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एयरपोर्ट पर पहले से पता होगी यात्री की कुंडली

भारतीय दूतावासों और एयरपोर्ट पर तैनात इमीग्रेशन विंग को इस साल मार्च तक एक सॉफ्टवेयर के जरिए आपस में जोड़ दिया जाएगा।

अनूप कुमार मिश्र | Last Modified - Jan 02, 2018, 07:34 AM IST

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    पहला विदेश से आने वाले संदिग्ध मुसाफिरों की आसानी से पहचान की जा सकेगी।

    नई दिल्ली.विदेश स्थित भारतीय दूतावासों और एयरपोर्ट पर तैनात इमीग्रेशन विंग को इस साल मार्च तक एक सॉफ्टवेयर के जरिए आपस में जोड़ दिया जाएगा। इसकी शुरुआत दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होगी। दूतावासों और इंडियन एयरपोर्ट के इमीग्रेशन विंग के बीच होने वाले इस इंटीग्रेशन के दो बडे़ फायदे होंगे। पहला विदेश से आने वाले संदिग्ध मुसाफिरों की आसानी से पहचान की जा सकेगी। दूसरा, विदेशी मुसाफिरों की इमीग्रेशन जांच प्रक्रिया महज एक मिनट में पूरी हो जाएगी।

    सुरक्षा एजेंसियों को पता होगा मुसाफिरों का उद्देश्य

    - योजना से जुड़े खुफिया विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इसके जरिए विदेश से आने वाले मुसाफिरों पर सीधी निगाह रखना संभव होगा। इसके लागू होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को पता होगा कि कौन सा मुसाफिर किस उद्देश्य से कितनी बार किस एयरपोर्ट पर आया है।

    - वह आने और जाने के लिए किस एयरपोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है। वह कितनी बार जल्दी-जल्दी भारत विजिट कर रहा है। इन जानकारियों के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां न केवल मुसाफिरों की प्रोफाइलिंग कर सकेंगी बल्कि जरूरत पड़ने पर उस तक पहुंच सकेंगी।

    - योजना के अगले फेज में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के सभी विदेशी दूतावासों को भारतीय इमीग्रेशन विंग से जोड़ा जाएगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता होने की उम्मीद है।

    इन तीन स्टेप्स में जानिए कैसे बेहतर हो जाएगी एयरपोर्ट पर निगरानी

    1. दूतावास में पैसेंजर का वीजा जारी होते ही उसकी फोटो, फिंगर प्रिंट समेत अन्य जानकारियां इंडियन एयरपोर्ट के इमीग्रेशन विंग के पास पहुंच जाएंगी।

    2. इसके बाद जब मुसाफिर इंडियन एयरपोर्ट पहुंचेगा तो ई-इमीग्रेशन काउंटर पर उसे अपने पासपोर्ट का बायोडाटा स्कैन कराना होगा।

    3. इस दौरान इमीग्रेशन विंग के पास दूतावास से मिली जानकारियां पहले से मौजूद होंगी। जिनका ई-इमीग्रेशन काउंटर पर मिलान कर लिया जाएगा।

    खुफिया विभाग विदेश से आए पैसेंजर की रीयल टाइम इंफॉर्मेशन रखेगा
    योजना के पूरा होने के बाद विदेश से आवागमन करने वाले सभी मुसाफिरों की रियल टाइम इंफॉर्मेशन भारतीय इमीग्रेशन विंग के पास मौजूद होगी। इसके जरिए खुफिया विभाग के पास भी इनकी रीयल टाइम जानकारी आ जाएगी।

    क्या है मौजूदा इमीग्रेशन प्रक्रिया

    - विदेश से आने वाले मुसाफिरों को फिलहाल एक इमीग्रेशन फॉर्म भरना होता है।

    - इसमें नाम, पासपोर्ट नंबर, फ्लाइट नंबर, आगमन तिथि जैसी जरूरी सभी जानकारियां मांगी जाती हैं।
    - अराइवल विंग में तैनात अधिकारी पासपोर्ट के बायोडाटा पेज और वीजा स्कैन करते हैं।
    - बायोडाटा पेज और वीजा में मौजूद फीचर्स की यूवी लाइट से जांच की जाती है।
    - सब कुछ सही पाए जाने के बाद इमीग्रेशन अधिकारी पासपोर्ट पर अराइवल की मुहर लगाकर मुसाफिरों को देश में प्रवेश की इजाजत दे देते हैं।
    संदिग्ध की पहचान करने और वीजा वेरिफिकेशन में अभी लगते हैं 3 से 4 महीने
    मौजूदा व्यवस्था में विदेश जा रहे मुसाफिर पर शक होने पर इमीग्रेशन अधिकारी वीजा और पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए संबंधित दूतावास भेजते हैं। दूतावास से वेरिफिकेशन में तीन से चार महीने लग जाते हैं। इस दौरान संदिग्ध मुसाफिर जमानत पर रिहा रहता है।
    अमेरिका में यह तक पता होता है कि किस होटल में रुकेगा विदेशी मुसाफिर
    - अमेरिकन दूतावास वीजा जारी करते वक्त आवेदक की जानकारियां अपने सभी एयरपोर्ट स्थित इमीग्रेशन विंग से साझा करता है। इसके चलते अमेरिकन एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन जांच अधिकारी के पास मुसाफिर की जानकारी पहले से मौजूद होती है।
    - अधिकारी को पता होता है कि मुसाफिर किस वजह से यहां आया है। किस होटल में रुकने वाला है। इसके अलावा दूसरे देश में स्थित अमेरिकन दूतावास में दिए गए फिंगर प्रिंट और फोटो भी अमेरिकन एयरपोर्ट के इमीग्रेशन अधिकारी के पास मौजूद होते हैं।
    - इन्हीं जानकारियों के आधार पर इमीग्रेशन अधिकारी मुसाफिर से सवाल-जवाब करते हैं। संतुष्ट होने पर मुसाफिर को अपने देश में प्रवेश की इजाजत दे देते हैं।
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    दूसरा, विदेशी मुसाफिरों की इमीग्रेशन जांच प्रक्रिया महज एक मिनट में पूरी हो जाएगी।
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    खुफिया विभाग के पास भी इनकी रीयल टाइम जानकारी जाएगी।
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    अमेरिकनदूतावास वीजा जारी करते वक्त आवेदक की जानकारियां अपने सभी एयरपोर्ट स्थित इमीग्रेशन विंग से साझा करता है।
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