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ये है देश का सबसे गरीब गांव, अब यहां काजू की खेती ने बदल दी लोगों की जिंदगी

1060 एकड़ क्षेत्र में ग्रामीण परिवारों ने लगाए काजू के पेड़, नवरंगपुर से संदीप राजवाड़े/ प्रवीण देवांगन की रिपोर्ट

Bhaskar News | Last Modified - Jan 22, 2018, 07:48 AM IST

ये है देश का सबसे गरीब गांव, अब यहां काजू की खेती ने बदल दी लोगों की जिंदगी

नवरंगपुर. ओडिशा के नवरंगपुर जिले का अंचला गांव। देश का सबसे गरीब इलाका है यह। पर अब यहां खुशहाली की सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है। इसकी पहली झलक हमें मिली हरि मांझी के आंगन में। आंगन मक्का की उपज से भरा हुआ है। पास ही चाचा बुदुसन मांझी के घर में भी एक कमरे में मक्का भरा है। परिवार धान की खेती भी करता है और मक्के की भी। धान से परिवार का पेट पल जाता है और मक्के से बाकी जरूरतें पूरी होती हैं। ये अलग बात है कि मक्का की कीमत पिछले कुछ सालों से बढ़ने की बजाय कम होती जा रही है। इसका हल भी निकाला है। उपज बढ़ाकर। पहले एक एकड़ में 12-15 क्विंटल मक्का होती थी, लेकिन अब नए तरीके अपनाने से 20 क्विंटल हो रही है। हरि और बुदुसन ने 35 और 40 हजार रुपए बैंक और साहूकार से लिए हैं। इन्हें विश्वास है कि सब चुक जाएगा। एक और चीज गांव के लोगों ने सीखी है। वो है काजू की खेती। खेत-दर-खेत काजू के पेड़ नजर आते हैं। हम गांव के भोला पात्रा के खेत में पहुंचे। यहां काजू की फसल तैयार हो रही है।

- भोला खुशी से बताते हैं- बाजार में 100 रुपए किलो बिक जाता है काजू। अब भागकर मजदूरी करने बाहर नहीं जाएंगे। बाहर जाओ तो बच्चों की पढ़ाई और सेहत की चिंता हमेशा रहती है। मैंने तीन साल पहले काजू के 40 पेड़ लगाए थे। अब तो सब काजू लगा रहे हैं। गांव के 21 हेक्टेयर क्षेत्र में काजू लगा है। 250 परिवारों के गांव में 100 परिवार इसकी खेती करने लगे हैं। अच्छा भी है, काजू के लिए पानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। 2-3 साल में पेड़ फल देने लगता है।

- दरअसल गांव में तीन चार साल पहले तक ऐसे हालात नहीं थे। 100 से ज्यादा परिवारों के लोग धान और मक्के की खेती के बाद जनवरी-फरवरी में हैदराबाद और चेन्नई मजदूरी के लिए जाने लगते थे।

- इन दिनों गांव खाली होने लगता था। गांव की सरपंच निलेन्द्री बत्रा बताती हैं कि पिछले कुछ सालों में बाहर जाने वालों में बहुत कमी आई है। इस साल तो 10-12 लोग ही मजदूरी के लिए चेन्नई और हैदराबाद गए हैं।

- हालांकि अंचला गांव में आज भी न तो सड़क हैं, न ही परिवहन सुविधा। 800-1000 की आबादी के अनुसार न शिक्षा है न ही स्वास्थ्य सुविधा।

- गांव के लोगों का कहना है कि कक्षा 1 से 8 वीं तक के लिए सिर्फ 4 शिक्षक हैं। 15 गांव की पंचायत होने के बाद भी सेहत सुविधा के नाम पर सिर्फ एक महिला स्वास्थ्यकर्मी है।

- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के 2 कमरों में से भी एक को तो पंचायत भवन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

- गांव के अर्जुन बत्रा और दुर्जन बताते हैं कि मनरेगा में लोग काम करते हैं, लेकिन अंगूठा कोई और लगाकर पैसा निकाल ले जाता है। इसलिए लोग गांव से बाहर या दूसरे कस्बे में रोजाना काम के लिए जाते हैं।

- ये ऐसा गांव है, जहां 20 साल से कभी मुख्यमंत्री नहीं आए। 5 साल से सांसद, विधायक के साथ कलेक्टर तक ने चेहरा नहीं दिखाया। हालात यह है कि सिर्फ 8 किमी दूर होने के बावजूद उमरकोट ब्लॉक के बीईओ भी दो साल से नहीं आ पाए हैं।

- नवरंगपुर जिले की कलेक्टर रस्मिता पंडा कहती हैं, अंचला गांव में अब पहले वाले हालात नहीं रहे हैं। मक्का और खासकर काजू की खेती से वहां के लोगों की स्थिति सुधरी है।

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Web Title: ye hai desh ka sabse garib gaaanv, ab yaha kaju ki kheti ne bdl di logon ki jindgai
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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