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ई-वे बिल लागू, उद्यमी बोले- वेबसाइट हैंग हुई तो होगा 100 करोड़ का नुकसान

विभाग का दावा|वेबसाइट पर नहीं पड़ेगा अधिक लोड, इस बार सर्वर तकनीकी रूप से मजबूत

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 07:04 AM IST
एक दिन में 700 ट्रक माल जाता है बा एक दिन में 700 ट्रक माल जाता है बा

फरीदाबाद. जिले में रविवार से लागू होने वाले ई-वे बिल को लेकर उद्यमियों की सांसें अटकी हुई हैं, क्योंकि पिछली बार ई-वे बिल को लेकर अनुभव काफी कड़वा रहा था। जीएसटी पोर्टल हैंग होने से एक ही दिन में इंडस्ट्री को 70 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। फार्मल नोटिफिकेशन जारी न होने से उद्यमी उलझन में है। उद्यमियों का कहना है कोई भी प्रशासनिक नियम लागू होने से पहले फार्मल नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। जो सरकार की ओर से अभी तक जारी नहीं किया गया।

- उद्यमियों के अनुसार वेबसाइट हैंग होने की स्थिति में एक ही दिन में 100 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं इस बार सेल्स टैक्स विभाग का कहना है कि सर्वर में तकनीकी रूप से कोई परेशानी नहीं आएगी, क्योंकि बिल को पूरे देश में अलग-अलग चरणों में लागू किया जा रहा है। इससे वेबसाइट पर अधिक लोड नहीं पड़ेगा।


ट्रांसपोर्टर भी ई-वे बिल को लेकर परेशान
कंपनियों के साथ ट्रांसपोर्टर भी ई-वे बिल को लेकर परेशान नजर आ रहे हैं। जिला ट्रांसपोर्ट यूनियन के अनुसार जिले से एक दिन में अलग-अलग कंपनियों से 700 ट्रक माल लेकर बाहर जाते हैं। एक ट्रक का खर्च प्रतिदिन चार हजार रुपए होता है। वेबसाइट हैंग होने की स्थिति में कंपनी ट्रांसपोर्ट का भुगतान नहीं करती। कंपनियों का तर्क होता है कि बिना ई-वे बिल के वह अपना माल स्टेट से बाहर नहीं भेज सकतीं। पिछले बार ट्रांसपोर्टस को ई-वे बिल जनरेट नहीं होने के कारण 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ था।

ई-वे बिल पर लोहा व टेक्सटाइल इंडस्ट्री में अधिक संशय
ई-वे बिल को लेकर सबसे अधिक संशय लोहा और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बना हुआ है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने बिल को पहले विरोध भी जताया था। डीएलएफ टेक्सटाइल इंडस्ट्री के प्रधान जेपी मल्होत्रा के अनुसार जिले में दो हजार के करीब टेक्सटाइल इंडस्ट्री हैं। एक इंडस्ट्री का प्रतिदिन 50 से 60 लाख रुपए का माल दूसरे राज्यों में जाता है। उनके अनुसार बिल जनरेट करने के दौरान ही व्यावहारिक परेशानी सामने आ पाएगी। अभी बिल को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। वहीं आयरन एंड स्टील ट्रेडर्स के अनुसार एकदम से बिल लागू करने से पहले इसे ट्रायल के तौर पर लागू करना चाहिए था। पिछली बार लोहा मंडी का 10 करोड़ रुपए का 1500 टन माल वेबसाइट हैंग होने के कारण अटक गया था।

बेवजह माल रोककर परेशान नहीं कर सकेंगे अधिकारी
अभी स्थिति यह थी कि कारोबारी अपने माल की कन्साइनमेंट राज्य के भीतर या राज्य से बाहर भेजता है तो कई बार केंद्रीय और राज्य सरकारों के सेल्स टैक्स, एक्साइज टैक्स के अफसर और इंसपेक्टर उन्हें रोक लेते थे। इस प्रणाली के लागू होने के बाद यदि अफसर ने माल लदे वाहन को आधे घंटे से ज्यादा रोका तो उसे अपनी कार्रवाई के बारे में जानकारी देनी होगी। अफसर को ऑनलाइन डिटेंशन ऑर्डर देकर बताना होगा कि उसने संबंधी कन्साइनमेंट क्यों रोका। उसके बाद उसने कौन से दस्तावेज चेक किए। कब तक अपनी तफ्तीश जारी रखी। उस तफ्तीश का नतीजा क्या निकला।

क्या है ई-वे बिल

जीएसटी लागू होने के बाद 50 हजार रुपए या ज्यादा के माल को एक राज्य से दूसरे राज्य या राज्य के अंदर 10 किलोमीटर या अधिक दूरी तक ले जाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक परमिट की जरूरत होगी। इस इलेक्ट्रॉनिक बिल को ही ई वे बिल कहते हैं, जो जीएसटीएन नेटवर्क के अंतर्गत आता है।

ई-वे बिल को लेकर पिछले बार सबसे अधिक नुकसान लोहा कारोबार को हुआ था। हालांकि इस बार बिल जनरेट करने के दौरान भी पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। सरकार को पहले वैकल्पिक तौर पर इसे लागू करना चाहिए था।
-अरुण गुप्ता, सचिव, आयरन एंड स्टील टेंडर्स


50 किलोमीटर के दायरे को लेकर सबसे अधिक उलझन बनी हुई है। नए संशोधन में बिल्कुल भी साफ नहीं किया गया है कि 50 किलोमीटर किस दायरे से नापा जाएगा। बिल को लेकर अभी कुछ कहना काफी जल्दबाजी होगी।
-रविभूषण खत्री, अध्यक्ष, जिला लघु उद्योग भारती


ई-वे बिल को लेकर अब इंडस्ट्री को किसी तरह की परेशानी नहीं है। यह बिल सरकार ने पारदर्शिता बरतने के लिए लागू किया है। इस बार जीएसटी पोर्टल की वेबसाइट को पहले से तकनीकी रूप से मजबूत किया गया है।
-विजय यादव, ईडीसी, सेल्स टैक्स विभाग

हमें कम ही उम्मीद है कि ई-वे बिल की प्रक्रिया सफल रूप से लागू हो पाएगी। पिछली बार ई-वे बिल जनरेट नहीं होने से 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। मंदी के दौर में ट्रांसपोर्टर के लिए इतना नुकसान झेलना मुश्किल होता है।
-सुरेश शर्मा, प्रधान, ट्रांसपोर्ट यूनियन