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ये है देश की फर्स्ट लेडी ग्रैफिटी आर्टिस्ट, हिप-हॉप डांस सीखते लगा ये चस्का

काजल इन दिनों वे बर्लिन में रहती हैं लेकिन फिलहाल वे दिल्ली अपने घर आईं हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 01, 2018, 08:51 AM IST

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    काजल सिंह इंडिया की पहली ग्रैफिटी आर्टिस्ट हैं।

    नई दिल्ली. सड़क पर चलते हुए अगर दीवारों पर अलग-अलग रंग और पेंटिंग्स नजर आ जाएं तो आंखाें को सुकून मिलना लाजमी है। राजधानी में कई जगह हम राह चलते दीवारों पर बनीं बेहतरीन पेंटिंग्स देखते हैं। इसे ग्रैफिटी आर्ट कहा जाता है। इन दिनों कई कलाकार इस कला में नाम कमा चुके हैं। कला की कई खूबसूरत विधाओं में से एक ग्रैफिटी आर्ट, इन दिनों युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। दिल्ली की नांगलराया की रहने वाली काजल सिंह इंडिया की पहली ग्रैफिटी आर्टिस्ट हैं। काजल इन दिनों बर्लिन में रहती हैं, लेकिन फिलहाल वे दिल्ली अपने घर आईं हैं। काजल सिंह से डेल्ही भास्कर ने की खास बातचीत की और जाना उनकी आर्ट के बारे में।

    पेंटिंग विधा में ग्रैफिटी आर्ट ही क्यों चुना?

    मैं एक हिप हप डांसर हूं। तब मैंने हिप-हॉप के चार एलिमेंंट ब्रेक-डांस, ग्रैफिटी, डीजे, रैपिंग के बारे में पढ़ा। मैं एक-एक करके सभी एलिमेंट के बारे में पढ़ने लगी। तब सोचा कि क्यों न ग्रैफिटी आर्ट को ट्राई किया जाए। इंटरनेट पर दुनिया भर के आर्टिस्ट को देखा और कॉपी करने लगे। फिर सोशल प्लेटफॉर्म पर अपने आर्ट डालने लगे। साल 2012 में इंडो जर्मन प्रोजेक्ट का ऑफर आया। हम दोनों भाई-बहन इस प्रोजेक्ट के लिए चुने गए। बस अब दोनों इसी फील्ड में हैं।

    आपको हाल ही में राष्ट्रपति ने पहली महिला ग्रैफिटी आर्टिस्ट का अवार्ड दिया है। आप इसे कैसे देखती हैं?

    दुनिया के कई देशों में मुझे पहचान मिली है और सम्मान भी मिला है। जर्मनी में साल 2015 में अवार्ड में मिला था। साल 2017 में यूएसए की ट्रिनिटी कॉलेज ने भी सम्मानित किया है। लेकिन देश में अपनी सरकार से पहचान मिलने की अलग खुशी हैं। सरकार को इस आर्ट फार्म को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ कदम उठाने चाहिए। देश में ग्रैफिटी को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं है जबकि इस कला का इतिहास सदियों पुराना है।

    इस कला को सीखने और प्रैक्टिस करने की राह में कुछ दिक्कतें भी आईं?

    आईं भी और नहीं भी। मुझे बचपन से आर्ट की समझ रही हैं। रंगों के समावेश और थीम पर पेंट करना तो आता ही था। बस कलर कैन से पेंटिंग करना एक नया अनुभव था। लेकिन मेरे पेरेंट्स ने हमेशा साथ दिया।

    पढ़ाई पूरी नहीं हुई और आप काम में जुट गईं, अब एजुकेशन कैसे पूरी करेंगी?

    मैंने लेडी इर्विन कॉलेज से होम साइंस में ग्रेजुएशन कंपलीट किया है। मैं बर्लिन की एक कंपनी में आर्ट के क्षेत्र में ही काम करती हूं, इसलिए अब आर्ट में ही ड्रिग्री होंगी।

    इतनी कम उम्र में एक अलग आर्ट फार्म में पहचान बनाने के बाद आप क्या करना चाहती हैं?

    चूंकि इस कला के बारे में लोगों को कम पता है इसलिए हम इस आर्ट को गांव-गांव लेकर जा रहे हैं। इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जैस्टर से हमने बहुत कुछ सीखा है। हम चाहते हैं कि जिन गांवों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है वहां के लोगों को भी जाकर सिखाएं। आज इस कला को इंटरनेशनल आर्ट की पहचान मिली हुई है। बड़े- बड़े देश अब अपनी दीवारों और टूरिस्ट स्पॉट को ग्रैफिटी से सुंदर बना रहे हैं। हम भी इस कला के जरिए लोगों को कई मुद्दों पर जागरूक करते हैं। उन्हें बताते हैं कि वह किस तरह सामाज में अपना योगदान दे सकते हैं।

    क्या है ग्रैफिटी आर्ट?

    विदेश में जब स्ट्रीट डांस का चलन बढ़ा तो हिप-हॉप सबसे टाॅप पर था। जिसके एलिमेंंट ब्रेक-डांस, ग्रैफिटी, डीजे, रैपिंग थे। लोग सड़कों पर नाचते हुए आर्ट बनाते और स्ट्रीट वॉल को रंग डालते। शुरू में तो कई देशों की सरकारों ने

    आर्टिस्ट बदलता है नाम?

    ग्रैफिटी आर्ट की विशेषता यह है कि इसके सभी आर्टिस्ट अपना नाम बदल कर काम करते हैं। इसलिए काजल को इस दुनिया में डिजी-वन और उनके भाई अाकाश को कॉमेट नाम से जाना जाता है।

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    साल 2012 में काजल ने की थी ग्रैफिटी आर्ट बनाने की शुरुआत।
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    दुनिया के कई देशों में काजल को सम्मान मिल चुका है।
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    20 जनवरी को काजल फर्स्ट लेडी बतौर ग्रैफिटी आर्टिस्ट सम्मानित किया गया।
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    काजल होम साइंस में ग्रैजुएशन कंपलीट कर चुकी हैं।
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    काजल ने हायर एजुकेशन में आर्ट में ही डिग्री लेने का फैसला किया है।
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    काजल ग्रैफिटी आर्टिस्ट होने के साथ ही एक हिप हॉप डांसर भी हैं।
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    काजल को ग्रैफिटी आर्ट की दुनिया में डिजी-वन नाम से जाना जाता है।
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    काजल इस आर्ट के जरिए लोगों को कई मुद्दों पर अवेयर करती हैं।
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