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बालिग लड़के या लड़की को पसंद से शादी का हक, खाप सवाल नहीं कर सकती : SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बालिग लड़के या लड़की को अपनी इच्छा से शादी करने का अधिकार है।

Dainik Bhaskar

Jan 17, 2018, 05:12 AM IST
Can not question adult boy or girl for marriage

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बालिग लड़के या लड़की को अपनी इच्छा से शादी करने का अधिकार है। कोई व्यक्ति, खाप पंचायत या समाज सवाल नहीं उठा सकता। शीर्ष कोर्ट ने अंतरजातीय विवाह करने वाले प्रेमी जोड़ों को विभिन्न खाप पंचायतों, विशेष समाज के लोगों द्वारा दंड देने या हत्या करने संबंधी घटनाओं को लेकर यह टिप्पणी की। केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि अगर सरकार प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं बना सकती तो कोर्ट इस मामले में नियम व दिशा-निर्देश तय करेगी।

- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कोर्ट मित्र की ओर से पेश रिपोर्ट पर जवाब दो सप्ताह में देने को कहा है। इस मामले की सुनवाई 5 फरवरी को होगी।

- कोर्ट मित्र राजू रामचंद्रन ने बताया कि लॉ कमीशन ने अंतरजातीय विवाह करने वाले प्रेमी जोड़ों के लिए एक कानून बनाने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी।

केंद्र सरकार का रवैया ढीला

- इस सिफारिश पर उन्होंने राज्य सरकारों से भी सलाह ली थी, मगर केंद्र सरकार का रवैया ढीला रहा है। चीफ जस्टिस ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलीसिटर जनरल पिंकी आनंद से कहा कि उन्होंने अभी तक इस मामले में कोर्ट मित्र की ओर से दिए गए सुझावों व रिपोर्ट पर अपना जवाब क्यों नहीं दायर किया।

- यह मामला 2010 से अदालत में लंबित है। उन्हें इस पर अपना जवाब दायर करना चाहिए था। वह इस पर अपना जवाब दायर करें। अगर सरकार अपना जवाब दायर नहीं करती है तो कोर्ट स्वयं उन सुझावों के आधार पर अपना फैसला लेगी। कानून, नियम या गाइडलाइंस जारी करेगी।

एनजीओ ने कानून बनाने की मांग की
- वर्ष 2010 में एनजीओ शक्तिवाहिनी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर देशभर में खाप पंचायतों व कई अन्य समाज के लोगों द्वारा अंतरजातीय विवाह करने वाले प्रेमी जोड़ों को प्रताड़ित करने का मामला उठाया था। उनकी सुरक्षा के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों की ओर से प्रभावी कानून बनाने की मांग की थी।

- सुप्रीम कोर्ट ने उक्त मामले में वरिष्ठ वकील राजूू रामचंद्रन को कोर्ट मित्र नियुक्त किया था। उन्हें और केंद्र को इस मामले में जवाब दायर करने को कहा गया था। इस मामले में कोर्ट ने खाप पंचायतों से भी जवाब मांगा था।

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