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हम चाहें तो बसें मुहैया न कराने वालों को जेल भेज सकते हैं, लेकिन अभी लोगों को बसों की जरूरत है- हाईकोर्ट

राजधानी में पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन न होने संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई है।

Bhaskar news | Last Modified - Dec 14, 2017, 05:33 AM IST

  • हम चाहें तो बसें मुहैया न कराने वालों को जेल भेज सकते हैं, लेकिन अभी लोगों को बसों की जरूरत है- हाईकोर्ट
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    दिल्ली.दिव्यांग लोगों के लिए राजधानी में पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन न होने संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि हम चाहें तो संबंधित अधिकारियों को 19 साल पूर्व सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक ट्रांसपोर्टेशन में लोगों को अधिक बसें मुहैया कराने संबंधी ऑर्डर का अनुपालन न करने पर कोर्ट की अवमानना में जेल में भेज सकते हैं। लेकिन इस समय लोगों को बसों की जरूरत है न कि अधिकारियों को जेल भेजने की।

    पिटिशनर ने सरकार द्वारा 300 करोड़ में 2 हजार स्टैंडर्ड फ्लोर बसें लेने का किया विरोध


    - कोर्ट ने सरकार को पिछले 10 सालों के बीच पर्याप्त संख्या में बसें न खरीदने पर कहा कि आप यह कहते हैं कि कई कंपनियों द्वारा आपको दी जा रही बसों की कीमत सही नहीं है, वह बहुत ज्यादा है।

    - कोर्ट ने सरकार से कहा कि आप यह जान लीजिए स्टैंडर्ड बसों को लो फ्लोर बसों से तुलना करना संतरे व सेब के दाम की तुलना करने जैसा नहीं है।

    - पेश मामले में एक दिव्यांग ने पिटिशन फाइल की है। याची ने सरकार द्वारा 300 करोड़ में 2 हजार स्टैंडर्ड फ्लोर बसें लेने का विरोध किया है।

    - पिटिशनर का तर्क है दिव्यांगों के लिए लो फ्लोर बसें ली जाएं। दिव्यांगों के लिए ऐसी बसों का इंतजाम हो जिससे उन्हें उनमें चढ़ने-उतरने में दिक्कत न हो।

    - सरकार दिव्यांगों के लिए पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक परिवहन का इंतजाम करने में नाकाम रही है।

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