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आधार कार्ड न होने से परेशानी बढ़ी, हवेली से फ्लैट में शिफ्ट हुए मिर्जा गालिब !

कॉमेडी नाटक में गालिब ने आज की दिल्ली में फिट होने के लिए किए कई जतन

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 04:57 AM IST
Ghalib in the comedy drama

नई दिल्ली. गालिब की गजलें आज के दौर में भी फिट हैं। लेकिन क्या टोपी लगाए, अचकन पहने गालिब भी आज के दौर में फिट हो पाएंगे। सवाल अटपटा है न... ऐसी ही मजेदार और अटपटी कल्पना पर आधारित है नाटक ‘गालिब इन न्यू डेल्ही’। रविवार को श्रीराम सेंटर में हुए इस नाटक में गालिब के अचानक इस समय में आने पर हुईं मजेदार घटनाओं को पिरोया गया। गालिब नई दिल्ली को देख हैरान हैं फिर अपनी ही हवेली से बेघर हो जाते हैं। आधार कार्ड न होने से परेशान गालिब मजबूरन किराए के वन बीएचके फ्लैट में रहते हैं।

भोजपुरी, उर्दू और पंजाबी का मिक्स मजा

अब कहां गालिब की वो जुबां उर्दू शेर ओ शायरी वाली और उनका रूम-मेड बिहारी। इतना ही नहीं मकान मालकिन पंजाबी। ऐसी सिचुएशन में फंसे गालिब को देखकर ठहाके लगना तो तय था। यह संवाद दर्शकों ने जमकर एंजॉय किए।

टीशर्ट और क्लीन शेव में मियां गालिब
कहानी में गालिब कई जगह चोट खाने के बाद इस चीज को समझ लेते हैं कि अगर आज के दौर में रहना है तो इस माहौल के हिसाब से अपडेट होना होगा। बस फिर क्या अपनी शेरवानी छोड़कर टीशर्ट और क्लीन शेव भी करवा लेते हैं। शोभा डे से अपनी जीवनी अंग्रेजी में लिखवाते हैं। मेकओवर करवाने के बाद ये जान लेते हैं कि अब हवेली में भला कौन रहेगा। वो डीएलएफ में एक फ्लैट लेते हैं और अपनी बाकी की जिंदगी उस फ्लैट में मजे से काट लेते हैं। इस कॉमेडी नाटक में स्क्रिप्ट राइटिंग, डायरेक्शन और गालिब का किरदार एसएस आलम ने निभाया।

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