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देश के टॉप-10 थानों में शुमार है ये थाना, अंदर दिखती है हरियाली, सुनाई देती हैं देशभक्ति धुनें

गृह मंत्रालय ने देश के टॉप-10 थानों की लिस्ट जारी की है, जिसमें दिल्ली का कीर्तिनगर थाना 10वें नंबर के साथ शुमार है।

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2018, 05:51 AM IST
home Ministry released a list of top 10 police stations in country

नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने देश के टॉप-10 थानों की लिस्ट जारी की है, जिसमें दिल्ली का कीर्तिनगर थाना 10वें नंबर के साथ शुमार है। राजधानी के 163 थानों में इसे ही क्यों चुना गया, ये जानने के लिए भास्कर इस थाने में पहुंचा। थाने का नाम सुनते ही जहन में जो तस्वीर उभरती है, यह उससे ठीक उलट है। एंट्री करते ही चारों तरफ हरियाली, सफाई ऐसी जैसे कोई कॉरपोरेट ऑफिस हो, अंदर चाइल्ड फ्रेंडली रूम, वाई-फाई, क्लासरूम, कैंटीन, हर जगह नीले रंग के पर्दे और केस प्रॉपर्टी के लिए बाकायदा बारकोड जैसी चीजें इसे बाकी थानों से बिल्कुल अलग बनाती हैं। यहां सुबह से रात तक देशभक्ति गाने बजते हैं। बाकी थानों में जिस जगह खराब वाहन खड़े रहते हैं, यहां उस जगह को कॉरिडाेर में तब्दील कर खूबसूरत बनाया गया है। इसके अलावा इसे देश का पहला ऐसा थाना बनाने की भी कवायद चल रही है, जिसका बिजली बिल शून्य हो। आइए, आपको इस थाने के अंदर ले चलते हैं...

चाइल्ड फ्रेंडली रूम : छोटे बच्चों से यहीं खिलौने के बीच होती पूछताछ

चाइल्ड फ्रेंडली रूम में बच्चों के लिए कई खिलौने हैं। मकसद है- अपराध करने वालों से लेकर पीड़ित बच्चों को थाने से अलग माहौल देना। अपराध का शिकार हुए छोटे बच्चों को बातचीत करने के लिए यहीं बिठाया जाता है। जहां सादी वर्दी में पुलिसकर्मी खेल के दौरान बच्चों से पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी लेते हैं। इस थाने के पीछे ही पश्चिम जिले की वूमेन सेल है, जहां बड़ी संख्या में दंपति के बीच होने वाले विवाद के मामले आते हैं। माता-पिता के साथ आने वाले बच्चों को इसी रूम में रखा जाता है।

हरियाली : साफ-सफाई ऐसी है कि कॉरपोरेट ऑफिस भी पीछे छोड़ दिए

पुलिस स्टेशन परिसर में प्रवेश करने से लेकर अंदर तक जगह-जगह लगे पेड़ पौधे थाने की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। कतार से बड़ी संख्या में गमले लगाए गए हैं। हरित पट्टी का नाम देते हुए दीवार के सहारे बनायी गई विशेष जगह पर लाइटिंग की भी पूरी व्यवस्था है। वहीं, दूसरी ओर साफ-सफाई के मामले में भी इस थाने का कोई जवाब नहीं। धूम्रपान निषेध है जैसे स्लोगन थाने की दीवार पर लिखवाए गए हैं।

कैंटीन : हर किसी के लिए 5 रु. में चाय और 7 रु. में कॉफी

यहां कैंटीन सिर्फ पुलिस के लिए नहीं बल्कि हर किसी के लिए है। पांच रुपये की चाय, सात रुपये की कॉफी से लेकर बिस्कुट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, बर्गर, परांठा आदि सबकुछ मिलता है। कोई भी बाहर से आने वाला आदमी यहां बैठकर खा पी सकता है। दो पार्टी के बीच होने वाला झगड़ा अब पुलिस और बुजुर्ग लोगों की वजह से कई बार इसी कैफेटेरिया में चाय के बीच सुलझा दिया जाता है। कैफेटेरिया संचालक ने जहां कम दाम पर खानपान की व्यवस्था कर रखी है, वहीं इस आमदनी से ही हर माह दस हजार रुपये दिल्ली पुलिस के शहीदी फंड में भी कंट्रीब्यूट किए जा रहे हैं।

हाईटेक थाना...क्योंकि ये इतना सुरक्षित है कि आग भी लग जाए तो रिकॉर्ड सेफ रहेंगे

देशभक्ति धुनें ही बजती रहती हैं
साल 1986 में बना कीर्तिनगर थाना फिलहाल वेस्ट डिस्ट्रिक के अंतर्गत आता है। तीन मंजिला इस थाने में कुल आठ स्पीकर लगे हैं। जहां सुबह से रात तक धीमी आवाज में देशभक्ति गानों की धुनें बजाई जाती हैं। ये धुनें पुलिसकर्मियों के साथ यहां आने वालों भी जोश से भर देती हैं।

सभी के लिए वाई-फाई सुविधा
एक तरफ राजधानी के मुंडका थाने में लैंडलाइन की सुविधा तक नहीं है, वहीं कीर्तिनगर वाई-फाई से लैस है। पुलिस महकमे ने कर्मियों के लिए इंटरनेट सुविधा दी है। यहां के एसएचओ ने दो-तीन राउटर का बंदोबस्त कर आम लोगों को भी सुविधा मुहैया कराई है।

यहां मिनटों में मिल जाती है फाइल
इस थाने से जुड़ी हर केस प्रॉपर्टी का सॉफ्टवेयर की सहायता से बारकोड जनरेट किया गया है। इसका फायदा यह है अगर यहां आगजनी की कोई बड़ी घटना भी हो जाए तो रिकॉर्ड नष्ट नहीं होगा। जब से थाना बना है, तब से अब तक की सभी केस प्रॉपर्टी का पूरा रिकॉर्ड अपडेटेड है।

सोलर प्लांट : बिजली बिल जीरो
अभी थाने में औसतन सवा लाख रुपये बिजली का बिल आता है। स्थानीय थानाध्यक्ष अनिल शर्मा अनिल शर्मा बताते हैं कि एक सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनी से संपर्क साध उनसे बातचीत की। कंपनी की ओर से उन्हें बताया गया कि सोलर प्लांट लगाने का खर्च बारह लाख रुपये आएगा। इस प्लांट की लाइफ 25 साल होगी।

कंप्यूटर क्लास : स्लम एरिया के नौजवान लेते हैं ट्रेनिंग

कीर्तिनगर की साढ़े पांच लाख की आबादी में दो लाख लोग स्लम एरिया में रहते हैं। यहां रहने वाले नौजवानों के बीच पहुंचकर पुलिस ने उनमें विश्वास पैदा किया। नतीजा, पिछले साल 18 से 35 तक की उम्र के दसवीं तक पढ़ाई कर चुके युवक-युवतियों को ढूंढा गया और उन्हें यहां थाने में क्लास में कंप्यूटर और हॉस्पिटेलिटी जैसे पाठ्यक्रम करवाकर उन्हें बेहतर जीवन जीने का तरीका सिखाया गया। इसतरह न केवल ये क्राइम के रास्ते पर जाने से बच रहे हैं बल्कि एक अच्छी जिंदगी की ओर बढ़ रहे हैं।

14 सीसीटीवी कैमरे : एसएचओ खुद अपनी टेबल से करते हैं निगरानी

पुलिस थाने की पूरी इमारत सीसीटीवी कैमरे से लैस है। प्रवेश द्वार, स्वागत कक्ष, जांच अधिकारी के कमरे से लेकर लॉकअप और कॉरिडोर को इन कैमरों की मदद से एक जगह पर बैठकर देखा जा सकता है। खुद एसएचओ अपनी टेबल पर लगे सिस्टम को देख इन सभी जगहों की निगरानी एक साथ कर सकते हैं। जहां भी कोई गड़बड़ी दिखती है वे खुद उसे दूर करने के लिए जुट जाते हैं। इस थाने को मेंटेन करने में उनकी बड़ी भूमिका है।

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