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अपना आदेश ही लागू नहीं करा पाता सूचना आयोग: माथुर

Bhask | Last Modified - Dec 29, 2017, 05:00 AM IST

विभागों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए सूचना के अधिकार(आरटीआई) कानून को लागू हुए 12 साल बीत चुके हैं।
अपना आदेश ही लागू नहीं करा पाता सूचना आयोग: माथुर

नई दिल्ली। विभागों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए सूचना के अधिकार(आरटीआई) कानून को लागू हुए 12 साल बीत चुके हैं। बावजूद इसके केंद्रीय सूचना आयोग राजनीतिक दलों को इसके दायरे में लाने के अपने 4 साल पुराने आदेश को ही लागू कराने में अब तक असफल रहा है। यही नहीं अकेले 16 राज्यों में ही इस साल करीब 1 लाख 75 हजार आरटीआई आवेदन लंबित हैं। भास्कर संवाददाता अमित कुमार निरंजन ने इन तमाम मुद्दों में मुख्य सूचना आयुक्त राधा कृष्ण माथुर से बात की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश-

आरटीआई के दायरे में आने का सीआईसी का आदेश राजनीतिक पार्टियां नहीं मान रहीं। आयोग असहाय क्यों है?
उत्तर - अधिकारी सीमित हैं, इसलिए हम अपना आदेश ही लागू करवाने में अक्षम हैं। हमने भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी को पब्लिक अथॉरिटी घोषित करके अपना काम किया। अब पार्टियां आदेश नहीं मान रहीं तो क्या कर सकते हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।
अन्य पब्लिक अथॉरिटी के मामले में तो आयोग सख्त नजर आता है।
उत्तर - जिन पब्लिक अथाॅरिटी ने जन सूचना अधिकारी नियुक्त हुए हैं, जवाब न देने पर उन पर फाइन किया जाता है, लेकिन पार्टियों ने पब्लिक अथॉरिटी ही नियुक्त नहीं किए।
पिछले दो सालों में पीएमओ ने सबसे ज्यादा करीब 25 प्रतिशत तक आरटीआई आवेदन रिजेक्ट किए।
जवाब - इसका जवाब पीएमओ दे तो बेहतर है, मैं कुछ नहीं कर सकता।
डिजिटलाइजेशन के दौर में आरटीआई के जवाब कागज पर क्यों?
जवाब - सभी जवाब वेबसाइट पर डालना ठीक नहीं होगा। क्योंकि 75% आरटीआई आवेदन राशन, पेंशन जैसे मामलों और 25% विभागीय, भ्रष्टाचार या अन्य जानकारी के लिए लगाई जाती है। किसी की व्यक्तिगत जानकारी क्यों साझा की जाए।

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Web Title: apnaa aadesh hi laagau nahi karaa paataa suchnaa aayoga: maathur
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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