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रजिस्ट्रार जनरल: सुप्रीम कोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं ये

रजिस्ट्रार जनरल ही वह शख्स हैं जो सुप्रीम कोर्ट में आपकी पिटिशन स्वीकार होगी या नहीं, इस पर सबसे पहला निर्णय करते हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2018, 07:47 AM IST
रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट की सबसे अहम कड़ी है। रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट की सबसे अहम कड़ी है।

नई दिल्ली. देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट। यहां के प्रशासनिक कामों के सबसे अहम व्यक्ति हैं रजिस्ट्रार जनरल। ये ही वह शख्स हैं जो सुप्रीम कोर्ट में आपकी पिटीशन स्वीकार होगी या नहीं, इस पर सबसे पहला निर्णय करते हैं। पिटीशनर को खुद बहस का अधिकार दिया जा सकता है या फिर नहीं? ये भी यही तय करते हैं। हाल ही में केस एलोकेशन को लेकर सुप्रीम कोट के जजों के बीच हुए विवाद के बाद दैनिक भास्कर ने रजिस्ट्रार की ताकत की पड़ताल की। बता दें चीफ जस्टिस से भी पहले रजिस्ट्रार जनरल के पास आती हैं। लिहाजा रजिस्ट्रार जनरल कोर्ट की सबसे अहम कड़ी हैं।

जज के पास सुनवाई से पूर्व ही पिटीशन को अमान्य करार दे सकता है
- सुप्रीम कोर्ट के वकील सुमीत वर्मा बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में संविधान के आर्टिकल 32 के तहत जब भी कोई जनहित याचिका दायर की जाती है तो पिटीशनर एक हलफनामा भी दायर करता है। इसमें वह बताता है कि पिटीशन इस पहलू पर पहली बार याचिका दायर कर रहा है और उसने इसके अलावा कहीं अन्य कोई पिटीशन दायर नहीं की है। इस दावे की जांच भी रजिस्ट्रार जनरल द्वारा कराई जाती है।

- "जांच में दावा फर्जी निकलता है तो रजिस्ट्रार जनरल उस मामले को रजिस्टर्ड ही नहीं करता। साथ ही एक आदेश भी रजिस्ट्री ऑफिस में जारी कर देता है कि इस पिटीशन को रजिस्टर्ड ही न किया जाए। जिसके बाद वह मामला सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों तक पहुंच ही नहीं पाता।"


एग्माम्पल: बीते दिनों एक वकील मैथ्यू नेदुमपारा ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने मेंशनिंग करते हुए कहा था कि रजिस्ट्री ऑफिस द्वारा उनके मामले को सुनवाई के लिए लिस्टेड ही नहीं किया जा रहा। इस मामले पर चीफ जस्टिस ने कुछ भी सुनने से इनकार कर दिया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि जब मामला लिस्टेड होगा, तभी हम मामले को सुनेंगे।

व्यक्ति खुद बहस करेगा या वकील, यह तय करने का अधिकार

- सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सामने पिटीशन खुद या वकील दोनों ही जरिए दायर की जा सकती है। अगर कोई व्यक्ति बिना किसी वकील के अपनी पिटीशन पर खुद ही जिरह करना चाहता है तो वह इसकी परमिशन के लिए रजिस्ट्रार जनरल के पास अप्लाई करता है।

- रजिस्ट्रार जनरल जांच करता है कि अप्लाई करने वाला व्यक्ति कोर्ट के सामने खुद बहस करने के काबिल है या नहीं? अगर नहीं है तो रजिस्ट्रार जनरल एप्लिकेंट को वकील करने के लिए कहता है। अगर एप्लिकेंट वकील कर पाने में कैपेबल नहीं है तो रजिस्ट्रार जनरल उस व्यक्ति को फ्री सरकारी वकील भी मुहैया कराता है।


एग्जाम्पल- यूपी में अपनी संपत्ति की ऐवज में सरकारी बैंक से मोरगेज प्रॉपर्टी पेंशन न मिल पाने को लेकर एक 80 साल के व्यक्ति ने दिसंबर महीने में अपनी पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी।

- उसने अपनी बहस खुद करने की मांग की थी। जिसे रजिस्ट्रार जनरल ने स्वीकार करते हुए उन्हें अपनी बात खुद अदालत में रखने की परमिशन दी थी। इस पिटीशन पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने पहली ही सुनवाई पर निपटारा करते हुए बुजुर्ग को पेंशन जारी करने के निर्देश दिए थे।

कौन सी पिटीशन स्वीकार्य है और कौन सी नहीं, रजिस्ट्रार जनरल तय करते हैं
- वकील डी. भौमिक उर्फ रोहन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में जितनी भी पिटीशनएं दायर की जाती हैं। उनमें दावों के मुताबिक, तथ्यात्मक सामग्री पूरी है या नहीं? कौन सी पिटीशन तकनीकी रूप से स्वीकार्य है या नहीं? यह जांचने का काम रजिस्ट्रार जनरल करते हैं।

- अगर किसी पिटीशन में कोर्ट को किसी मामले में गलत जानकारियां दी गई हैं तो रजिस्ट्रार जनरल को अधिकार है कि वह आदेश जारी कर सकता है कि इस पिटिशन को सुनवाई के लिए कोई नंबर ही न दिया जाए। इतना ही नहीं अगर पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में लंबित है तो वह पिटीशन को खारिज करने की मांग चीफ जस्टिस से कर सकता है।

खुद चीफ जस्टिस ने कहा था- रजिस्ट्रार पर आरोप यानी मुझ पर आरोप

- सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि रजिस्ट्रार किसी भी मामले को चीफ जस्टिस की सलाह से किसी भी कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए लगा सकता है। इस पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
- 7 अप्रैल 2017 को तब चीफ जस्टिस रहे जेएस खेहर के सामने वकील चिराग बल्सारा ने मेंशनिंग कर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ऑफिस पर गंभीर आरोप लगाए थे।
- वकील ने कहा था कि उनके मामले की सुनवाई पहले दूसरी बेंच कर रही थी। मगर बाद में रजिस्ट्री ऑफिस ने हेराफेरी कर सुनवाई के लिए दूसरी बेंच में लगा दिया। इस पर चीफ जस्टिस गुस्सा हो गए थे।
- चीफ जस्टिस ने कहा था कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई रजिस्ट्री कार्यालय पर आरोप लगाने की‌? हम तुम्हें जेल भेज देंगे। रजिस्ट्रार कोई भी फैसला हमसे सलाह लेने के बाद ही करते हैं। उन पर आरोप लगाने का अर्थ आप हम पर आरोप लगा रहे हैं। उसके बाद वकील ने चीफ जस्टिस से माफी मांग ली थी।

7 अप्रैल 2017 को तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर के समक्ष वकील चिराग बल्सारा ने मेंशनिंग कर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए थे। 7 अप्रैल 2017 को तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर के समक्ष वकील चिराग बल्सारा ने मेंशनिंग कर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए थे।
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रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट की सबसे अहम कड़ी है।रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट की सबसे अहम कड़ी है।
7 अप्रैल 2017 को तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर के समक्ष वकील चिराग बल्सारा ने मेंशनिंग कर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए थे।7 अप्रैल 2017 को तत्कालीन चीफ जस्टिस जेएस खेहर के समक्ष वकील चिराग बल्सारा ने मेंशनिंग कर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए थे।
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