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इंपोर्टेड वस्तुएं बिना बिल के बेचकर कारोबारी कर रहे GST की चोरी

30,000 करोड़ के आईजीएसटी का नहीं किया रिफंड क्लेम

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 05:54 AM IST

नई दिल्ली. जीएसटी लागू हुए अभी 9 महीने भी नहीं हुए हैं और कारोबारियों ने टैक्स चोरी का रास्ता ढूंढ लिया है। राजस्व अधिकारियों ने इंपोर्टेड चीजें बिना बिल के बेचकर टैक्स चोरी के तरीके का पता लगाया है। आयातक जीएसटी चुका कर सामान का आयात तो करते हैं, लेकिन उसकी बिक्री बिना बिल के कर रहे हैं। यह चोरी आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आई है। शनिवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर भी विचार हुआ।


- सूत्रों ने बताया कि काउंसिल ने डाटा एनालिसिस को और फोकस करने के निर्देश दिए हैं, ताकि टैक्स चोरी करने वालों की पहचान की जा सके।

-जांच में पता चला है कि 73,000 कारोबारियों ने 30,000 करोड़ रुपए का आईजीएसटी चुकाया, लेकिन उसका रिफंड क्लेम नहीं किया गया है। जब किसी वस्तु का आयात होता है तो उस पर इंटीग्रेटेड जीएसटी यानी आईजीएसटी लगता है। यह सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी के योग के बराबर होता है। रिटेलर जब वह सामान कंज्यूमर को बेचता है तो वह इस टैक्स को रिफंड के तौर पर क्लेम करता है। लेकिन लक्जरी वस्तुओं के मामलों में ऐसा नहीं हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक ज्यादा संदेह प्रॉपराइटर और पार्टनरशिप फर्मों पर है।

ऐसे हो रही टैक्स चोरी

- कुछ आयातक इंपोर्ट पर आईजीएसटी चुका रहे हैं, पर उस प्रोडक्ट पर रिफंड क्लेम नहीं किया जा रहा है। यानी सामान बिना बिल के बेचा गया।
- सरकार को आशंका है कि कंज्यूमर को वह वस्तु बिना बिल के ज्यादा दाम में बेची गई। इस तरह सरकार को वाजिब टैक्स नहीं मिल रहा है।