाकर बच्चे को बाइक पर बैठाकर फरार हो गए। रात में खुद गश्त करने का दावा करने वाली सतर्क पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां तक कि वारदात के बाद भी उस रूट पर पुलिस ने किसी भी तरह की बैरिकेडिंग या वाहनों की कोई जांच नहीं की।

इहबास के गेट पर होते हैं सिक्योरिटी गार्ड इसलिए उसकी विपरीत दिशा चुनी

सांई मंदिर से पहले तो दिलशाद गार्डन जी ब्लॉक के फ्लैट हैं और आगे रास्ता विवेक विहार अंडरपास की ओर जाता है। विपरीत दिशा में दयानंद, इहबास व फिर जीटीबी अस्पताल स्थित मेडिकल कॉलेज का गेट आता है। केवल इहबास के गेट नंबर 1 पर तो हर समय करीब 4 प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड रहते हैं। घटनास्थल पर ही रात को पुलिस बैरिकेडिंग होती है।

और पुलिस घरवालों से यही कहती रही कि आप मीडिया को कुछ न बताएं
- बच्चे के साथ मोहल्ले के कुछ बच्चे और स्कूल जाते हैं। पुलिस की एक लापरवाही इस तरफ भी उजागर हुई कि पुलिस ने न तो उन बच्चों से और न ही उनके घरवालों से कोई पूछताछ की। हर तरफ पुलिस बस घर के सामने और सड़क से भीड़ हटाने का ही प्रयास करते दिखी।

- पीड़ित परिवार के घर में लोगों का आना जाना लगातार लगा रहा। इसके बावजूद पुलिस उन्हें नहीं रोक रही थी। पुलिस ने बस परिवार को यह समझा रखा था कि वह मीडिया को कुछ भी बताने से बचें।

बदमाश कई दिन से कर रहे थे रेकी, चप्पे-चप्पे से थे वाकिफ

किडनैपरों ने घटनास्थल को इसलिए चुना क्योंकि यह सुनसान एरिया है। इसके अलावा आसपास बच निकलने के आसान रास्ते हैं। आगे विवेक विहार से रामप्रस्थ और पीछे नंदनगरी से भौपुरा होते हुए एनसीआर में निकलने के कई रास्ते हैं। बदमाश कई दिन से यहां रेकी कर रहे थे।

भास्कर ने रास्ता खंगाला, तो जाना इलाका सुनसान था और यहां से भागना भी आसान

बच्चे की किडनैपिंग की दुस्साहसिक वारदात के बाद जब भास्कर रिपोर्टर ने गली के मुहाने जहां से बच्चा स्कूल वैन में बैठा, वहां से घटनास्थल व आसपास के एरिया की रेकी की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।