Hindi News »Union Territory »New Delhi »News» Hookworm Find Out By Capsule Camera

कैमरे वाला कैप्सूल खिलाया तो पेट के अंदर खून चूसकर नाचता दिखा हूक वर्म

दो साल पहले गंगाराम अस्पताल में खून की कमी से संबंधित एक केस आया था। 14 साल के मरीज को खून और आयरन की कमी के कारण 50 बार

Bhaskar News | Last Modified - Jan 09, 2018, 05:18 AM IST

कैमरे वाला कैप्सूल खिलाया तो पेट के अंदर खून चूसकर नाचता दिखा हूक वर्म

नई दिल्ली.दो साल पहले गंगाराम अस्पताल में खून की कमी से संबंधित एक केस आया था। 14 साल के मरीज को खून और आयरन की कमी के कारण 50 बार कुल 22 लीटर खून चढ़ाया जा चुका था। इसके बाद भी उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। मरीज को हल्द्वानी से गंगाराम हॉस्पिटल लाया गया। यहां मरीज को हॉस्पिटल के गेस्ट्रोलॉजी विभाग रेफर कर दिया। इलाज के दौरान मरीज को कैमरे वाला एक कैप्सूल खिलाया।इसमें पता चला कि मरीज के पेट में हूक वर्म लीवर से चिपककर न केवल खून चूस रहे हैं, बल्कि नाच भी रहे हैं। इसके बाद मरीज का ट्रीटमेंट शुरू हुआ। अब वह ठीक है। यह केस अब साल 2017 में इन्फेक्शियस डिजीज एंड थेरेपी नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है।


कम हो गया था हीमोग्लोबिन
गेस्ट्रोइन्ट्रोलॉजी के हेड डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि मरीज के जितने भी टेस्ट पहले करवाए गए थे और हमारे यहां भी करवाए गए वह सब नॉर्मल थे। लेकिन मरीज का हीमोग्लोबिन इसके बावजूद केवल 5.86 ग्राम रह गया था। जबकि यह 13 से 17 ग्राम के बीच होना चाहिए था। पेट की कैमरा संबंधित बड़ी जांचें भी करवाई गई थीं। इनमें ईजीडी, कॉलोनोस्कोपी और रेडियोग्राफी स्टडी यह सब नॉर्मल था। आखिरकार हमने मरीज के पेट की जांच के लिए कैप्सूल कैमरे का इस्तेमाल किया।


चार हफ्ते में आ गया सुधार
इस कैमरे के माध्यम से जो फोटो और वीडियो सामने आए वे काफी चौंकाने वाले थे। मरीज के पेट में हूक वर्म लीवर से चिपककर खून चूसते और नाचते हुए दिखे। जबकि वह हूक वर्म जो खून नहीं चूस रहे थे वह बिल्कुल सफेद थे और लीवर की सतह में बैठे हुए थे। इसके बाद मरीज का ट्रीटमेंट शुरू किया गया और चार हफ्ते में ही मरीज की सेहत में सुधार हो गया। मरीज अब बिल्कुल ठीक है और उसका हीमोग्लोबिन बढ़कर तीन महीने में ही 11 ग्राम हो चुका है।
मरीज को थी परेशानियां
- मरीज के शरीर में आयरन और खून की कमी के साथ-साथ मल त्याग करने के दौरान खून बह रहा था।

- डाइजेस्टिव ट्रैक में भी ब्लीडिंग हो रही थी। इसके वजह से मरीज का खाना भी अच्छे से नहीं पच रहा था।

- मरीज खुद को काफी कमजोर और थका हुआ महसूस करता था। उसे बुखार और डायरिया भी था। इस केस में डॉ. प्रवीण, डॉ वरुण, डॉ. आशीष, डॉ. विकास, डॉ. नरेश और डॉ. रवि की टीम शामिल रही।

यहां जानें क्या होते हैं हूक वर्म, कैसे पनपती है बीमारी
डॉ. अनिल ने बताया कि हूक वर्म भूरे रंग केपैरासाइट्स होते हैं, जो गंदे खाने, पीने के पानी या पैरों में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

- यह मनुष्य का खून पीकर जिंदा रहते हैं। यह ज्यादातर स्मॉल इंटेस्टाइन में ही मौजूद रहते हैं। - इनका मुंह छोटे से कटिया के रूप में होता है, जिसकी मदद से यह लीवर के अंदर चिपके रहते हैं। शरीर के अंदर प्रवेश कर के मादा हूक वर्म कई अंडे देती है।

- इसकी वजह से मरीज का रोग लगातार बढ़ता ही जाता है। यह बहुत ही कॉमन बीमारी है। लेकिन इसे नजरअंदाज करने से शरीर के अंदर खून नष्ट होता है जो मरीज के लिए आगे चलकर घातक सिद्ध होता है।

12 घंटे में 70 हजार पिक्चर लेता है कैप्सूल कैमरा
- डॉ. अनिल ने बताया कि एक कैप्सूल कैमरा 12 घंटे में 70 हजार पिक्चर लेता है जबकि हर दो सेकेंड में दो पिक्चर खींचता है।

- तीस साल में उनके डिपार्टमेंट में इस तरह का दूसरा केस आया है जिसकी जांच हो पाई है। कैप्सूल से उनके डिपार्टमेंट में एंडोस्कोपी पांच साल पहले शुरू हुई थी।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Delhi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: kaimre vaalaa kaipsul khilaayaa to pet ke andr Khoon chuskar naachtaa dikhaa huk vrm
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×