Hindi News »Union Territory »New Delhi »News» How Will Indian S Accept Passive Euthanasia

इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कम नहीं होगा वेंटिलेटर का इंतजार: एक्सपर्ट्स

विशेषज्ञ बोले, कोर्ट का फैसला अच्छा मगर वेंटिलेटर के इंतजार में बैठे मरीजों को नहीं पहुंचेगा ज्यादा फायदा

पवन कुमार | Last Modified - Mar 14, 2018, 11:34 AM IST

  • इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कम नहीं होगा वेंटिलेटर का इंतजार: एक्सपर्ट्स
    +1और स्लाइड देखें
    देशभर के हॉस्पिटल्स में वेंटिलेटर वाले बेड महज 20 से 30 हजार हैं। - फाइल

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु पर हाल ही में दिए गए फैसले से ऐसे मरीजों को बमुश्किल फायदा मिल पाएगा जिन्हें वेंटिलेटर की तुरंत जरूरत होती है। देश के नामी डॉक्टर्स के मुताबिक, वेंटिलेंटर पर रखे दो से पांच फीसदी मरीजों के बारे में डॉक्टरों को पता होता है कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाते ही उनकी मौत हो जाएगी। इसके बावजूद मरीज के परिजन मेडिकल सपोर्ट हटाने के लिए राजी नहीं होते। हालांकि, कुछ डॉक्टरों का ये भी मानना है कि इस फैसले से फौरी तौर पर स्थिति न बदले, लेकिन कम से कम ऐसे केस में मरीजों के परिजन से बात करने का रास्ता तो खुला है।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया है?

    - सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कुछ शर्तों के साथ निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव युथनेसिया) और इच्छामृत्यु की वसीयत (लिविंग विल) लिखने का लोगों को अधिकार दे दिया है।

    दुर्लभ मामलों में ही देखने को मिलेगा इसका फायदा

    - मेदांता हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. नरेश त्रेहान का कहना है कि वेंटिलेटर पर रखे गए दो से पांच फीसदी मरीज ऐसे होते हैं जिनका पता होता है कि मेडिकल सपोर्ट से ही मरीज जिंदा है। जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे मरीज को सालों तक जीवित रख सकते हैं।

    - उन्होंने बताया कि भारतीय इमोशनल होते हैं, लिहाजा इच्छामृत्यु की वसीयत के बावजूद मरीज के परिजन शायद ही मेडिकल सपोर्ट हटाने के लिए तैयार हों। आखिरी वक्त में गरीब से गरीब शख्स को भी पैसे से ज्यादा चिंता मरीज की जिंदगी की होती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अच्छा है लेकिन दुर्लभ मामलों में ही इसका फायदा देखने को मिलेगा।

    कानून ने अच्छा रास्ता खोला है

    - एम्स के सीनियर डॉक्टर (जिरयाट्रिक मेडिसिन) डॉ. प्रसून चटर्जी का कहना है कि फैसले से उन मरीजों को फायदा मिलेगा जिन्हें वेंटिलेटर का इंतजार रहता है। कई बार 80 साल के शख्स को सिर्फ इसलिए वेंटिलेटर पर रखते हैं, क्योंकि कोई ऑप्शन नहीं होता, जबकि उसी वक्त 40 साल के किसी शख्स को वेंटिलेटर की ज्यादा जरूरत होती है। अभी तक हमारे पास इतने भी कानूनी अधिकार नहीं थे कि हम किसी परिजन को ये कह पाएं कि मरीज के बचने की कोई उम्मीद नहीं है इसलिए वेंटिलेटर सपोर्ट हटा लेना चाहिए। इस आदेश के बाद ऐसे केस में कम से कम बात करने का एक कानूनी रास्ता निकला है।

    डॉक्टर पर न छोड़ा जाए फैसला

    - सर गंगा राम अस्पताल के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. बीके राव का कहना है कि ब्रेन डेड डिक्लेयर करने की जो प्रॉसेस बनाई गई है वैसी ही प्रॉसेस लिविंग विल और पैसिव युथनेसिया के मामलों के लिए भी बनाई जानी चाहिए। मरीज का मेडिकल सपोर्ट हटाने का फैसला सिर्फ डॉक्टर के विवेक पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि हर डॉक्टर की राय अलग-अलग हो सकती है।

    - डॉ. राव के मुताबिक, कैंसर के मामलों में चौथी स्टेज के मरीज और फेफड़ों के गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के मामले में ऐसी स्थिति ज्यादा आती है जब लंबे वक्त तक मरीज को वेंटिलेटर के सहारे रखना पड़ता है।

    वेंटिलेटर की जरूरत, दो से तीन गुना तक ज्यादा

    - एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के महासचिव डॉ. गिरधर ज्ञानी ने बताया कि देश के बड़े अस्पतालों (100 या उससे अधिक बेड) में बिस्तरों की संख्या छह लाख है। - हॉस्पिटल में कुल बेड की संख्या का 10 फीसदी बेड आईसीयू में होने चाहिए। अगर 100 बेड का अस्पताल है तो आईसीयू में 10 बेड होने चाहिए और इन 10 में से पांच बेड पर वेंटिलेंटर की सुविधा होनी चाहिए। इस हिसाब से देखें तो देश में वेंटिलेटर वाले बेडों की संख्या करीब 30 हजार है। जबकि इस संख्या से दो से तीन गुना ज्यादा मरीजों को वेटिंलेटर की जरूरत पड़ती है।

  • इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कम नहीं होगा वेंटिलेटर का इंतजार: एक्सपर्ट्स
    +1और स्लाइड देखें
    डॉ. त्रेहान के मुताबिक, भारतीय इमोशनल होते हैं। इसलिए उनके लिए मरीज का वेंटिलेटर हटाने का फैसला करना आसान नहीं होता। -फाइल
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Delhi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: How Will Indian S Accept Passive Euthanasia
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×