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दुनिया की 8% रिसर्च देश में, पर पेटेंट तक पहुंचती हैं महज 0.2%

13 साल से नैनो टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। नैनो टेक्नोलॉजी पर 2016 में देश में 11 हजार 66 रिसर्च पब्लिश हुई।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 04:15 AM IST

नई दिल्ली। भारत में 13 साल से नैनो टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। नैनो टेक्नोलॉजी पर 2016 में देश में 11 हजार 66 रिसर्च पब्लिश हुई। ये वर्ल्ड में कुल रिसर्च का आठ फीसदी हिस्सा है। इस मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है। मगर रिसर्च से आगे जाकर प्रोडक्ट पेटेंट कराने में हम पिछड़ रहे हैं। हालात यह है कि अमेरिकी पेटेंट दफ्तर में कुछ पेटेंट एप्लीकेशंस में भारत का हिस्सा महज 0.2 फीसदी है।

भारत सरकार नियम-कायदे बनाने की तैयारी में


- इसी फेलियोर से चिंतित भारत सरकार पहली बार डॉक्टरों और जानकारों के साथ इसके नियम-कायदे बनाने की तैयारी कर रही है।

- ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया भी इसमें शामिल होगा और सभी सुझावों के साथ एक ड्राफ्ट तैयार करेगा। इसके बाद इस पर जानकारों की फिर राय ली जाएगी।
- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार डिंडा ने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी पर देश में भले ही कितने भी रिसर्च हो जाएं मगर जब तक रेग्युलेशन नहीं होगा सब बेकार है।

- नियम-कानून न होने के कारण नैनो टेक्नोलॉजी से तैयार इक्यूपमेंट और दवा का इस्तेमाल कानूनी तौर पर नहीं किया जा सकता।

- पेटेंट के बाद भी भारत इस प्रोडक्ट को ग्लोबल लेवल पर नहीं बेच सकता है और न ही इसका प्रचार-प्रसार कर सकता है। भारत में कोई भी प्रोडक्ट बिकता है तो उसके लिए नियमों का होना जरूरी होता है।

यहां दौड़ रहे... पांच साल में हो चुके हैं 23 हजार से ज्यादा रिसर्च
यहां पिछड़ रहे... नैनो टेक्नोलॉजी पर 45% सरकारी फंडिंग घटी

450 करोड़ कम हो गया बजट

1000 करोड़ रखे 2007 में नैनो मिशन लांच के वक्त 5 साल के लिए

650

करोड़ का आवंटन किया गया 2012 में पांच साल के लिए

-रिसर्च बढ़ी

भारत तेजी से बढ़ा : पांच साल में नैनो साइंस पर देश में 23 हजार से ज्यादा रिसर्च प्रकाशित हुए
चीन-अमेरिका के बाद यह संख्या सबसे ज्यादा रही

पर यहां ठिठका...2011 में दुनिया के शीर्ष 1%रिसर्च पब्लिकेशन में में भारत के सिर्फ 16 पब्लिकेशन थे

पेटेंट की गति सुस्त

2013

में भारतीय पेटेंट ऑफिस में नैनोटेक्नोलॉजी से सबंधित पेटेंट की संख्या 300 थी

2016

के मुकाबले यह दस गुना ज्यादा रही, नैनो मिशन इनिशिएटिव इसकी वजह

0.2% ही भारत की हिस्सेदारी अमेरिकी पेटेंट ऑफिस में कुल पेटेंट एप्लीकेशन में

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी को लेकर देश में अभी कोई नियम नहीं है। एम्स फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी डिपार्टमेंट, इंडियन सोसायटी ऑफ नैनो मेडिसिन मिलकर दिशा-निर्देश तैयार कर रहे हैं। कोशिश है कि भारत में नैनो टेक्नोलॉजी को लेकर जल्द नियम बनें। ताकि इस इर्मजिंग टेक्नोलॉजी का लाभ देश को मिल सके।