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सरकार का दावा: किसानों को लागत का 50% MSP मिल रहा; असलियत: 38% ही दिया जा रहा

Bhaskar News | Last Modified - Feb 15, 2018, 01:17 PM IST

हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब समेत ज्यादातर राज्यों में मिनिमम सपोर्ट प्राइज से किसान फायदे में नहीं हैं।
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    जेटली ने 9 फरवरी को राज्यसभा में बताया कि लागत में फसल पर होने वाले खर्च के साथ किसान परिवार का श्रम भी जोड़ा जाएगा। - फाइल

    नई दिल्ली/भोपाल/चंडीगढ़.वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दो हफ्ते पहले बजट भाषण में कहा था कि रबी फसलों का मिनिमम सपोर्ट प्राइस (एमएसपी) किसानों की लागत का डेढ़ गुना हो गया है। तब से इस मुद्दे पर बहस जारी है। विपक्षी पार्टियां, किसान संगठन और कृषि विज्ञानी लागत के फॉर्मूले पर सवाल उठा रहे हैं। केंद्र सरकार ने 1965-66 में गेहूं और धान की सरकारी खरीद के लिए एमएसपी सिस्टम शुरू किया था। अभी सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसपी) की सिफारिशों के आधार पर 23 फसलों के एमएसपी तय करती है। सीएसपी दो फॉर्मूले के आधार पर लागत निकालता है। सी-2 लागत किसान की वास्तविक लागत होती है। इसकी तुलना में किसी भी फसल का एमएसपी 18% से 38% ही ज्यादा है। फसल उगाने में कितना खर्च आता है, इसकी हकीकत जानने के लिए भास्कर ने सात राज्यों में किसानों से बात की।

    पंजाब-हरियाणा में एमएसपी से ज्यादा लागत

    - हर राज्य में अलग हालात की वजह से फसल उगाने का खर्च भी अलग होता है। इसके बावजूद देश के बहुत कम किसानों को लागत से डेढ़ गुना कीमत मिलती है।

    - रबी की मुख्य फसल गेहूं है। पंजाब और हरियाणा में तो इस पर किसानों की लागत एमएसपी से ज्यादा आती है। जमीन के किराए और मजदूरी की वजह से यहां खर्च ज्यादा है। सिर्फ मध्य प्रदेश के कुछ इलाके हैं, जहां एमएसपी को किसानों के खर्च का डेढ़ गुना कहा जा सकता है।

    हरियाणा-महाराष्ट्र में चने का एमएसपी लागत से दोगुना

    - चना और सरसों भी रबी की मुख्य फसलें हैं। हरियाणा-महाराष्ट्र में चने का एमएसपी तो लागत के दोगुना तक है, लेकिन सरसों के मामले में ऐसा नहीं है।

    - राजस्थान में समर्थन मूल्य लागत से 30% ज्यादा बैठता है। हरियाणा में तो किसान का खर्च एमएसपी से ज्यादा ही है।

    लागत को दोगुना मिलना चाहिए

    - किसान वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विजय कपूर ने कहा कि जब तक कुल खर्च का दोगुना नहीं मिलेगा, खुशहाली नहीं आएगी।

    - कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा बताते हैं कि सिर्फ 6% किसान एमएसपी पर फसल बेच पाते हैं। 94% इससे वंचित ही रह जाते हैं।

    किसानों की पूरी लागत जोड़ी जाए तो फायदा नहीं

    राजस्थान: समर्थन मूल्य पर सरसों और मूंगफली की खरीद 25% से ज्यादा नहीं होती। पहले आओ पहले पाओ के कारण नंबर नहीं आता।
    बिहार:4 साल से सरकार एमएसपी पर गेहूं खरीदने की घोषणा तो करती है, लेकिन खरीद नहीं होती। {महाराष्ट्र: 10% किसानों को अच्छा दाम मिलता है। माल बाजार में आता है तो सरकारी केंद्र नहीं होते हैं।
    मध्य प्रदेश: कई बार फसल खराब बताकर सरकार खरीदती ही नहीं। गेहूं पर भी किसानों को प्रति क्विंटल सिर्फ 500 रुपए का मार्जिन मिलता है।

    सरकारी फॉर्मूले से गेहूं का एमएसपी लागत का 112%
    फसलए2+एफएल लागतसी-2 लागतएमएसपीए2+एफएल लागतसी-2 लागत
    गेहूं8171,2561,735112%38%
    जौ8451,1901,41067%18%
    चना2,4613,5264,40079%25%
    सरसों2,1233,0864,00088%30%
    गेहूं (एमएसपी- 1735 रुपए क्विंटल)
    प्रदेशलागत
    पंजाब2,600
    हरियाणा2,325
    राजस्थान1,235
    म. प्र.800-1,420
    बिहार1,200-1,400

    चना (एमएसपी- 4400 रुपए क्विंटल)

    हरियाणा1,415
    महाराष्ट्र2,000
    गुजरात

    1,175

    सरसों (एमएसपी- 4000 रुपए क्विंटल)

    राजस्थान3,085
    मध्य प्रदेश2,350
    हरियाणा4,825

    - अधिकारी कहते हैं कि किसानों को खुले बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक कीमत मिलती है। किसान कहते हैं 1,400 की लागत की तुलना में 1,500 रु क्विंटल बेचते हैं।

    लागत निकालने का मौजूदा सरकारी फॉर्मूला किसानों के साथ ही धोखा है : देविंदर शर्मा, कृषि विशेषज्ञ


    Q. सरकार का दावा कितना सही है?
    A
    . ‘ए2+एफएल’ का आधार किसानों के साथ धोखा है। ऐसे तो एमएसपी लागत का 112% तक है। जबकि सरकार 50% ज्यादा देने की बात कह रही है। यानी वह एमएसपी घटा भी सकती है।

    Q. तो कौन सा तरीका होना चाहिए?
    A.
    इंडस्ट्री की लागत में वैरिएबल और फिक्स्ड कॉस्ट दोनों जोड़े जाते हैं। यही बात किसानों के मामले में भी अपनाएं।

    Q. सी-2 फॉर्मूले से कितना खर्च होगा?
    A. सरकार पर करीब 80 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ आएगा।

    Q. 50% मार्जिन कितना उचित है?
    A.
    किसान को सिर्फ 50% मार्जिन क्यों मिले? रिटेल इंडस्ट्री में 5000% तक मार्जिन है। सरकार उसे क्यों नहीं रोकती? 1970 में गेहूं का एमएसपी 76 रुपए था। अब 1,735 रुपए है। यानी 23 गुना। इस दौरान नौकरीपेशा लोगों का वेतन 300 गुना तक बढ़ा। भत्ते मिलते हैं सो अलग। किसानों को तो कोई भत्ता नहीं मिलता।

    Q. एमएसपी बढ़ा तो महंगाई भी बढ़ेगी?
    A.
    सरकार चाहे तो किसानों से कम कीमत पर फसल खरीदे। कमाई बढ़ाने के लिए बाकी रकम उसके खाते में जमा करे। सभी राज्य सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करंे तो 4.80 लाख करोड़ रु. का खर्च बढ़ेगा। नौकरीपेशा 1.3% हैं। फिर 52% आबादी वाले किसानों की फिक्र क्यों नहीं?

    भास्कर विशेष- एमएसपी; किसानों के लिए सबसे बड़ी घोषणा का 7 राज्यों से जुटाया गया सच

    तारीख: 1 फरवरी 2018 स्थान: संसद में वित्त मंत्री का बजट भाषण

    खरीफ में भी लागत का डेढ़ गुना एमएसपी
    सरकार किसानों की बेहतरी के लिए खरीफ फसलों का एमएसपी (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) भी लागत का डेढ़ गुना तय करने जा रही है। रबी फसलों का एमएसपी लागत का डेढ़ गुना पहले ही किया जा चुका है।

    -अरुण जेटली, वित्त मंत्री

    विपक्ष ने जेटली से पूछा कि लागत का फॉर्मूला क्या है?
    9 फरवरी, शुक्रवार को राज्यसभा में बजट पर बहस के दौरान जेटली ने बताया कि लागत में फसल पर होने वाले खर्च के साथ किसान परिवार का श्रम भी जोड़ा जाएगा...

    लेकिन सरकार ने एमएसपी तय करने में किसान की पूरी लागत जोड़ी ही नहीं

    फसल की लागत निकालने के दो तरीके हैं...
    1. ‘ए2+एफएल’ फॉर्मूला:
    इसमें सिर्फ नकदी लागत और परिवार की मजदूरी (एफएल- फैमिली लेबर) को जोड़ा जाता है। जमीन का किराया और कर्ज का ब्याज इसमें शामिल नहीं है।
    2. ‘सी-2’ फॉर्मूला :इसमें संपूर्ण लागत जोड़ी जाती है।
    {सरकार पहले फॉर्मूले के आधार पर कह रही है कि उसने रबी का एमएसपी डेढ़ गुना कर दिया है।

    12 साल पहले हुई थी 50% ज्यादा एमएसपी की सिफारिश

    एमएस स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में लागत का डेढ़ गुना एमएसपी की सिफारिश की थी। किसान नेता भी इसी फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं। पर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं कर सकते।

  • सरकार का दावा: किसानों को लागत का 50% MSP मिल रहा; असलियत: 38% ही दिया जा रहा
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    एमएस स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में फसल लागत का डेढ़ गुना एमएसपी की सिफारिश की थी। - फाइल
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