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जिसे पाने के लिए जमाने से लड़ा, उसी रिलेशन का ऐसे किया THE END

पूर्व टीवी एंकर और सीरियल निर्माता सुहैब इल्यासी को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 17 साल पत्नी के हत्या केस में सजा सुनाई।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 05:23 AM IST
पूर्व टीवी एंकर और सीरियल निर्माता सुहैब इल्यासी को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने पत्नी के हत्या केस में सजा सुनाई। पूर्व टीवी एंकर और सीरियल निर्माता सुहैब इल्यासी को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने पत्नी के हत्या केस में सजा सुनाई।

नई दिल्ली. टीवी एंकर और सीरियल प्रोड्यूसर सुहैब इल्यासी को दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 17 साल पहले पत्नी अंजू की मर्डर के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 2 लाख रुपए का जुर्माना और 10 लाख रु. का हर्जाना लगाया। हर्जाने की रकम अंजू के फैमिली मैंबर्स को दी जाएगी। जुर्माना न देने पर सुहैब को छह माह और जेल में रहना पड़ेगा।इससे पहले सजा पर बहस के दौरान सरकारी वकील ने सुहैब इल्यासी को फांसी की सजा देने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दोषी का अपराध रेयरेस्ट ऑफ द रेयर श्रेणी का नहीं है।

ऐसे आया नया मोड़

- अंजू की मौत के बाद उनकी बड़ी बहन रश्मि कनाडा से भारत आईं। अंजू ने रश्मि से ही आखिरी बार बात की थी। अंजू ने रश्मि को सुहैब की हरकतों के बारे में सबकुछ बताया था। उन्होंने यह भी बताया कि सुहैब दहेज के लिए अंजू पर दबाव बनाता था।

- रश्मि के बयान ने इस पूरे केस को पलटकर रख दिया। रश्मि ने पुलिस को एक डायरी भी दी। उसमें अंजू ने बहुत कुछ लिखा था। इसके बाद आत्महत्या की थ्योरी संदेह के घेरे में आ गई।

यह था टर्निंग प्वाइंट

- 9 अप्रैल 2001 में एलबीएस अस्पताल ने दूसरी पीएम रिपोर्ट फाइल की। पहले मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉ. एलसी गुप्ता को गलत व्यवहार के लिए हटा देने की बात कही। डीसीपी राजीव रंजन ने नए मेडिकल बोर्ड की सिफारिश की 2014 में जब तीसरे मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट दी तो केस ने नई दिशा ले ली।

- रिपोर्ट में बताया गया कि चाकू पर अंजू व सुहैब किसी के फिंगर प्रिंट के निशान नहीं थे, जांच में बेडरूम, घर की नालियों, बाथरूम में खून के सैंपल मिले।

इसलिए माना दोषी: खुदकुशी में कैंची के दाे वार न होते

-घटनास्थल के साथ छेड़छाड़।
-बताया गया कि दो चाकू थे जिससे अंजू ने खुद को मारा।
-अंजू डिप्रेशन में थी लेकिन पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए गए।
-बार-बार बयान बदलना।
-वारदात के बाद बच्ची आलिया से किसी ने बात नहीं की, बाद में उसने बताया था कि डॉली मौसी का कनाडा से फोन आया था।
-अंजू के कपड़ों पर कोई कट मार्क क्यों नहीं था।
-खून बेड, बाथरूम, सिंक, नालियों तक कैसे पहुंचा।
-रिवाल्वर अलमारी में कैसे पहुंची।
-यह बात झूठी निकली कि, बाथरूम में फैला खून मासिक धर्म की वजह से था।
-सुहैब ने अंजू को रोकने का प्रयास नहीं किया, सुहैब ने कहा था कि उसने अंजू से रिवाल्वर छीन ली थी।
-सुहैब के पीएसओ दिल्ली पुलिस के हवलदार शत्रुघ्न ने पुलिस को मामले की सूचना नहीं दी, जबकि हवलदार के पास वायरलेस था।
-अंजू को पहले घर के पास विरमानी अस्पताल ले जाया गया, जहां से एम्स का रास्ता 20 मिनट था लेकिन 45 मिनट में पहुंचे।

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जामिया में लव स्टोरी

- सुहैब और अंजू 1989 में जामिया मिलिया इस्लामिया में एक साथ पढ़े थे। वहीं से दोनों के बीच प्यार हुआ था। अंजू के घर वालों ने इस रिश्ते का विरोध किया था। इसके बाद दोनों लंदन चले गए, जहां 1993 में शादी कर ली और बाद में दिल्ली आ गए थे। 

लंदन में शादी

- अंजू के घर वालों ने इस रिलेशन का विरोध किया। दोनों ने लंदन जाकर 1993 में शादी कर ली। दोनों का निकाह भी हुआ और अंजू ने नया नाम अफसान रख लिया। वे अक्टूबर 1994 तक लंदन में ही रहे थे।भारत लौटने पर साथ रहने से किया इंकार, अंजू भाई के पास लंदन चली गई।

बेटी का जन्म

- अप्रैल 1994 में सुहैब लंदन गए और एक महीने बाद दोनों भारत लौटे। साल 1995 में अंजू ने बेटी आलिया को जन्म दिया।

क्राइम शो शुरू किया

- अंजू फिर लंदन चली गई। बाद में सुहैब भी चला गया। वहां सुहैब ने क्राइम शो के बारे में सोचा। इसका नाम इंडियाज मोस्ट वांटेंड रखा गया। शुरू में इसके कुछ पायलट एपिसोड्स में अंजू ने एंकरिंग की थी। 1998 में शो शुरू हुआ।

डेढ़ करोड़ का फ्लैट खरीदा

- अंजू फरवरी 1999 को भारत लौटीं और उन्होंने ईस्ट दिल्ली के मयूर विहार में एक फ्लैट खरीदा। तब फ्लैट की कीमत डेढ़ करोड़ थी। दिसंबर में अंजू और सुहैब इस फ्लैट में शिफ्ट हो गए।

और अंजू की मौत

- 11 जनवरी 2000 मयूर विहार फेज-1 स्थित आईएफएस अपार्टमेंट से अंजू (30) को एम्स ले गया। डॉक्टरों ने मृत घोषित बताया। सुहैब ने अंजू के नशीला पदार्थ खाने फिर नुकीली चीज लगने की बात कही।

बहन बोली- यह मर्डर है

- पुलिस ने जांच की। पीएम के लिए 3 डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाया गया।
- 16 मार्च 2000 को अंजू की बहन रश्मि सिंह कनाडा से आई तो उसने पुलिस को बहन की हत्या का आरोप लगाया।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ये प्वाइंट बने अहम

 

 

 

 

- अंजू की हत्या में कैंची का प्रयोग किया गया था और इससे कई बार अंजू के पेट में वार किए गए थे। हालांकि जो सूट अंजू ने पहना था उस पर कैंची का कट नहीं था।
- पोस्टमार्टम करने वाले तीन डॉक्टरों में से एक डॉक्टर ने भी हत्या का शक जताया था।
- इसके बाद पांच डॉक्टरों का एक और पैनल बनाया गया। उन डॉक्टरों ने अंजू की मौत पर हत्या का शक जता दिया।
- अंजू की मौत 10 बजकर 45 मिनट पर हुई थी, जबकि सुहैब उसे 12 बजकर 26 मिनट पर एम्स लेकर पहुंचा था।
- बाथरूम में खून के निशान मिले थे।
 -जांच में यह बात भी सामने आई कि दोनों में अक्सर झगड़ा होता रहता था और दोनों के रिश्तों में खटास आ गई थी।
- इन सभी सबूतों को पुलिस ने कोर्ट के सामने रखा और कोर्ट ने सुहैब को हत्या का दोषी करार दिया।

 

कनाडा पहुंची तकरार

- 1998 में ही अंजू सुहैब को फिर छोड़कर बहन के पास कनाडा चली गईं। इलियासी अक्टूबर 1998 में कनाडा गए और अंजू को मनाकर वापस ले आए।

तीन अपील खारिज 

- 12 जुलाई 2005 को फिर जांच की मांग, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
- 2006 में परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील की,  यह इसलिए रद्द कर दी कि मामले में पहले से चार्जशीट दायर है।  
- जनवरी 2007 व अगस्त 2010 में लोअर कोर्ट में हत्या की धारा जोड़ने की दो अर्जी लगाई जो खारिज हो गई।

 

हाईकोर्ट से राहत

- 19 अगस्त 2010 को हत्या की धारा जोड़ने का आग्रह किया। 12 अगस्त 2014 में हत्या की धाराओं में ट्रायल का आदेश दिया। सुहैब ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। खारिज कर दिया गया।  

पुलिस की गलती 

- डीसीपी ने 27 मार्च 2000 को उस वक्त एसीपी ऑपरेशन को जांच सौंपी। इसके बाद सुहैब को गिरफ्तार कर मामले में चार्जशीट दायर हुई।  
- 29 मार्च 2003 ट्रायल चलने पर सेशन कोर्ट ने सुहैब पर दहेज हत्या व दहेज प्रताड़ना में आरोप तय कर दिए।

-17 जुलाई 2003 में सरकारी वकील ने कोर्ट में सुहैब पर हत्या की धारा 302 लगाने का आग्रह किया। जिसे 3 फरवरी 2004 कोर्ट ने खारिज कर दिया।