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किसानों की आमदनी दोगुना होना तो दूर 2 साल में रिपोर्ट ही आधी

मोदी ने 5 साल में किसानों की आय दोगुनी करने का कहा था।

Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 01:44 AM IST
देश में किसान परिवारों की संख्या देखें तो यह 9 करोड़ से अधिक है। - फाइल देश में किसान परिवारों की संख्या देखें तो यह 9 करोड़ से अधिक है। - फाइल

नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जब एक फरवरी को अपना अंतिम पूर्ण बजट पेश करेगी तो उसके फोकस में एक बार फिर से भारत की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा यानी किसान होंगे। लेकिन किसानों के लिए प्रधानमंत्री की तरफ से की गई अब तक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा यानी किसानों की आमदनी पांच साल में दोगुनी करने की योजना का कहीं अता-पता नहीं चल रहा है। प्रधानमंत्री ने फरवरी 2016 में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए प्रणाली विकसित करने की बात की थी। उसके तुरंत बाद डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी का गठन कर दिया गया।

- नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी एनआरएए के सीईओ अशोक दलवई की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में 100 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। लेकिन हाल यह है कि गठन के दो साल बीत जाने के बाद कमेटी आधी रिपोर्ट ही तैयार कर पाई है।
- कमेटी के काम पर नजर डालें तो कमेटी ने कुल 14 अध्याय में अपनी रिपोर्ट बनाने का खाका तैयार किया है। यह समाचार लिखे जाने तक कमेटी ने रिपोर्ट के आठ अध्याय तैयार कर लिए हैं।

- आय दोगुनी करने के लिए की जाने वाली सिफारिशों वाला अध्याय भी उन अध्यायों में शामिल है जो अब तक तैयार नहीं किए गए हैं।

हर किसान परिवार पर है 47000 रु. का कर्ज
- देश में किसान परिवारों की संख्या देखें तो यह 9 करोड़ से अधिक है। सरकार ने राज्यसभा को दी जानकारी में बताया कि इनमें से 52% किसान कर्ज में दबे हुए हैं।

- देश के किसान परिवारों पर औसतन प्रति परिवार 47000 रु. का कर्ज है। सबसे ज्यादा कर्ज में दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान हैं।

- आंध्र प्रदेश 93%, तेलंगाना 89%, तमिलनाडु 82%, कर्नाटक और केरल 77% किसान परिवार कर्ज में हैं। राजस्थान में 61.8%, महाराष्ट्र में 57% और मध्यप्रदेश में 45.7% कर्ज में हैं। पंजाब में 53.2% किसान कर्ज में हैं।

- इन हिस्सों को सरकारी वेबसाइट पर डाल दिया गया है ताकि किसान और अन्य संबंधित पक्ष रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकें। और सरकार को पेश किए जाने से पहले इसमें आवश्यक बदलाव किए जा सकें।

- दिलचस्प बात यह है कि गूढ़ अकादमिक विमर्श की तरह नजर आने वाली यह आधी रिपोर्ट सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही उपलब्ध है।

हर किसान परिवार पर है 47000 रु. का कर्ज। - फाइल हर किसान परिवार पर है 47000 रु. का कर्ज। - फाइल