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मैथ में 0 पाने वाले बन गए SBI में अफसर, दिल्ली हाईकोर्ट ने एघ को सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बैंक पीओ की भर्ती प्रक्रिया में बेहद संगीन मामला उजागर हुआ है।

अमित कुमार निरंजन | Last Modified - Jan 14, 2018, 05:09 AM IST

मैथ में 0 पाने वाले बन गए SBI में अफसर, दिल्ली हाईकोर्ट ने एघ को सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश दिए

नई दिल्ली. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बैंक पीओ की भर्ती में बेहद संगीन मामला उजागर हुआ है। एसबीआई ने उन स्टूडेंट्स को भी पीओ (प्रोबेशनरी ऑफिसर) बना दिया, जिन स्टूडेंट्स के एग्जाम में मैथ्स में शून्य नंबर आए थे। इन स्टूडेंट्स ने 29 दिसंबर को बैंक पीओ ज्वाइन भी कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा मामला सोशल मीडिया से पकड़ में आया। इसके बाद पीओ की पूरी भर्ती पर सवाल उठाते हुए कुछ एग्जाम देने वालों ने दिल्ली हाईकोर्ट में पिटीशन दायर कर दी।

हाईकोर्ट का एसबीआई को डॉक्युमेंट्स पेश करने का ऑर्डर

- 8 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट ने एसबीआई को अगली सुनवाई में सभी डॉक्युमेंट्स पेश करने का आदेश दिया। इसके साथ सिलेक्टेड पीओ की वैधता कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। जबकि इसके जवाब में एसबीआई ने कहा है कि यह बैंक का विशेषाधिकार है और कटऑफ कम किया जा सकता है।

- इस एग्जाम में 2313 पीओ पोस्ट के लिए 9 लाख कैंडिडेट प्री एग्जाम में बैठे थे। दरअसल इसमें ऐसे तीन स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ है जिनके मैथ्स (डेटा इंटरप्रिटेशन एंड एनालिसिस) में जीरो नंबर आए।

- पिटिशनर्स का कहना है कि जांच होने पर ऐसे स्टूडेंट्स की संख्या और बढ़ सकती है। करीब दो दर्जन स्टूडेंट्स ने पिटीशन दायर की थी। पीओ में 0.3 से लेकर 2 नंबर से ही इन स्टूडेंट्स का पीओ में सिलेक्शन होने से रह गया।

- 6 फरवरी 2017 को एसबीआई ने ऐड निकाला जिसमें बैंक ने चारों सब्जेक्ट में मिनिमम कट ऑफ की बात कही थी। 29-30 अप्रैल और 6-7 मई को चार फेज में प्री एग्जाम हुआ। फिर 4 जून को मेन्स और 4 से 16 सितंबर तक इंटरव्यू का दौर चला। इसका स्कोरकार्ड के साथ फाइनल रिजल्ट 25 अक्टूबर को आया।

- मामला उजागर होने के बाद 27 अक्टूबर को इस संबंध में आरटीआई फाइल हुई। दो दर्जन पिटिशनर ने दिल्ली हाईकोर्ट में गुहार लगाई। 8 जनवरी की सुनवाई में हाईकोर्ट ने एसबीआई को आदेश दिया कि भर्ती से संबंधित सभी दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश करे और बैंक सभी सिलेक्टेड कैंडिडेट्स को इनफॉर्म करे कि उनकी एसबीआई पीओ की सिलेक्शन की वैधता कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को है।

एसबीआई ने आरटीआई के तहत दिया जवाब

- एसबीआई बैंक पीओ का एग्जाम आईबीपीएस करवाता है। पिटीशनर्स ने एसबीआई बैंक के ऐड नंबर CRPD/PO/2016-17/19 से संबंधित एसबीआई में आरटीआई एप्लिकेशन फाइल की। इसमें पूछा गया था कि उन सिलेक्टेड कैंडिडेट्स की संख्या बताइए जिनके किसी भी सब्जेक्ट में जीरो नंबर आए हों।

- हाईकोर्ट के निर्देश पर एसबीआई ने आरटीआई के तहत जवाब दिया कि यह थर्ड पार्टी जानकारी है, इसलिए इसका जवाब नहीं दे सकते। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश के पर ही एसबीआई में रिप्रेजेंटेशन का जवाब दिया कि यह बैंक का विशेषाधिकार है कि ज्वाइनिंग के लिए पर्याप्त कैंडिडेट मिल जाए, इसके लिए कैसे भी कट ऑफ तय कर सकती है।

क्या बोला हाईकोर्ट?

- हाईकोर्ट ने एसबीआई के जवाब पर कहा कि यह कैसी कट ऑफ है कि जिसके मैथ्स में शून्य आ रहे हैं वो सिलेक्ट हो रहे हैं और जिसके 10 नंबर हैं , उसका सिलेक्शन नहीं होता। इसे देखकर तो लगता है कि आपने कोई कटऑफ ही तय नहीं की।

- हाईकोर्ट ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि एग्जाम के बाद सिलेक्शन के नियम नहीं बदले सकते।

- वहीं पब्लिक सेक्टर जॉब के लिए मिनिमम काबिलियत वाले कैंडिडेट ही रखे जाएं। एसबीआई ने कोर्ट को लिखित में जवाब दिया था कि अगर 25% हरेक विषयों मे कट ऑफ रखा जाता तो सिर्फ 138 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हो पाता। इसलिए हमने कट ऑफ में हटाने का निर्णय लिया। हालांकि कभी भी पीओ की एग्जाम में मैथ में शून्य कटऑफ नहीं रहा है।

सोशल मीडिया से मामला हुआ उजागर

- सिलेक्टेड कैंडिडेट्स में से कुछ ने 25 अक्टूबर को अपने स्कोरकार्ड के साथ इसकी सूचना फेसबुक और पागलगाय डॉट कॉम (pagalguy.com) पर शेयर कर दी।

- पागलगाय डॉट कॉम स्टूडेंट्स के चर्चा का डिजिटल प्लेटफॉर्म है। जब इन कैंडिडेटों के स्क्रीन शॉट में लिखे रोल नंबर और स्कोर कार्ड के आधार पर इनके सभी सब्जेक्ट्स के नंबर देखे तो इनमें से तीन स्टूडेंट्स के मैथ्स में जीरो नंबर आए थे। हालांकि इन कैंडिडेट्स के सभी विषयों के कुल नंबर कट ऑफ से ज्यादा थे। लेकिन नियम के तहत सभी सब्जेक्ट्स का मिनिमम कट ऑफ तय होता है।

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