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पांच साल में डीटीसी बसों में घट गए 17 लाख यात्री, सड़क पर बढ़ गए 16 लाख दोपहिया

अगर बसें नहीं खरीदीं तो 2025 तक डीटीसी के बेड़े में एक भी नहीं बचेगी।

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2017, 08:14 AM IST
DTC buses reduced by 17 lakh passengers in five years delhi

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल का पांच महीने में दो बार किराया बढ़ने से यात्री घटे तो डीटीसी में 2009 से बिना किराया बढ़ाए बस चलाने के बावजूद 2012-13 से पांच साल में 17 लाख यात्री (35 फीसदी) घट गए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण घटती बसों की संख्या, बस की सवारी के लिए 75 फीसदी रूट पर 15 मिनट से ज्यादा का इंतजार, समय पर ना पहुंचने का डर और बस में सीट ना मिलना है।

कर्मियों के लिए प्रोत्साहन स्कीम की सिफािरश


- सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (सीएसई) ने दिल्ली में डीटीसी के प्रदर्शन को एनालाइज करके बताया कि डीटीसी के खराब प्रदर्शन के कारण यात्री घट रहे हैं। 2011-12 में बेड़े में अंतिम बार 25 एसी और 7 नॉन एसी बसें जुड़ी थीं। इसके बाद डीटीसी में एक भी बस नहीं खरीदी गई।

- यही हालत रही तो साल 2025 तक डीटीसी बेड़े में एक भी बस नहीं बचेगी। डीटीसी संचालन में सुधार के लिए सीएसई ने सिफारिश दी है कि बसों की लेन सुरक्षित करेंे, प्रयोगात्मक तरीके से रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के साथ एग्रीगेटर लाएं और प्रदर्शन का बेंचमार्क तय कर कर्मियों के लिए प्रोत्साहन स्कीम चलाएं।

यह है मास्टर प्लान
मास्टर प्लान 2021 का हवाला देकर बताया गया है कि 2020 तक ट्रांसपोर्ट ट्रिप में 80 फीसदी भागीदारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की होनी चाहिए। लेकिन यह भागीदारी बसों से 70 फीसदी पूरी नहीं हुई तो लक्ष्य के नजदीक भी नहीं पहुंच पाएंगे।
घाटे का सबसे बड़ा कारण लोन
डीटीसी के घाटे के पीछे सरकार से लिया गया लोन सबसे बड़ा कारण बताया है। रिपोर्ट में कहा है कि लोन के बदले 100 रुपए प्रतिकिमी ब्याज चुकाना पड़ता है और 80 रुपए संचालन में खर्च आता है। जबकि सभी संसाधनों से 40 रुपए ही डीटीसी जुटा पाती है।
ऐसे सुधरेंगे हालात
- सीएसई ने बताया कि बसों को एग्रीगेटर सिस्टम में चलाएं तो 42 फीसदी टू व्हीलर यूजर और 15% कार यूजर बस में चल सकते हैं।
- मेट्रो के 30% यात्री भी सीट उपलब्धता और प्वाइंट टू प्वाइंट सर्विस के लिए एग्रीगेटर वाली बसों में शिफ्ट होने को तैयार हैं।

जयपुर की कुल बसों के बराबर बसें तो खड़ी ही रहती हैं

- रिपोर्ट में कहा गया है कि जयपुर में बसों की जितनी संख्या है, उससे ज्यादा 700 बसें रोजाना या तो सर्विस में नहीं उतरती हैं या ब्रेकडाउन हो जाता है। क्लस्टर बसों की सर्विस डीटीसी से अच्छी है लेकिन उसमें बसों की संख्या अभी बहुत कम है।

अगर बसें बढ़ें तो जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आए
- कार्यकारी निदेशक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट (सीएसई) अनुमिता राय चौधरी ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन की मांग और प्रदूषण बढ़ रहा है, जबकि बसें कम हो रही हैं। डीटीसी की हालत सुधारने के लिए अगर तत्काल कदम न उठाए गए तो प्रदूषण खतरनाक हो जाएगा। निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ने से जाम भी बढ़ेगा।

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